दरअसाल : साउथ के स्टार करते हैं प्रयोग


-अजय ब्रह्मात्मज

साउथ के सुपर स्टार रजनीकांत पिछले दिनों मुंबई आए। अपनी नई फिल्म कोचडयान के हिंदी संस्करण के साथ वे यहां आए थे। उनकी बेटी सौंदर्या आर अश्विन ने इस महात्वाकांक्षी फिल्म का निर्देशन किया है। इस फिल्म में परफारमेंस कैप्चर टेकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस टेकनीक से बनी यह भारत की पहली फिल्म है। मूल रूप से तमिल में बनी यह फिल्म हिंदी में भी रिलीज की जाएगी। इसी वजह से रजनीकांत अपनी बेटी सौंदर्या और पत्नी लता के साथ मुंबई आए थे। इन दिनों इस इवेंट को फस्र्ट लुक का उद्घाटन कहा जाता है। रजनीकांत के इस इवेंट में अमिताभ बच्चन,सुभाष घई,शेखर कपूर,आर बाल्कि और रमेश सिप्पी जैसे निर्देशक शामिल हुए। सभी ने सौंदर्या की पहल की तारीफ की। स्वयं रजनीकांत ने कहा कि सभी से अपनी बेटी की तारफ सुन कर वे बहुत खुश हैं।
कोचडयान अपने किस्म की पहली फिल्म है। इस फिल्म के प्रयोग के लिए रजनीकांत का तैयार होना ही सराहनीय है। वे तकनीकी प्रयोग के लिए तैयार हुए। गौर करें तो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार और स्टार मुख्य रूप से लकीर के फकीर बने रहते हैं। प्रयोग और तकनीक के मामले में वे संकोच करते हैं। जोखिम उठाने से डरते हैं। इनके विपरीत दक्षिण में खास कर तमिल के स्टार नए प्रयोगों से नहीं हिचकते। कमल हासन हो या रजनीकांत ... दोनों ही हमेशा नए प्रयोगों के लिए तैयार रहते हैं। माना जाता है कि हिंदी फिल्मों के स्टार का प्रभाव अन्य भारतीय भाषाओं की तुलना में अधिक और अखिल भारतीय है। फिर तो हिंदी फिल्मों के स्टार बड़े जोखिम उठा सकते हैं। अफसोस की बात है कि एक आमिर खान के अलावा और कोई स्टार प्रयोगों की हिम्मत नहीं करता। शाहरुख खान ने किया भी तो रा ़वन क्रिएट कर सके। रा ़वन वीएफएक्स के लिहाज से खास और उल्लेखनीय फिल्म है,लेकिन कंटेंट और मनोरंजन में वह दर्शकों को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर सकी।
तमाम लोकप्रियता के बावजूद हिंदी फिल्मों के स्टार की फालोइंग दक्षिण के स्टार जैसी नहीं है। मुंबई के किसी भी स्टार का फैन क्लब नहीं है। वे नियमित रूप से अपने प्रशंसकों से भी नहीं मिलते। अमिताभ बच्चन अगर मुंबई में हों तो अवश्य प्रशंसकों को दर्शन देते हैं। शाहरुख और सलमान खान प्रशंसकों की चिंता नहीं करते। प्रशंसकों के प्रति भी एक अनुशासन चाहिए। प्रशंसकों का जिक्र का खास उद्देश्य है। ये प्रशंसक ही हैं जो दक्षिण के स्टार को प्रयोग और जोखिम की ताकत देते हैं। आज रजनीकांत को मालूम है कि उनकी फिल्म देखने उनके प्रशंसक अवश्य आएंगे। प्रशंसकों की ऐसी वफादारी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में नहीं मिलती। यहां सलमान खान की जय हो दर्शक नापसंद कर देते हैं। शाहरुख खान को फिर से लोकप्रिय होने के लिए चेन्नई एक्सप्रेस का इंतजार करना पड़ता है। हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता और अभिनेत्री व्यवस्थित तरीके से दर्शकों और प्रशंसकों की वफादारी हासिल करें तो भविष्य में प्रयोग की संभावना बनती है।
फिलहाल देखना है कि रजनीकांत की कोचडयान को तमिल और हिंदी दर्शकों का कैसा सपोर्ट मिलता है? परफरमेंच कैप्चर टेकनीक की यह फिल्म कामयाब होती है तो दूसरे निर्माता-निर्देशक भी हिम्मत करेंगे। कोचडयान के हिंदी संस्करण के लिए कमलेश पांडे का सहयोग लिया गया है। गीतों के लिए इरशाद कामिल को निमंत्रित किया गया। ट्रेलर और फस्र्ट लुक से जिज्ञासा तो बढ़ी है। कोचडयान में रजनीकांत ट्रिपल रोल में हैं। हिंदी दर्शकों के बीच रजनीकांत तमिल की तरह लोकप्रिय नहीं है,लेकिन कमल हासन की तरह वे भी अपनी फिल्म हिंदी में जरूर ले आते हैं। हिंदी फिल्मों के दर्शक इसी बहाने उनकी फिल्में देखते हैं और नए चाक्षुष अनुभव का आनंद उठाते हैं।

Comments

Unknown said…
दरअसल सवाल ब्राण्ड वैल्यू का है.........

Popular posts from this blog

संस्‍मरण : विरेन्‍द्र वर्मा,कुर्सियां और स्‍टार

फिल्‍म समीक्षा : एंग्री इंडियन गॉडेसेस

Gr8 Marketing turns Worst Movies into HITs-goutam mishra