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धुन में अपनी चली - पत्रलेखा

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-अजय ब्रह्मात्‍मज पत्रलेखा की पहली फिल्‍म सिटीलाइट्स थी। हंसल मेहता निर्देशित इस फिल्‍म में राजस्‍थान की ग्रामीण महिला की भूमिका निभाई थी। अभी उनकी दूसरी फिल्‍म लव गेम्‍स आ रही है। इसका निर्देशन विक्रम भट्ट ने किया है। इस फिल्‍म में पहली फिल्‍म के विपरीत पत्रलेखा ने एक शहरी लड़की की भूमिका निभाई है। पत्रलेखा हिंदी फिल्‍मों में अपेक्षाकृत नया नाम हैं। अजय ब्रह्मात्‍मज के साथ झंकार के लिए उन्‍होंने अपना फिल्‍मी सफर शेयर किया। साथ ही लव गेम्‍स की भी जानकारी दी। -सिनेमा से आपका कैसे सामना हुआ। हिंदी सिनेमा से ? 0 जी मैं शिलांग से हूं। मेरे बचपन में शिलांग में हिंदी फिल्म इतनी नहीं आती थीं। मैं बंगाली परिवार से हूं। उस समय मेरे आपास के लोग अंग्रेजी फिल्में देखना ज्यादा पसंद करते थे। केवल मेरी मां हिंदी फिल्में देखा करती थी। तब मां वीसीडी लेकर आती थी। मैं मां के साथ बैठ कर हिंदी फिल्में देखा करती थी। -आपकी मां को हिंदी फिल्‍मों का शौक कैसे हुआ ? उनका नाम क्या है? 0 पापरी पॉल नाम है उनका। वह घरेलू महिला हैं। उन्हें हिंदी फिल्में देखने में बड़ा मजा आता था। ठीक-ठीक नहीं बता सकती कि उन्‍हें हिंदी फि…

फिल्‍म समीक्षा : सिटीलाइट्स

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दुख मांजता है  -अजय ब्रह्मात्‍मज  माइग्रेशन (प्रव्रजन) इस देश की बड़ी समस्या है। सम्यक विकास न होने से आजीविका की तलाश में गावों, कस्बों और शहरों से रोजाना लाखों नागरिक अपेक्षाकृत बड़े शहरों का रुख करते हैं। अपने सपनों को लिए वहां की जिंदगी में मर-खप जाते हैं। हिंदी फिल्मों में 'दो बीघा जमीन' से लेकर 'गमन' तक हम ऐसे किरदारों को देखते-सुनते रहे हैं। महानगरों का कड़वा सत्य है कि यहां मंजिलें हमेशा आंखों से ओझल हो जाती हैं। संघर्ष असमाप्त रहता है। हंसल मेहता की 'सिटीलाइट्स' में कर्ज से लदा दीपक राजस्थान के एक कस्बे से पत्नी राखी और बेटी माही के साथ मुंबई आता है। मुंबई से एक दोस्त ने उसे भरोसा दिया है। मुंबई आने पर दोस्त नदारद मिलता है। पहले ही दिन स्थानीय लोग उसे ठगते हैं। विवश और बेसहारा दीपक को हमदर्द भी मिलते हैं। यकीनन महानगर के कोनों-अंतरों में भी दिल धड़कते हैं। दीपक को नौकरी मिल जाती है। एक दोस्त के बहकावे में आकर दीपक साजिश का हिस्सा बनता है, लेकिन क्या यह साजिश उसके सपनों को साकार कर सकेगी? क्या वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित जिंदगी जी पाएगा?…

अंधेरा है महानगरों की चकाचौंध में-हंसल मेहता

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-अजय ब्रह्मात्मज
    हंसल मेहता और राजकुमार राव की जोड़ी की दूसरी फिल्म ‘सिटीलाइट््स’ आ रही है। पिछले साल की ‘शाहिद’ के लिए दोनों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। ‘सिटी लाइट’ का निर्माण महेश भट्ट और फॉक्स स्टार स्टूडियोज ने किया है। ‘सिटीलाइट्स’ में राजकुमार राव राजस्थान के दीपक की भूमिका में हैं, जो आजीविका के लिए मुंबई आता है। मुंबई जैसे महानगर में दीपक के सरवाइवल और संघर्ष की यह कहानी छोटे शहरों से सपनों के साथ बडे शहरों में आ रहे लाखों-करोड़ों युवकों की प्रतीकात्मक कहानी है।
    हंसल मेहता से पहले इस फिल्म के निर्देशन के लिए अजय बहल को चुना गया था। उन्होंने ‘शाहिद’  देख रखी थी। उन्हें लगा कि हंसल ‘सिटीलाइट़्स’ की थीम के साथ न्याय कर सकते हैं। ऐसा लग सकता है कि हंसल मेहता ने ही इस फिल्म के लिए राजकुमार राव को चुना होगा। यहां तथ्य उल्टे हैं। राजकुमार राव पहले से फिल्म में थे। बाद में हंसल मेहता को बतौर निर्देशक बुलाया गया।
    ‘शाहिद’ के लिए मिले पुरस्कार से फर्क तो पड़ा है। हंसल बताते हैं, ‘संयोग है कि हम दोनों को पुरस्कार मिले और अब ‘सिटीलाइट्स’ आ रही है। फिल्म इंडस्ट्री और बाकी लोगों के…

पत्रलेखा

सिटीलाइट्स की नायिका की भूमिका निभा रही पत्रलेखा शिलांग की हैं। सिटीलाइट्स उनकी पहली फिल्‍म है।