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फिल्‍म समीक्षा : तेरी मेरी कहानी

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-अजय ब्रह्मात्‍मज  तीन दौर में फैली कुणाल कोहली की तेरी मेरी कहानी मुख्य रूप से आठ किरदारों की कहानी है। दो-दो प्रेम त्रिकोण और एक सामान्य प्रेम कहानी की इस फिल्म का सार और संदेश यही है कि समय चाहे जितना बदल जाए, प्यार अपने रूप-स्वरूप में एक सा ही रहता है। समय के हिसाब से हर काल में उसकी अभिव्यक्ति और लक्षणों में बदलाव आ जाता है, लेकिन प्रेमी युगलों की सोच,धड़कनें, मुश्किलें, भावनाएं, शंकाएं और उम्मीदें नहीं बदल पातीं। कुणाल कोहली ने तीनों दौर की कहानियों को पेश करने का नया शिल्प चुना है। दोराहे तक लाकर वे तीनों प्रेम कहानियों को छोड़ते हैं और फिर से कहानी को आगे बढ़ाते हुए एक राह चुनते हैं, जो प्रेमी-प्रेमिका का मिलन करवाती है। तीनों दौर में प्रेमी-प्रेमियों के बीच कोई खलनायक नहीं है। उनकी शंकाएं, उलझनें और अपेक्षाएं ही कहानी को आगे बढ़ाती हैं। कहानी के विस्तार में जाने से दर्शकों की जिज्ञासा खत्म होगी। कुणाल कोहली ने तीनों दौर के प्रेमी-प्रेमिका के रूप में प्रियंका चोपड़ा और शाहिद कपूर को चुना है। हर काल के हिसाब से उनकी भाषा, वेशभूषा और परिवेश में फर्क दिखता है। इ…

फिल्‍म समीक्षा : ब्रेक के बाद

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थीम और परफार्मेस में दोहराव-अजय ब्रह्मात्‍मज आलिया और अभय बचपन के दोस्त हैं। साथ-साथ हिंदी सिनेमा देखते हुए बड़े हुए हैं। मिस्टर इंडिया (1987) और कुछ कुछ होता है (1998) उनकी प्रिय फिल्में हैं। यह हिंदी फिल्मों में ही हो सकता है कि ग्यारह साल के अंतराल में आई फिल्में एक साथ बचपन में देखी जाएं और वह भी थिएटर में। यह निर्देशक दानिश असलम की कल्पना है, जिस पर निर्माता कुणाल कोहली ने मोहर लगाई है।इस साल हम दो फिल्में लगभग इसी विषय पर देख चुके हैं। दोनों ही फिल्में बुरी थीं, फिर भी एक चली और दूसरी फ्लॉप रही। पिछले साल इसी विषय पर हम लोगों ने लव आज कल भी देखी थी। इन सभी फिल्मों की हीरोइनें प्रेम और शादी को अपने भविष्य की अड़चन मान बे्रक लेने या अलग होने को फैसला लेती हैं। उनकी निजी पहचान की यह कोशिश अच्छी लगती है, लेकिन वे हमेशा दुविधा में रहती हैं। प्रेमी और परिवार का ऐसा दबाव बना रहता है कि उन्हें अपना फैसला गलत लगने लगता है। आखिरकार वे अपने प्रेमी के पास लौट आती हैं। उन्हें प्रेम जरूरी लगने लगता है और शादी भी करनी पड़ती है। फिर सारे सपने काफुर हो जाते हैं। ब्रेक के बाद इसी थीम …

थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक:और परी को प्यार हो गया

थोडा प्यार, थोडा मैजिक चौंके नहीं। पर्दे पर फिल्म का नाम हिंदी में ऐसे ही आता है- थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक। ड के नीचे बिंदी लगाना पब्लिसिटी डिजाइनर भूल गया और हमारे निर्माता-निर्देशकों का हिंदी ज्ञान इतना नहीं होता कि वे ड और ड़ का फर्क समझ सकें। प्रसंगवश पिछले दिनों पांचवी पास के एक इवेंट में किंग खान शाहरुख भी पढ़ो को पढो लिखते पाए गए थे। बहरहाल, थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक रोचक फिल्म है। इस तरह की फिल्में हम पहले भी देख चुके हैं। विदेशों में कई फिल्में इस विधा में बनी हैं। उनमें से कुछ के दृश्य तो थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक में भी लिए गए हैं। मौलिकता की शर्त थोड़ी ढीली करने के बाद फिल्म देखें तो मजा आएगा। रणबीर तलवार के जीवन की एक दुर्घटना उनके वर्तमान और भविष्य को बदल देती है। उनकी गलती से एक दंपती की सड़क दुर्घटना में मौत हो जाती है। जज महोदय अनोखा फैसला सुनाते हैं, जिसके तहत मृत दंपती के चारों बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी रणबीर को सौंप दी जाती है। रणबीर और चारों बच्चों के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। स्थिति यह आती है कि दोनों ही पक्ष भगवान से कुछ करने की गुहार लगाते हैं। थ्री पीस सूट और फ…