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Tuesday, December 31, 2019

सिनेमालोक : विदा 2019


सिनेमालोक
विदा 2019
अजय ब्रह्मात्मज
2019 का आखिरी दिन है आज. पिछले हफ्ते रिलीज हुई राज मेहता की फिल्म ‘गुड न्यूज़’ हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को कामयाबी का शुभ समाचार दे गई. अक्षय कुमार. करीना कपूर खान. दिलजीत दोसांझ और कियारा आडवाणी की यह फिल्म पहले वीकेंड में 60 करोड़ से अधिक का कलेक्शन कर चुकी है. जाहिर सी बात है कि अक्षय कुमार की फिल्म 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी.’केसरी’, ‘मिशन मंगल’. ‘हाउसफुल 4’ और ‘गुड न्यूज़’ की भरपूर कमाई से अक्षय कुमार सफल सितारों की अगली कतार में सबसे आगे खड़े हैं. उन्हें रितिक रोशन की वाजिब मुकाबला दे रहे हैं. ‘सुपर 30’ और ‘वॉर’ की कामयाबी ने उन्हें अगली कतार में ला दिया है. कुछ और सितारे भी जगमगाते रहे कुछ की चमक बढ़ी और कुछ की धीमी पड़ी. बकामयाबी के दूसरे छोर पर आयुष्मान खुराना भी तीन फिल्मों की सफलता के साथ मुस्कुरा रहे हैं. इन दोनों छोरों के बीच कार्तिक आर्यन हैं, जो धीमे से अपनी धमक बढ़ाने में आगे रहे. कामयाब रणवीर सिंह भी रहे.
अभिनेत्रियों की बात करें तो तापसी पन्नू और भूमि पेडणेकर के लिए 2019 विविधता लेकर आया. दोनों अभिनेत्रियों ने बढ़त हासिल की और जाहिर किया कि वे हर तरह की भूमिकाओं में सक्षम हैं. दोनों कंगना रनोट के साथ अगली कतार में हैं. कंगना रनोट ‘मणिकर्णिका’ और ‘जजमेंटल है क्या’ से साबित करती हैं कि वह इस दौर की समर्थ अभिनेत्री हैं. पिछले साल की चर्चित और कामयाब अभिनेत्रियां इस साल कम रिलीज और गौण भूमिकाओं की वजह से अगली कतार से खिसक गयीं. कियारा आडवाणी की फिल्में कामयाब रहीं, लेकिन फिल्मों की सफलता का सेहरा अभिनेताओं को मिला. कियारा आडवाणी का हाल कहीं सोनाक्षी सिन्हा सरीखा ना हो जाए जो तमाम बेहतर कमाई की फिल्मों की नायिका तो रहीं लेकिन उनके हिस्से कामयाबी नहीं आई.
अभिनेता-अभिनेत्रियों के उल्लेख के बाद 10 सफल फिल्मों की सूची कलेक्शन के हिसाब से बनाएं तो रितिक रोशन और टाइगर श्रॉफ की सिद्धार्थ आनंद की ‘वॉर’ सबसे आगे रही है. उससे यशराज फिल्म्स को निश्चित ही बड़ी राहत और ताकत मिली है. दूसरे नंबर की कामयाब फिल्म ‘कबीर सिंह’ है. ‘कबीर सिंह’ की लोकप्रियता बताती है कि हिंदी फिल्मों के दर्शक किस प्रकार के नायक से अभिभूत होते हैं. बाकी सात फिल्मों में ‘उरी द सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘भारत’. ‘मिशन मंगल’, ‘हाउसफुल 4’, गली ब्वॉय’, ‘टोटल धमाल’, ‘छिछोरे’ और ‘सुपर 30’ हैं. इन फिल्मों से आम दर्शकों की पसंद की जानकारी मिलती है. ‘टोटल धमाल’ और ‘हाउसफुल 4’ की जबरदस्त कामयाबी सुधि समीक्षकों को चौकाती है, लेकिन इस सच्चाई से कैसे इनकार किया जा सकता है कि आम दर्शक ऐसी फिल्मों में भी रुचि लेता है. वह सीमित संख्या में ‘आर्टिकल 15’. सेक्शन 375 और ‘सोनी’ जैसी फिल्में भी पसंद करता है ,लेकिन उन्हें सिर-माथे पर नहीं उठाता.
2019 के अपनी पसंद के सार्थक फिल्मों की बात करूं तो उनमें कुछ ऐसी फिल्में होंगी जो दर्शकों तक ढंग से पहुंची नहीं सकीं. उनका हश्र अफसोसनाक है. फिल्मों की वितरण प्रणाली की पेंच में ये फ़िल्में उलझ गयीं. उन्हें बॉक्स ऑफिस पर पर्याप्त समय और ध्यान नहीं मिला, जिसकी वजह से उनकी उड़ान संतोषजनक नहीं दिखती. इस संदर्भ में इवान आयर की ‘सोनी’ और जैगम इमाम की ‘नक्काश’ का विशेष उल्लेख जरूरी होगा. दोनों ही फिल्में कंटेंट और परफॉर्मेंस के लिहाज से आला दर्जे की हैं. समय के साथ दोनों की दर्शकता बढ़ेगी. उनका जिक्र होता रहेगा. ‘आर्टिकल 15 दर्शकों और समीक्षकों की पसंद बनी. ‘गोन केश’, ‘मर्द को दर्द नहीं होता’.’सोनचिरिया’, ‘द स्काई इज पिंक’, ‘हामिद’ और ‘बोम्बरिया’ जैसी फिल्मों ने भी दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान खींचा. ये फिल्म जरूर देखी जानी चाहिए.
और अंत में ‘पानीपत’ का उल्लेख करूंगा. आशुतोष गोवारिकर की ऐतिहासिक फिल्म अर्जुन कपूर की अपकीर्ति की शिकार हुई. इस फिल्म को न तो दर्शक मिले और ना ही समीक्षक, जबकि पूर्वाग्रहों से परे होकर देखें तो आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘राष्ट्रवाद’ की चपेट में आने से बची. फिल्म में इतिहास को सम्यक नजरिए से पेश किया गया. अभी चल रही भगवा लहर के ‘राष्ट्रवाद’ से अनेक फिल्में प्रभावित दिखीं, जिनमें बेवजह ‘देशभक्ति का उद्घोष’ सुनाई पड़ता रहा. कुल मिला कर यह साल मिश्रित संतोष ही दे सका.