इंटेलीजेंट एक्‍टर हैं अजय देवगन –राज कुमार गुप्‍ता



इंटेलीजेंट एक्‍टर हैं अजय देवगन –राज कुमार गुप्‍ता
-अजय ब्रह्मात्‍मज
राज कुमार गुप्‍ता की ‘रेड’ दर्शकों को पसंद आई है। यह अभी तक सिनेमाघरों में टिकी है। ‘आमिर’,’नो वन किल्‍ड जेसिका’ और ‘घनचक्‍क्‍र’ जैसी फिल्‍मों से अपनी खास पहचान बना चुके राज कुमार गुप्‍ता से यह बातचीत अजय देवगन के बारे में है। आज उनका जन्‍मदिन है।
-‘रेड’ के लिए अजय देवगन को ही चुनने के क्‍या कारण रहे?
0  फिल्‍म के निर्माता कुमार मंगत ने अजय देवगन को इस फिल्‍म की कहानी सुना रखी थी। रितेश शाह ने स्क्रिप्‍ट पूरी की तो मैंने उन्‍हें ट्रीटमेंट के साथ स्क्रिप्‍ट सुनाई। उन्‍हें फिल्‍म का कथ्‍य पसंद आया। हम सभी एक ही पेज पर थे। अजय सर का मानना था कि यह कहानी कही जानी चाहिए। अजय देवगन की ईमानदार छवि है। वे मंझे हुए कलाकार हैं। हर डायरेक्‍टर अपनी फिल्‍म के लिए ऐसा एक्‍टर चाहता है।
-क्‍या खूबियां हैं उनकी?
0 अजय सर पूरा सहयोग करते हैं। वह कॉलेबरेशन और कम्‍युनिकेशन में विश्‍वास रखते हैं। उनका एक नजरिया है। वह खुद भी डायरेक्‍टर हैं। वे एक्‍टर-डायरेक्‍टर प्रोसेस और सिनेमा को समझते हैं। ऐसे एक्‍टर के साथ काम करने पर बहस और सोच में सहयोग का रवैया मिलता है। परस्‍पर समझ बढ़ती है। वह खूब सुनते हैं। सब कुछ सकारात्‍मक रहा।
-आप दोनों के बीच कैसा क्रिएटिव प्रोसेस रहा?
0 अजय सर कभी हावी हाने की कोशिश नहीं करते। शूटिंग  के समय नए एक्‍टर-डायरेक्‍टर के कांबिनेशन में दोनों तरफ से परख चल रही होती है। हम एक-दूसरे को जज कर रहे होते हैं। शुरू के दो-तीन दिनों के बीच समझदारी विकसित हो जाती है। शूट करते समय अगर कभी उन्‍हें कभी कुछ कम-ज्‍यादा लगता था तो वे सुझाव देते थे। उनका अनुभव बड़ा है।न्‍हें ोते हैं। शुरू के दो-त्‍ी ज्‍यादातर सीनवर्क स्क्रिप्‍ट के अनुसार ही रहे। शूटिंग करते समय तत्‍काल कुछ बदलना पड़ता है। उस समय उनकी ओर से कभी कोई प्रतिरोध नहीं हुआ। एक दृश्‍य में स्‍पर थोड़ा ऊंचा जा रहा थाएउसे बताने पर वे झट से तैयार हो गए। कोई एक्‍टर ही शब्‍दों में लिखे किरदार को रक्‍त और मांस देकर जीवंत बनाता है। अजय देवगन के निभाए किरदारों का देखें। वे विश्‍वसनीय लगते हैं।
- अजय देवगन किस मायने में दूसरे कलाकारों से अलग हैं?
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वे इंटेलीजेंट एक्‍टर और इंसान हैं। दूसरों या साने वाले के पाइंट ऑफ व्‍यू पर गौर करते हैं। अगर उन्‍हें बात सही लगती है तो वे झट से राजी हो जाते हैं।  मुझे अचरज ही हुआ कि वे दूसरे एक्‍टरों की तरह असुरक्ष्रित महसूस नहीं करते। साथ के कलाकारों के सीन में भी उनकी भागीदारी और मदद रहती है। हिंदी फिल्‍मों के बढ़े स्‍टार चाहते हैा कि हर सीन उनके 'इन एंड अराउंड' हो। अजय देवगन ऐसा नहीं सोचते। वे फिल्‍म के भले के लिए किसी की भी मदद करते हें। उससे फिल्‍म उम्‍दा बनती है और साथ के कलाकारों का जोश बना रहता है। दादी मां बनी पुष्‍पा जोशी के साथ उनका धैर्य और सहयोग देखने लायक था। एक सुरक्षित एक्‍टर ही इतना उदार हो सकता है। वह नैचुरल एक्‍टर हैं। बहुत ज्‍यादा तैयारी नहीं करते। उनकी मानसिक प्रक्रिया तो चलती ही होगी। सेट पर उन्‍हें परेशान नहीं देखा। वे काफी इकॉनोमिकल एक्‍टर हैं। किसी भी एक्‍सप्रेशन को बेकार नहीं जाने दे। उनके एक्‍सप्रेशन बहुत नपे-तुले होते हैं। यही कारण है कि ज्‍यादातर सिंगल टेक में ही उनका शॉट ओके हो जाता है। वे टेक्‍नीकली सउंड एक्‍टर हैं। इसका फायदा यह होता है कि कभी टेक्‍नीकल कारणों से दोबारा शॉट लेने की जरूरत नहीं पड़ती। मुझ तो उनसे काफी मदद मिली।

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रेड' के किसी सीन के बारे में बताएं....
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इंटरवल के पहले के एक सीन में स्क्रिप्‍ट में सौरभ श्‍ुक्‍ला और उनके बीच ढेर संवाद थे। शूटिंग करते समय लगा कि फिल्‍म जैसे बढ़ रही है,उसमें  गति और प्रभाव बनाए रखने के लिए संवाद कम किए जा सकते हैं। अजय सर तुरंत मान गए। वह सीन फिल्‍म में काफी असरदार बन गया है। मुझे तो लगता है कि अजय देवगन की वजह से ही 'रेड' के नायक अमेय पटनायक की ईमानदारी और निष्‍ठा प्रभावकरी बनी।

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