संग-संग : अनुराग बसु और तानी बसु

बर्फी से फिलहाल चर्चित अनुराग बसु की पत्‍नी और हमसफर हैं तानी। दोनों की प्रेमकहानी और शादी किसी फिल्‍म की तरह ही रोचक है। संग-संग में इस बार अनुराग और तानी के संग... 
मुलाकात और एहसास प्रेम का
तानी - तब मैं दिल्ली के एक गैरसरकारी संगठन में काम करती थी। डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का थोड़ा-बहुत काम देखती थी। मैं उस संगठन में कम्युनिकेशन कंसलटेंट थी। उन्होंने असम के ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने का फैसला किया। उस समय मैंने उसकी स्क्रिप्ट लिखी और यह सोचा कि मैं ही डॉक्यूमेंट्री बनाऊंगी। संगठन के प्रमुख आलोक मुखोपाध्याय डायरेक्टर रमण कुमार को जानते थे। दोनों दोस्त थे। उन्होंने रमण जी को यह काम सौंप दिया। मुझे थोड़ा बुरा भी लगा। थोड़ी निराशा जरूर हुई, लेकिन शूटिंग के लिए मैं दिल्ली से असम गई। रमण कुमार जी मुंबई से अपनी टीम लेकर असम पहुंचे। वहां पता चला कि रमण जी तो शूट नहीं कर रहे हैं। रमण जी का एक जवान सा असिस्टेंट ही उछल-कूद कर सारे काम कर रहा है। हालांकि मैंने फिल्म इंस्ट्रीटयूट से पढ़ाई की है, लेकिन उस जवान लडक़े की शॉट टेकिंग से मैं चकित थी। मैं बहुत प्रभावित हुई। बाद में पता चला कि वह जवान लडक़ा अनुराग बसु है। वहीं परिचय हुआ। उसके बाद डॉक्यूमेंट्री की एडिटिंग के लिए मैं मुंबई आई। अनुराग तब दिन में अपनी सीरियल की शूटिंग करते थे और रात में डाक्यूमेंट्री एडिट करते थे। असम की शूटिंग के समय ही होली आ गई थी। होली में भी अनुराग का उत्साह देखने लायक था। मैंने ऐसे ही अनुराग से पूछा कि आपको किस तरह की लडक़ी पसंद है? उन्होंने तपाक से कहा, ‘आप जैसी’। फिर ऐसा कुछ हुआ कि मैं मुंबई आ गई। राकेश सारंग आशीर्वाद सीरियल बना रहे थे। मैं वहां असिस्टेंट बन गई। हमारी बात-मुलाकात होती रही। दोस्ती बढ़ती गई।
अनुराग - गुवाहाटी में हमारी पहली मुलाकात हुई। पहली नजर में प्यार जैसी बात तो नहीं थी। आउटडोर में हर जवान लडक़े की नजर शूटिंग में आई लड़कियों पर रहती है। शुरुआत में तानी का एटीट्यूड बॉस जैसा था। उन्हें वह डॉक्यूमेंट्री अपनी बपौती लग रही थी। उन्हें लगता था कि मुझे उनको रिपोर्ट करना चाहिए। एक रात डिनर में मछली थी। मैं ऊहापोह में था कि कांटा-छुरी से मछली कैसे खाएं। मैंने तानी को देखा कि वह एक कोने में पालथी मार कर घपाघप मछली खा रही हैं। मुझे लगा कि उनके बगल में बैठ कर मैं भी खा लेता हूं। उस समय पहली बार हमारी बातचीत हुई थी। इसके अलावा मुझे संगीत से बहुत प्यार है। जोरहाट में यूनिट की छोटी सी मौज-मस्ती की पार्टी में एक रात तानी ने गाना गाया। उस रात पहली बार मैंने तानी को महसूस किया। तानी बहुत अच्छा रवींद्र संगीत गाती हैं। उस रात हम सभी ने थोड़ी-थोड़ी रम पी रखी थी। कहना मुश्किल है कि रम, रवींद्र संगीत और तानी में किस ने ज्यादा असर किया? लेकिन यह सच है कि उसी रात मैंने तानी से नजदीकी महसूस की।
प्रेम और प्रगाढ़ता
अनुराग - हमारे बीच प्रेम की गति एक जैसी नहीं रही। असम से लौट कर तानी दिल्ली चली गईं और मैं मुंबई आ गया। ऐसा लगा कि प्रेम का धागा टूट गया। मुंबई आने के बाद मैं अपने छोटे-मोटे अफेयर में फंस गया। बंदर भला गुलाटी मारने से कैसे बाज आए? फिर भी तानी मेरी जिंदगी में आती-जाती रहीं। शादी से पहले छह-सात बार हमलोगों का ब्रेकअप भी हो गया था। तय हो जाता था कि अब बात नहीं करेंगे। एसएमएस भी नहीं करेंगे। फिर एक एसएमएस से शुरू होता था और फिर तानी आ जाती थीं। मेरे डैडी हम लोगों के लिए कहा करते थे - राम मिलाए जोड़ी ़ ़ ़
तानी - मैं निश्चित नहीं कर पा रही थी कि अनुराग से शादी करनी है या नहीं करनी है? हालांकि उम्र में मैं बड़ी थी, लेकिन बाद में महसूस किया कि अनुराग हर तरह से सीनियर और सुपीरियर हैं। हमारे संबंधों में सरप्राइज जैसी बातें होती थी। हमेशा कुछ नया होता था। अनुराग में एक आंतरिक गति है। उनके जीवन में कुछ भी शांतिपूर्वक नहीं होता। शादी, बच्चे, बच्चों की परवरिश, घर जैसे हर मामले में मतभेद चलता रहता है। झगड़े होते हैं। इसके साथ ही हमारे संबंध में ढेर सारा एक्साइटमेंट भी है। एक एनर्जी भी है। अनुराग बहुत ही इमैजिनेटिव हैं। फिल्म का सेट हो या घर का इंटीरियर ़ ़ ़ आप अनुराग के इमैजिनेशन से दंग रह जाएंगे। अनुराग के काम और कल्पनाओं में मैं साथ रहती हूं और हर औरत को यह स्थिति अच्छी लगती है।
बदलाव,लगाव और जुड़ाव
अनुराग - पहले मैं झूठ बोलने में कतराता नहीं था। साकी नाका में शूटिंग कर रहा हूं तो भी आसानी से कह देता था कि कोलकाता में हूं। अभी नहीं आ सकता। यह तानी ने बंद करवा दिया। मैं कुछ भी बोलता था तो तानी यकीन ही नहीं करती थी। कई बार तो तानी ने पोल भी खोल दी। तानी युधिष्ठर से भी ज्यादा सच बोलती है। मुझे याद है कि मैं मैट्रो का नरैशन देने यूटीवी गया था। पहली बार विशेष फिल्म से बाहर निकल रहा था। थोड़ा घबराया हुआ था। मैंने उन्हें कहानी बतायी। रोनी ने पूछा कि स्क्रिप्ट कब तक दे दोगे? तानी जोर से हंस पड़ी और कहा - आपको कभी स्क्रिप्ट नहीं मिलेगी। तानी की यह अच्छाई है। दरअसल तानी की हर बुराई में एक अच्छाई है। तानी में एक वायब्रेंस है। वह मुझे कभी बोझिल नहीं लगती है। हमें लग ही नहीं रहा है कि हमारी शादी को नौ साल हो गए हैं। अभी तक पहली मुलाकात की एनर्जी और एक्साइटमेंट है।  अभी तक हमलोग बचकानी हरकतें करते हैं। परसों ही स्कूटर से भींगते हुए घर गए और मुंबई की बारिश का मजा लिया। कई बार काम का टेंशन लेकर मैं घर लौटता हूं तो तानी बगैर किसी शिकायत के मुझे कूल करने की कोशिश करती हैं। तानी का सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत अच्छा है। बुरे को बुरा कहने में इन्हें देर नहीं लगती। थोड़ी मुंहफट हैं। हम लोगों ने प्रोडक्शन भी चालू कर दिया है। उसे तानी ही पूरी साफ-सफाई से चलाती हैं।
तानी - अनुराग बहुत अच्छा खाना पकाते हैं। जब भी काम का तनाव और थकान होता है तो राहत के लिए अनुराग खाना बनाते हैं। बच्चों को भी इनके हाथ का खाना पसंद है। यहां घर में पहले मम्मी-डैडी दोनों थे। अभी डैडी नहीं रहे। मम्मी हैं। मुझे लगता है कि मम्मी हमारा बहुत बड़ा संबल हैं। अनुराग से जब मेरी पहली मुलाकात हुई थी तब वे सभी मीरा रोड में एक छोटे से घर में रहते थे। एक लंबे स्ट्रगल के बाद हम सभी यहां तक पहुंचे हैं। मुझे याद है शादी के बाद अनुराग ने सफारी कार खरीदी थी। उस समय डैडी ने कहा था कि अनुराग तुम्हें याद है ़ ़ ़ हमारा पहला मकान तुम्हारी इस कार से भी छोटा था। वे बड़े देशी किस्म के मजाकिया स्वभाव के व्यक्ति थे। अनुराग ने बहुत पहले स्पष्ट कर दिया था कि हमारी शादी होगी तो हमलोग इक_े रहेंगे।
अनुराग - तानी की एक क्वालिटी की मैं खास तारीफ करूंगा। शादी के बाद लडक़े तो अपने घर में ही रहते हैं। लडक़ी नई फैमिली में आ जाती है। मैंने इकट्ठे रहने की बात जरूर की थी, लेकिन मेरे मन में आशंका थी कि पता नहीं तानी कैसे एडजस्ट करेंगी। सोचें जरा कितना मुश्किल काम है किसी नए दंपत्ति को अपना मां-बाबा कहना। तानी मेरे मम्मी डैडी को बोदी-दादा बोलती थी।
तानी - दोनों दिल से इतने जवान थे कि मुझे मां-बाबा कहना नहीं जमा।
अनुराग - फिर तो मुझे तुम्हें मौसी या बुआ कहना चाहिए? शादी के बाद काफी समय तक तानी का भैया-भाभी संबोधन चलता रहा। धीरे-धीरे वह मां-बाबा में तब्दील हुआ। शादी के समय मैंने सोचा था कि छह महीने की छुट्टी लेकर घर पर रहूंगा और तानी एवं मां-बाबा के बीच पुल का काम करूंगा।
तानी - अच्छा, तुमने ऐसा सोचा था। आज पता चला।
अनुराग - उसकी जरूरत नहीं पड़ी। फिर भी मैंने छह महीने तक कोई काम नहीं किया। यही कोशिश रही कि आस-पास मौजूद रहूं। शादी के बाद के छह महीने एडजस्टमेंट के हिसाब से बहुत नाजुक होते हैं। मैं तो संयुक्त परिवार के लडक़ों को कहूंगा कि वे ज्यादा से ज्यादा घर पर रहने की कोशिश करें। सभी को वैवाहिक छुट्टी लेनी चाहिए। आप बाहर से एक लडक़ी लेकर आते हैं और उसे अपने परिवार का सदस्य बनाते हैं। आपकी मौजूदगी में यह प्रक्रिया आसान होगी।
तानी - मुझे मालूम था कि अनुराग क्या चाहते हैं?  हम दो अलग-अलग व्यक्ति हैं। मां से भी कई बार बहस होती है। वह नाराज भी होती हैं, लेकिन कभी डांटती नहीं हैं। उल्टा मैं गुस्से में कई बार बोल जाती हूं। मुझे ऐसा करना नहीं चाहिए। हर बार गलती का एहसास होता है और उसके बाद मां को पटा लेती हूं। मैं बहुत खुश हूं कि मेरी सास इतनी अच्छी हैं। मेरी तो देवरानी से भी छनती है। हालांकि वह मुझ से चौदह साल छोटी है।
परिवार,काम और झगड़े
तानी - मेरी परवरिश और पढ़ाई-लिखाई शांतिनिकेतन में हुई। अनुराग भिलाई और मुंबई में रहे। हम दोनों में ढेर सारे अंतर हैं। अभी याद करती हूं तो शुरू की मुलाकातों से अभी के जीवन में कई परिवर्तन आ गए हैं। थोड़ी मैं बदल गई हूं। थोड़ा और सब भी बदले हैं। हम सभी के बीच अच्छी बात है कि कोई भी अड़ के खड़ा नहीं होता। समय के साथ हमलोग बहते और बदलते गए हैं। मां ज्यादातर समय भिलाई में रहीं। मुंबई आने के बाद यहां के हिसाब से उन्होंने खुद को बदला। हम सभी में एक समानता यह भी है कि हर कोई बदलने को तैयार रहता है। हम किसी भी पृष्ठभूमि से आएं साथ रहने पर एक दूसरे से तारतम्य तो बन ही जाता है।
अनुराग - हमें पता ही नहीं चलता कि ऑफिस में कितना ज्यादा घर घुस आता है और घर में ऑफिस दखल करता है। हमारे व्यक्तिगत झगड़े नहीं होते हैं। हमारी ज्यादातर लड़ाई काम को लेकर होती है। हमारी बीच बहुत सारी चीजें सुलझ चुकी है। मनमुटाव काम को लेकर ही होता है।
तानी - व्यक्तिगत झगड़े भी होते हैं। अब जैसे कि अनुराग भीगा तौलिया बिस्तर पर छोड़ देते हैं। यह आदत अभी तक बनी हुई है। अनुराग ने तो एक सीन ‘मैट्रो’ में डाल भी दिया था।
अनुराग - भीगे तौलिए का तो सीन नहीं था। हां,शिल्पा एक बार केके के  मोबाइल पर कंगना का एसएमएस पढ़ लेती है। यह सीन मेरी लाइफ से था।
तानी - यह तो आज भी होता है।
स्पेस और स्नेह
अनुराग - सच कहूं तो मैं परफेक्ट तो हूं नहीं। अभी बड़ा हो गया हूं, लेकिन नजरें तो वही हैं। ऑटो में झांक ही लेता हूं। तानी ने इतनी छूट दे रखी है। मैंने भी तानी को छूट दे दी है ताक-झांक करने की। एक साथ काम करने के बावजूद हम दोनों एक-दूसरे को काफी स्पेस देते हैं। । मैं कोशिश करता हूं कि तानी के प्रोडक्शन के एरिया में न जाऊं और यह चाहता हूं कि तानी मेरे डायरेक्शन में अड़ंगा न डाले। जरूरत होने पर हम खुद ही एक-दूसरे की राय लेते हैं।
तानी - अनुराग प्रोडक्शन में आए ही इसलिए कि वे अपने मन की फिल्में बना सकें। मेरी जिम्मेदारी बनती है कि मैं इनकी सोच और कल्पना को साकार करने की सुविधाएं जुटा दूं। फिल्ममेकिंग के सारे क्रिएटिव डिसीजन अनुराग के होते हैं। मैंने लंबे समय तक अनुराग को असिस्ट किया है। इनके साथ काम करने में मजा आता है। अनुराग कभी सीधी कहानी नहीं कहते। उन्हें पेंचदार कहानियां कहने में मजा आता है।
अनुराग - मियां-बीवी दोनों काम कर रहे हों तो बच्चों को वक्त नहीं मिलता है। तानी इस मामले में कमाल का संतुलन बिठाती हैं। वह दोनों बेटियों का पूरा ख्याल रखती है। जब उसे लगता है कि ज्यादा काम हो रहा है तो छुट्टी ले लेती है। मुझे लगता है कि हम दोनों में से किसी का बच्चों के पास होना बहुत जरूरी है। मैं तो उस स्थिति में ज्यादा खुश रहूंगा जब मुझे घर पर रहना पड़े और तानी काम करती रहे।
तानी - अनुराग सिर्फ कहने के लिए यह नहीं कह रहे हैं। उनकी पुरानी ख्वाहिश है कि कब ऐसा वक्त आएगा जब मैं घर पर रहूंगा। बच्चों की देखभाल करूंगा और खाना पकाऊंगा।
अनुराग - सही में अगर मुझे छह महीने के लिए परिवार में तानी का रोल मिल जाए तो मैं बहुत खुश रहूंगा। मैं घर में बीवी का भूमिका निभाना चाहता हूं।
तानी - मुझे मालूम है कि अनुराग इस में बुरी तरह से असफल रहेंगे।
अनुराग - तानी को लगता है कि मैं बच्चियों को स्कूल के तैयार नहीं कर पाऊंगा। उनके बाल नहीं बना पाऊंगा।
शादी,फिल्में और रस्में
अनुराग - शादी मेरी जिंदगी का अहम फैसला था। मुझे शादी करनी ही थी।
तानी - मुझ से नहीं होती तो किसी और कर लेते। उसकी तैयारी भी हो गई थी।
अनुराग - नहीं, नहीं ़ ़ ़ शादी तक बात ही नहीं पहुंची थी। मां-बाबा जरूर लड़कियां खोज रहे थे।
तानी - शादी का फैसला अचानक हुआ। बाबा ने एक दिन कहा कि अब बहुत हो गया चलो तुम दोनों शादी कर लो। अनुराग के मां-बाबा मेरी मां से मिलने शांतिनिकेतन चले गए। उन दिनों हमलोग बैंकाक में ‘मर्डर’ की शूटिंग कर रहे थे।
अनुराग - हमारी शादी ‘मर्डर’ की शूटिंग के दौरान ही हुई थी। शादी की मेरी सारी तस्वीरों में आप मुझे फोन पर बात करते देखेंगे। उधर शूटिंग चल रही थी और इधर शादी की रस्में हो रही थी। शादी की रात भी हम शूटिंग के लिए गए। पारंपरिक तरीके से हमें सुहागरात की रस्म के लिए रुकना चाहिए था, लेकिन तानी ने शादी के बाद जींस पहना और चलने के लिए तैयार हो गई। इस बात पर नानी बहुत नाराज हुई कि इस रात को बहू कैसे शूटिंग पर जा सकती है? तानी तो रुक गई, लेकिन मैं चला गया। रात भर शूटिंग चलती रही।
तानी - इनके घर वालों ने मुझे रोक लिया और सजा-धजा कर बिठा दिया। अनुराग तो शूटिंग पर गए और पूरा परिवार मेरे साथ कमरे में बैठा रहा। अनुराग सुबह तीन बजे आए।
अनुराग - आने के बाद भी मजा आया,क्योंकि हम दोनों बाहर निकल गए। हमारा ज्यादातर रोमांस कार में हुआ था इसलिए हम दोनों ने पहली रात कार में ही बिताई। सुबह तक घुमते रहे। सुबह एक ईरानी रेस्टोरेंट में चाय पी। कीमा खाया और कीमा पैक करवा के लेते आया। हमारी शादी 14 दिसंबर को हुई थी।
तानी - फिल्मी दंपतियों की जिंदगी के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। मुझे ही पता नहीं रहता कि अनुराग कब घर पर रहेंगे और कब बाहर जाएंगे? हमारा प्रोफेशन ही ऐसा है। जरूरी नहीं है कि हर रात को 9 बजे हमलोग इक_ा खाना खाएंगे। यह होता नहीं है और मैं अपेक्षा भी नहीं करती हूं।
छोटे शहर का असर और बसर
अनुराग - हम दोनों के खून में अपना-अपना छोटा शहर है। शहर के रोजमर्रा जिंदगी से हमारा अंतस्य प्रभावित नहीं हुआ है। घर में हमने मैट्रो लाइफ को आने नहीं दिया है। हमलोग कभी ज्यादा पैसे कमाते हैं तो कभी कम कमाते हैं। मैं तानी से यही कहता हूं कि हमें हमेशा मिडिल क्लास लाइफ जीना है। अभी तक मैं ट्रेन से सफर करता हूं। मैं चाहता हूं कि बच्चे ट्रेन का सफर एंज्वॉय करें। शहरी इच्छाओं पर हमारा ध्यान ही नहीं है।
तानी - हम दोनों इस मामले में एक जैसे हैं। एक-दूसरे को समझाने की जरूरत ही नहीं पड़ती है। हम फिल्मी टाइप नहीं हैं। पार्टी में नहीं जाते हैं।
अनुराग - फिल्म इंडस्ट्री बहुत ज्यादा प्रभावित करती है। हमारी कोशिश है कि हम बचे रहें।
तानी - संयुक्त परिवार में रहने का यह प्लस पाइंट है। मां साथ में रहती हैं। हमलोग हमेशा साथ रहते हैं। कुछ भी करने के पहले सभी के बारे में सोचते हैं।
सुधार और प्यार
तानी - अनुराग में सुधार हो जाए तो अनुराग अनुराग नहीं रहेंगे।
अनुराग - हम दोनों में एक कमी समान है। हम दोनों को गुस्सा बहुत जल्दी आता है। हम टीन की तरह गर्म हो जाते हैं।
तानी - अनुराग अपनी बात कह रहे हैं।
अनुराग - मैं अपने गुस्से से डरता हूं। मुझे डर है कि किसी दिन यह गुस्सा फ्लैश न  हो जाए।
अनुराग - हम दोनों को खाना बहुत पसंद है। हम लोगों ने कभी डेटिंग वगैरह नहीं की। ज्यादातर खाना ही खाते रहे।
तानी - अनुराग ने कभी एक गुलाब तक नहीं भेजा।
अनुराग - अभी तो कोई उपहार लेकर आऊं तो तानी शक की नजर से देखती है। पूछती है कि क्या बात है? अब तो मैं कुछ ला भी नहीं सकता।
तानी - मुझे यह सब अच्छा भी नहीं लगता। गिफ्ट ़ ़ ़ कैंडिल लाइट डिनर इन चीजों का कोई तुक नहीं है।
अनुराग - हम दोनों अभी तक पागल हैं। प्यार में अभी तक बच्चे हैं। चाहते हैं कि यह बचपना और पागलपन बना रहे। अभी तक मुर्खतापूर्ण हरकतें करते हैं।
तानी - हर मामले में अंतिम फैसला अनुराग का ही होता है। फिर भी मैं आखिरी दम तक राय देती रहती हूं। अगर मैं राजी नहीं हूं तो टोकती रहती हूं। अब तो मेरी सोच और विश्वास भी अनुराग जैसे हो गए हैं। बहुत ज्यादा मतभेद या लड़ाई नहीं होती है।
अनुराग - मैं थोड़ा जिद्दी हूं। मैं अपनी बात मनवा लेता हूं। मैं अड़ जाता हूं।
तानी - नहीं। अनुराग किसी बात पर अड़ते नहीं हैं। वह मुझे समझा लेते हैं। परिवार में थोड़ा एडजस्टमेंट तो करना पड़ता है। परस्पर सहमति होने के बाद जीवन में ज्यादा मजा आता है। अभी तक तो अनुराग के निर्णय सही रहे हैं।
शादी से पहले
तानी - सबसे पहले लडक़े को अच्छी तरह समझना चाहिए। उसके नजरिए को समझना होगा। अपने नजरिए से सब कुछ नहीं आंका जा सकता है। समझने की कोशिश करनी होगी कि वह कैसा है? यह कोशिश होनी चाहिए कि साथ में कदम बढ़े । अगर ऐसा न हुआ तो हर अगले कदम पर दूरी बढ़ती जाएगी। शादी जरूर करनी चाहिए। यह जरूरी है।
अनुराग - पहले तानी ऐसा नहीं सोचती थी। मैं भी ऐसा नहीं सोचता था। हमें लगता था कि शादी कर के क्या होगा? साथ रहने पर एक वक्त आता है जब लगता है कि शादी कर लेना चाहिए। हमें जब यह समझ में आया उसके तीन-चार महीने के अंदर हमने शादी कर ली। मुझे लगता है कि समय से पहले शादी नहीं करनी चाहिए। अभी लोगों ने इतना सिंपल कर दिया है कि अगर वर्कआउट नहीं हुआ तो तलाक ले लेंगे। मुझे यही लगता है कि शादी के पहले काफी सोच-समझ कर फैसला लेना चाहिए। अगर आप अपनी जगह पार्टनर को रख कर नहीं सोच सकते तो इसका मतलब है कि आप साथ नहीं हैं। यह समझना जरूरी है। तानी ने सही कहा। जीरो इगो के बाद शादी करनी चाहिए।





Comments

Rahul Singh said…
मजेदार.
Amit Gupta said…
Badhiya hain ..Thank you Ajay sir !
mridula pradhan said…
bahot swabhavik lekh......
India Darpan said…
बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

जयपुर न्यूज
पर भी पधारेँ।
प्रभावशाली ,
जारी रहें।

शुभकामना !!!

आर्यावर्त
आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।
sanjeev5 said…
आज कल आप अनर्गल और लंबे लेख लिखते हैं. क्या फायेदा है. लोग आपकी सटीक लेखनी के मुरीद हैं और एक साधारण निर्देशक को इतना फुटेज समय की बरबादी नहीं तो और क्या है. आपकी लेखनी का में कायल हूँ पर आपकी सोच प्रक्रिया के बारे में चिंतित भी. की आप कहाँ जा रहे हैं???

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