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Showing posts from March, 2011

A short history of Spanish cinema

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स्पैनिश सिनेमा से परिचित हो लें ...आधे से एक घंटे में.... Beyond Buñuel, Spanish film-makers struggled to make an international impact – until Franco's death in 1975 liberated an entire generation Spain embraced the new medium of cinema at the turn of the century as fervently as any of their European counterparts; this film of a religious procession in 1902, by the splendidly named Fructuos Gelabert, is typical of the early amateurs. In Segundo de Chomón, however, Spain produced a trickster director to rival France's Georges Méliès. De Chomón worked mostly in France, and even made An Excursion to the Moon, his own version of Méliès's most famous film. The route from Spain to France was well-trodden by the time Buñuel and Dalí made Un Chien Andalou in 1928; otherwise, little of Spain's silent-film output made any impact internationally. The early sound period fared little better, as political convulsions in the run-up to the civil war made a settled industry difficult.

काशी कथा वाया मोहल्ला अस्सी-रामकुमार सिंह

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यह पोस्‍ट रामकुमार सिंह की है।उन्‍होंने बनारस से लौटकर राजस्‍थान पत्रिका में लिख।चवन्‍नी को पसंद आया,इसलिए नकलचेंपी... बनारस के घाटों की गोद में अलसायी सी लेटी गंगा को सुबह सुबह देखिए। सूरज पूर्व से अपनी पहली किरण उसे जगाने को भेजता है और अनमनी सी बहती गंगा हवा की मनुहारों के साथ अंगड़ाई लेती है। नावों के इंजन घरघराते हैं, हर हर महादेव की ध्वनियां गूंजती हैं। लोग डुबकियां लगा रहे हैं। यह मैजिक ऑवर है, रोशनी के लिहाज से। डा.चंद्रप्रकाश द्विवदी निर्देशित फिल्म "मोहल्ला अस्सी" की यूनिट नावों में सवार है। वे इसी जादुई रोशनी के बीच सुबह का शिड्यूल पूरा कर लेना चाहते हैं। काशी की जिंदगी के महžवपूर्ण हिस्से और धर्म की धुरी कहे जाने वाले मोहल्ला अस्सी पर हिंदी के अनूठे कथाकार काशीनाथ सिंह के उपन्यास "काशी का अस्सी" के शब्दों को पिघलाकर चलते हुए चित्रों में तब्दील किया जा रहा है। यह सिनेमा और साहित्य के संगम का अनूठा अवसर है। हम घूमने बनारस गए हैं और देखा कि वहां शूटिंग भी चल रही है तो यह यात्रा अपने आप में नई हो गई। यह बेहद दिलचस्प है कि एक प्रतिबद्ध वामपंथी लेखक काशीनाथ

फिल्‍म समीक्षा : मोनिका

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-अजय ब्रह्मात्‍मज इस फिल्म की कथाभूमि लखनऊ है। मोनिका और चंद्रकांत पंडित हमें भोपाल, पटना, देहरादून और जयपुर में भी मिल सकते हैं। हर प्रदेश में मोनिका और चंद्रकांत पंडित की कहानियां हैं। किसी प्रदेश में मोनिका का नाम मनीष भी हो सकता है। तात्पर्य यह कि लेखक-निर्देशक सुषेन भटनागर ने एक मौजूं विषय पर फिल्म बनाई है। पत्रकार की महत्वाकांक्षा और राजनीतिज्ञों द्वारा उनके इस्तेमाल की कहानियों में अक्सर राजनीतिज्ञों का खलनायक की तरह चित्रित किया जाता है। मोनिका को ही गौर से देखें तो मोनिका की मनोग्रंथि और महत्वाकांक्षा ही उसे राजनीतिक शिकंजे में ले जाती है और इस्तेमाल होने के लिए तैयार करती है। हमें इस कड़वे सच केदूसरे पक्ष को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मध्यवर्गीय परिवार की मोनिका की महत्वाकांक्षाएं परिवार और लखनऊ जैसे शहर से बड़ी हो जाती हैं। उसकी इस कमजोरी को स्वार्थी राजनीतिज्ञ, संपादक और बिजनेस घराने के लोग ताड़ जाते हैं। वे उसकी मेधा का दुरूपयोग करते हैं। मोनिका एक-दो दफा अपनी सामान्य जिंदगी में लौटना भी चाहती है, लेकिन तब तक इतनी देर हो चुकी है कि उसका असहाय पति भी उसकी मदद नहीं कर

A Lustrous Pinnacle of Hollywood Glamour

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from the new york times ELIZABETH TAYLOR, 1932-2011 By MEL GUSSOW Elizabeth Taylor , the actress who dazzled generations of moviegoers with her stunning beauty and whose name was synonymous with Hollywood glamour, died on Wednesday in Los Angeles. She was 79. A spokeswoman at Cedars-Sinai Medical Center said Ms. Taylor died at 1:28 a.m. Pacific time. Her publicist, Sally Morrison, said the cause was complications of congestive heart failure. Ms. Taylor had had a series of medical setbacks over the years and was hospitalized six weeks ago with heart problems. In a world of flickering images, Elizabeth Taylor was a constant star. First appearing on screen at age 10, she grew up there, never passing through an awkward age. It was one quick leap from “National Velvet” to “A Place in the Sun” and from there to “Cleopatra,” as she was indelibly transformed from a vulnerable child actress into a voluptuous film queen. In a career of some 70 years and more than 50 films, she won two Academy