सिनेमालोक : कार्तिक आर्यन

सिनेमालोक
कार्तिक आर्यन
-अजय ब्रह्मात्मज
इस महीने के हर मंगलवार को 2018 के ऐसे अचीवर को यह कॉलम समर्पित होगा,जो हिंदी फिल्मों में बहार से आए.जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर पहचान हासिल की.2018 में आई उनकी फिल्मों ने उन्हें खास मुकाम दिया.
दस महीने पहले 23 फ़रवरी को ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ रिलीज हुई थी. लव रंजन की इसी फिल्म के शीर्षक से ही प्रॉब्लम थी. कुछ को यह टंग ट्विस्टर लग रहा था तो अधिकांश का यही कहना था कि यह भी कोई नाम हुआ? फिल्म रिलीज हुई और सभी को पसंद आई. इस तरह के विषय की फिल्मों पर रीझ रहे दर्शक टूट पड़े तो वहीँ खीझ रहे समीक्षक इसे दरकिनार नहीं कर सके.समीक्षकों ने फिल्म के विषय की स्वाभाविक आलोचना की, लेकिन उसके मनोरंजक प्रभाव को स्वीकार किया.नतीजा यह हुआ कि खरामा-खरामा यह फिल्म 100 करोड़ के क्लब में पहुंची. फिल्म के कलाकारों में सोनू यानि कार्तिक आर्यन को शुद्ध लाभ हुआ. छह सालों से अभिनय की दुनिया में ठोस ज़मीन तलाश रहे कार्तिक आर्यन को देखते ही देखते दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री ने कंधे पर बिठा लिया. उन्हें फ़िल्में मिलीं,एनडोर्समेंट मिले और कार्तिक ग्लैमर वर्ल्ड के इवेंट में चमकने लगे.
22 नवम्बर 1990 को ग्वालियर के डॉक्टर दंपति के परिवार में जन्मे और पीला-बढे कार्तिक मुंबई तो आये थे इंजीनियरिंग की पढाई करने,लेकिन मन के कोने में सपना फिल्मों में एक्टिंग का था.पढाई के दौरान सपनों को पंख लगे और कार्तिक ने अभिनय के आकाश की तलाश जारी रखी. नए कलाकार फिल्म इंडस्ट्री के ताऊ-तरीकों से नावाकिफ होते हैं. सही हिम्मत और पूरा जज्बा न हो तो सपनों को चकनाचूर करने के रोड़े रास्तों में पड़े मिलते हैं.कार्तिक ने खुद ही राह बनायीं.दिक्कत का एहसास हुआ तो तैयारी की और प्रयास करते रहे. आख़िरकार 2011 में उन्हें लव रंजन की ‘प्यार का पंचनामा’ मिली.इस फिल्म में रजत का किरदार दर्शकों के ध्यान में आया.वह उन्हें याद रहा.पहली फिल्म के नए एक्टर के लिए इतना बहुत होता है.इस फिल्म में उनके लम्बे संवाद और उसकी अदायगी ने सभी को प्रभावित किया. कार्तिक के साथ ऐसा चल रहा है.उनकी फ़िल्में अपने विषय की वजह से आलोचित होती हैं,लेकिन उनका किरदार प्रशंसित होता है.कार्तिक की नयी फ़िल्में इस विरोधाभास को कम करें तो उनकी लोकप्रियता और स्वीकृति तेज़ी से बढ़ेगी.
पहली फिल्म की सफलता और चर्चा के बावजूद दूसरी फिल्म ‘आकाशवाणी’ दर्शकों ने पसंद नहीं की. अगले साल ई सुभाष घई की ‘कांची’ कब रिलीज होकर चली गयी? किसी को पता ही नहीं चला. इं दोनों फिल्मों की असफलता से कार्तिक के करियर में विराम आया.निराशा नज़दीक पहुंची.इस छोटे अंतराल में बेचैन होने के बावजूद कार्तिक ने बेसब्री में गलत फ़िल्में नहीं चुनीं.वक़्त गुजरता रहा और कार्तिक सही फिल्म के इंतजार में रहे.फिर से लव रंज आये और उन्होंने ‘प्यार का पंचनामा 2’ में कार्तिक आर्यन को अंशुल का किरदार दिया.इस फिल्म में फिर से उनके एकल संवाद की तारीफ हुई.बतौर एक्टर भी उनमें आत्मविश्वास और परफॉरमेंस की रवानी दिखी.बीच में आई ‘गेस्ट इन लंदन’ हलकी रही,लेकिन ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ ने परिदृश्य ही बदल दिया.
पिछले 10 महीनों में कार्तिक लगातार चौंका रहे हैं.वे सुर्ख़ियों में बने हुए हैं.उनकी फिल्मों की घोशनाएँ हो रही है.सही या गलत यह खबर भी फैल रही कि उन्होंने कौन सी फिल्म छोड़ दी.करीना कपूर के साथ रैंप वाक तो चर्चा में आये. उस इवेंट की तस्वीरों में कार्तिक का कॉन्फिडेंस देखते ही बनता है.यूँ लगता है की कार्तिक लगातार खुद को मंज रहे हैं और अभी से बड़ी चमक और खनक के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं.कार्तिक की एक अघोषित खूबी है.ग्वालियर की पृष्ठभूमि और परिवार से उन्हें हिंदी मिली है.हिंदी के उच्चारण और अदायगी में अपने समकालीनों से बहुत आगे हैं.उनके एकल संवाद प्रमाण हैं कि हिंदी पर उनकी जबरदस्त पकड़ है.
कार्तिक की ‘लुका छुपी’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है. इसमें वह कार्तिक आर्यन के साथ हैं.’किंक पार्टी’ में वह जैक्लिन फ़र्नांडिस के साथ नज़र आयेंगे. इम्तियाज़ अली की ‘लव आजकल 2’ में सारा अली खान के साथ उनकी जोड़ी बनेगी. 2018 ने कार्तिक के सपनों को ऊंची उड़ान दी है.


Comments

Ayush said…
* Kirti Shannon ke saath hai

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