बदल गया है सब कुछ-डैनी डेंजोग्पा


-अजय ब्रह्मात्मज

    अक्षय कुमार की फिल्म ‘बॉस’ से फिल्मों में सक्रिय हो रहे डैनी डेंजोग्पा ने कुछ और फिल्में साइन कर ली हैं। अनोखे किस्म के अभिनेता डैनी कभी भी भीड़ का हिस्सा नहीं रहे। उन्होंने हमेशा अलग और प्रभावशाली काम किया। आखिरी फिल्म ‘रोबोट’ के बाद उन्होंने संन्यास सा ले लिया था, लेकिन अक्षय कुमार का आग्रह उन्हें फिर से स्टूडियो में खींच ले आया। यहां उन्होंने कुछ बातें शेयर की हैं।
    मैं सलमान खान की फिल्म ‘मेंटल’ भी कर रहा हूं। 22 साल पहले उनके साथ मैंने ‘सनम बेवफा’ फिल्म की थी। उन दिनों सलमान नया-नया था। बच्चा था एकदम। मुझे याद है वह स्टूडियो में भी एक्सरसाइज करता रहता था। उस फिल्म की हीरोइन चांदनी थी। ‘1942 ए लव स्टोरी’ में उसने मेरी बेटी का रोल किया था। मालूम नहीं इन दिनों कहां है। हिंदी फिल्मों में नहीं चल पाई। इतने सालों के बाद सलमान के साथ फिर से आ रहा हूं। मैंने उससे कहा, पहले मैं तेरा बाप था। अब मैं तेरा दुश्मन हो गया हूं। उसका एक शेडयूल पूरा कर लिया है मैंने। सलमान बिल्कुल नहीं बदला है। फर्क यह आया है कि वह अभी बहुत कंफिडेंट दिखता है। बॉडी पहले से अच्छी हो गई है।
    रितिक रोशन के साथ ‘बैंग बैंग’ कर रहा हूं। मैंने तो सोचा था कि फटाफट फिल्म पूरी हो जाएगी, लेकिन रितिक की बीमारी और ‘कृष 3’ की वजह से फिल्म खिंच गई है। फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा होता रहता है। उनको जबान दी है तो फिल्म पूरी करूंगा।
    इस महीने अक्षय कुमार के साथ मेरी ‘बॉस’ आ जाएगी। इन लोगों ने मुझे जबरदस्ती बुला लिया और एक अच्छा रोल दे दिया।
    फिर से सेट पर मौज-मस्ती हो रही है। पुरानी यादें ताजा हो रही हैं। शूटिंग चल रही है। मैं तो हमेशा ऐसे ही काम करता रहा हूं। सभी जानते हैं कि मैं गर्मियों और अक्तूबर के महीने में शूटिंग नहीं करता। मैं हमेशा गैप देता रहा हूं। दर्शकों की भूख बनी रहनी चाहिए। इतना काम भी न करें कि खुद से ही तंग होने लगें। फिर तो ध्यान से काम नहीं होगा। मैंने तो बड़े-बड़े निर्देशकों को मना कर दिया है। उनकी भी भूख बनी रहे कि अभी डैनी के साथ काम करना है। कम पिक्चरें करो। मत करो। फिर भूख बढ़ती है। उसके बाद जोश आता है। फिर लगता है कि अब कुछ करो। फिर मजा आता है और उसका परिणाम भी अच्छा आता है। मैं खुद भी भूखा रहता हूं। लालची तो मैं कभी नहीं रहा। पैसे कमाने के लिए अंधाधुंध काम नहीं करता। करने के लिए तो सारे ऑफर कर सकता हूं। पैसे तो आएंगे ही। लेकिन मेरे प्रशंसकों को मालूम है कि मैं गलत पिक्चर नहीं कर सकता। अच्छा होगा तभी करूंगा। यही वजह है कि मेरी फिल्में देखने लोग आते हैं। पैसे कमाने के लिए उटपटांग फिल्में शुरू कर दूं तो अपने प्रशंसकों को खो दूंगा। यह मेरी जिम्मेदारी है। दूसरे कलाकारों को भी अपने प्रशंसकों से मिली जिम्मेदारी निभानी चाहिए। कलाकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने प्रशंसक की उम्मीद पर खरा उतरे। मेरे सामने कई कलाकार आए और चले गए।
    अभी फिल्म इंडस्ट्री में सब कुछ संगठित हो गया है। एक व्यवस्था विकसित हुई है। पैसे ज्यादा आने से बजट बढ़ गया है। पहले तो हमलोग खुले में ही बैठते और काम करते थे। वैनिटी वैन नौवें दशक में आया। एक्टर की सुविधाएं बढ़ गई हैं। कैमरे के लेंस विकसित और आधुनिक हो गए हैं। तरह-तरह के क्रेन आ गए हैं। एक्शन सुरक्षित हो गया है। तार या केबल बांधने से खतरा कम हो जाता है। हमलोग तो रिस्क लेते थे। ऊंचाई से कूद जाते थे। पांव टूट जाता था। हॉस्पिटल में पड़े रहते थे।
    मीडिया भी बदल गया है। टीवी इंटरव्यू लेने के लिए कोई भी चला आता है। उनके पास पर्याप्त लाइट तक नहीं है। सामने एक लाइट जला देते हैं। सबकुछ डिजीटल हो गया है तो किसी भी लाइट में एक्सपोज हो जाते हैं। इसकी वजह से कोई मेहनत नहीं कर रहा है। सही लाइटिंग के बगैर अच्छा रिजल्ट नहीं मिल सकता। हम लोगों के समय इंटरव्यू लेते समय भी कम से कम तीन लाइट रहते थे। अभी तो फ्लड लाइट जला देते हैं। ऐसा लगता है कि सूरज को देखते हुए बातें कर रहे हों। चेहरे के भाव रजिस्टर ही नहीं होता। सब कुछ फ्लैट हो जाता है। प्लीज ऐसा न समझें कि कोई बूढ़ा बकबक कर रहा है। मैं ज्ञान दे रहा हूं। ले लो। प्रिंट के नए पत्रकारों को कुछ भी नहीं मालूम।
    ‘बॉस’ में मैं बिग बॉस का रोल कर रहा हूं। फिल्म में अक्षय कुमार के रियल पिता मिथुन चक्रवर्ती हैं। वे गांधीवादी किस्म के सत्यवादी व्यक्ति हैं। स्कूल टीचर हैं। कोई गलत काम करे तो उनसे देखा नहीं जाता। बाप-बेटे के बीच कुछ गलतफहमी होती है। वे अक्षय को घर से निकाल देते हैं। मैं उसे गोद ले लेता हूं और अपने बेटे की तरह पालता हूं। मैं हूं गलत आदमी तो सारी गलत चीजें ही तो सिखाऊंगा। मैं फिल्म में कांट्रेक्ट किलर  हूं। अक्षय दो विरोधी किस्म के पिताओं के बीच में फंसा हुआ है। एक अच्छी बात है कि वह अपने वास्तविक पिता का कभी अनादर नहीं करता। फिल्म में मेरे जरिए ही यह उजागर होता है कि मिथुन ने अक्षय को घर से क्यों निकाला?


Comments

डैनीजी के अभिनय ने सदा ही प्रभावित किया है।
deepakkibaten said…
डैनी के फैन तो हम भी हैं। बस एक चीज से सहमत नहीं हूं कि ​प्रिंट के नए पत्रकारों को कुछ नहीं पता। सही आदमी से नहीं मिले होंगे।

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