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Showing posts from April, 2019

सिनेमालोक : दमकते मनोज बाजपेयी

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सिनेमालोक दमकते मनोज बाजपेयी -अजय ब्रह्मात्मज हिंदी फिल्मों में काम करते हुए मनोज बाजपेयी को 25 साल हो गए.इन 25 सालों में मनोज बाजपेयी ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से खास मुकाम हासिल किया है. बिहार के बेलवा गाँव से दिल्ली होते हुए मुंबई पहुंचे मनोज बाजपेयी को लम्बे संघर्ष और अपमान से गुजरना पड़ा है. 1994 में उनकी पहली फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ आ गयी थी. इस फिल्म में मान सिंह के किरदार से उन्होंने यह तो जाहिर कर दिया था कि वे रंगमंच की तरह परदे पर भी प्रभावशाली मौजूदगी रखते हैं. नाटक और रंगमंच में सक्रिय अधिकांश अभिनेता की इच्छा बड़े परदे पर आने की रहती है,लेकिन बहुत कम को ही कैमरा,निर्देशक और दर्शक स्वीकार कर पाते हैं. मनोज बाजपेयी को भी वक़्त लगा. ‘बैंडिट क्वीन’ की सराहना और मुंबई के निमंत्रण से उत्साहित होकर वे मुंबई आ गए थे. मुंबई में एक चर्चित और बड़े निर्देशक ने उन्हें मुंबई में मिलने का न्योता दिया था. स्वाभाविक रूप से मनोज को लगा था कि मुंबई पहुँचते ही फ़िल्में मिलने लगेंगी. कुछ कोशिशों के बाद उक्त निर्देशक से मुलाक़ात हुई तो उन्होंने दुत्कार दिया. उनकी प्रतिक्रिया का भाव था कि मिलने के लिए कह…

सिनेमालोक : अब समीक्षकों की संस्था देगी पुरस्कार

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सिनेमालोक  अब समीक्षकोंकी संस्था देगी पुरस्कार 
-अजय ब्रह्मात्मज
देश में अनेक फिल्म पुरस्कार हैं. हर मीडिया हाउस के अपने पुरस्कार हैं.इनके अलावा स्थानीय और राष्ट्रीय स्टार पर कुछ समोह्ह या संगठन भी फिल्म पुरस्कार बाँटते हैं. इनमे सबसे अधिक सम्माननीय भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन दिया जाने वाल राष्ट्रीय पुरस्कार है.यह पुरस्कार देश भर की फ़िल्मी गतिविधियों में से श्रेष्ठ कृति और व्यक्ति को दिया जाता है. कतिपय विवादों के बावजूद इस पुरस्कार की खास प्रतिष्ठा है. मुंबई में मैंने देखा है कि कलाकार और फ़िल्मकार अपने दफ्तर और बैठकी में इसे फ्रेम करवा कर रखते हैं. निश्चित ही यह उनके लिए गर्व और दिखावे की बात होती है. ज्यादातर फिल्म पुरस्कार टीवी इवेंट बन चुके हैं. इन पुरस्कारों के स्पोंसर और आयोजकों की रुचि श्रेष्ठ काम से अधिक लोकप्रिय नाम में होती है, इसके अलावा फिल्म के कारोबार को भी मद्देनज़र रखा जाता है. नतीजा यह होता है कि श्रेष्ठ काम और नाम पुरस्कृत नहीं हो पाते. इन पुरस्कारों की मर्यादा इतनी गिर चुकी है कि कुछ शीर्षस्थ फ़िल्मकार और कलाकार इसमें भाग ही नहीं लेते. उनके बहिष्कार …

सिनेमालोक : हिंदी फिल्मों की पहली तिमाही

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सिनेमालोक : हिंदी फिल्मों की पहली तिमाही -अजय ब्रह्मात्मज 2019 के तीन महीने बीत गए. इन तीन महीनों में 30 से अधिक फ़िल्में रिलीज़ हुई हैं. कामयाबी और कलेक्शन के लिहाज से बात करें तो नतीजे बुरे नहीं दिख रहे हैं. कुछ फिल्मों की कामयाबी और कलेक्शन ने चौंकाया है. जनवरी से मार्च के बीच रिलीज़ फिल्मों में अभी तक किसी फिल्म ने उम्मीदों पर पानी नहीं फेरा है. ऐसी कोई फिल्म आई भी नहीं है,जिसका प्रचार बहुत ज्यादा हो. लोकप्रियता के ऊपरी पायदान पर बैठे सितारों की फ़िल्में नहीं आई हैं,इसलिए कोई ज़ोरदार झटका नहीं लगा है. इस लिहाज से अगली तिमाही में सलमान खान और रितिक रोशन की फ़िल्में आएंगी तो फिर सफलता और निराशा पर नए सिरे से बातें होंगी. जनवरी के पहले हफ्ते में हिंदी फ़िल्में नहीं रिलीज़ करने का अंधविश्वास चला आ रहा है. माना जाता है कि पहले हफ्ते में रिलीज़ हुई फ़िल्में बिलकुल नहीं चल पातीं. इस साल भी यही हुआ,लेकिन दूसरे हफ्ते में 11 जनवरी को आई ‘उडी : द सर्जिकल स्ट्राइक’ ने तो कामयाबी के नए रिकॉर्ड बना कर विकी कौशल को स्टारडम की अगली कतार में ला दिया. इस फिल्म ने भारत में 244 करोड़ का कारोबार कर लिया है. भारत-…

सिनेमालोक : 50 के हुए अजय देवगन

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सिनेमालोक 50 के हुए अजय देवगन -अजय ब्रह्मात्मज वीरू देवगन के बेटे अजय देवगन आज 50 के हो गए.वे काजोल के पति हैं.उनकी पहली फिल्म ‘फूल और कांटे’ है.इसे कुक्कू कोहली ने निर्देशित किया था. इसी साल यश चोप्रा निर्देशित अनिल कपूर और श्रीदेवी की फिल्म ‘लम्हे’ भी रिलीज हुई थी. तब किसी को अनुमान नहीं था कि सामान्य चेहरे के अजय देवगन की फिल्म 1991 की बड़ी हिट साबित होगी. हिंदी सिनेमा का यह वैसा दौर था,जब मेलोड्रामा और गिमिक का खूब सहारा लिया जाता था. एक गिमिक हीरो की एंट्री हुआ करती थी.’फूल और कांटे’ में अजय देवगन दो मोटरसाइकिल पर खड़े होकर आते हैं. इस सीन पर तालियाँ बजी थीं और अजय देवगन एक्शन स्टार मान लिए गए थे. एक्शन डायरेक्टर के बेटे को एक्शन स्टार बताने के साथ हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने अजय देवगन के लिए एक अलग केटेगरी तय कर दी थी. हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में लॉबी और ग्रुप के समीकरण बनते-बिगड़ते रहते हैं. बहार से देखने पर लग सकता है कि अजय देवगन तो इनसाइडर हैं. उनके पिता स्थापित एक्शन डायरेक्टर रहे हैं तो अजय की लौन्चिंग में कोई दिक्कत नहीं हुई होगी. सच्छायी कुछ और है. इनसाइडर की अपनी व्यवस्था और अनु…