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Showing posts from May, 2017

रोज़ाना : जे पी दत्‍ता की ‘पलटन’

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रोज़ाना जे पी दत्‍ता की ‘पलटन’ -अजय ब्रह्मात्‍मज खबरें आ रही हैं कि जेपी दत्‍ता ‘उमराव जान’ की रिलीज के 11 सालों के बाद फिर से ‘लाइट कैमरा एक्‍शन’ कहने के लिए तैयार हैं। वे ‘पलटन’ नाम की फिल्‍म का निर्देशन करेंगे,जिसमें उनके चहेते फिल्‍म स्‍टार अभिषेक बच्‍चन रहेंगे। अभिषेंक बच्‍चन के साथ सूरज पंचोली और पुलकित सम्राट भी फिल्‍म में होगे। जेपी दत्‍ता की ‘बोर्डर’ के सीक्‍वल की खबरें लंबे समय तक चलीं। यह फिल्‍म धरी रह गई। सबसे बड़ी वजह बजट और कलाकारों की भागीदारी है। इन दिनों फिल्‍म स्‍टार किसी भी भी को 30 से 60 दिनों का समय देते हैं और चाहते हैं कि एक ही शेड्यूल में फिल्‍म पूरी हो जाए। अगर आज के माहौल में जेपी दत्‍ता की ‘एलओसी कारगिल’ की कल्‍पना करें तो वह असंभव हो जाएगी।इस पैमाने,स्‍तर और समय के साथ अभी फिल्‍में बनाना मुश्किल हो चुका है। ऐसा लगता है कि ‘बाहुबली’ फिल्‍मों की कामयाबी ने ही जेपी दत्‍ता को अपने किस्‍म की एपिक फिल्‍म के लिए तैयार किया होगा। अभिशेक बच्‍चन और करीना कपूर की पहली फिल्‍म ‘रिफ्यूजी’ के निर्देशक जेपी दत्‍ता ही थे। उन्‍हें उन दोनों का गॉडफादर कहा जाता है। वे दिन दूसरे थे…

रोज़ाना : बेटियों से शक्ति कपूर की अपील

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रोज़ाना
शक्ति कपूर की बेटियों से अपील

-अजय ब्रह्मात्‍मज हालही में अभिनेता शक्ति कपूर ने एक वीडियो संदेश जारी किया है। सभी जानतेहैं कि शक्ति कपूर की बेटी श्रद्धा कपूर चर्चित और लोकप्रिय अभिनेत्री हैं।पिछले कुछ समय से शक्ति कपूर और श्रद्धा कपूर चर्चा में हैं।मुंबई की हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री के गलियारों और फिल्‍मी पत्र-पत्रिकाओंमें लगातार खबरें चल रही हैा कि 'रॉक ऑन' के समय से फरहान अख्‍तर औरश्रद्धा कपूरके बीच कुछ चल रहा है। दोनों की नजदीकियों के किस्‍सेपहले तो फिल्‍म रिलीज के समय केप्रचार अभियान का किस्‍सा लगे,लेकिन बाद कीखबरों से भान हुआ कि मामला गंभीर है। बीच में यह भी खबर आई कि शक्ति कपूरश्रद्धा कपूर को मना कर घर वापस ले आए थे। शक्ति कपूर के ताजा वीडियो संदेश के आशय परगौर करें तो वे आम बेटियों के बहाने सीधे श्रद्धा कपूर को संबोधित कर रहे हैं।
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रोज़ाना : ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म

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रोज़ाना ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म -अजय ब्रह्मात्‍मज कुछ दिनों पहले हालीवुड के स्‍टार ब्रैड पिट कुछ घंटों के लिए भारत आए थे। मौका उनकी नई फिल्‍म के भारत में इवेंट का था। ब्रैड पिट की यह फिल्‍म ‘नेटफिल्‍क्‍स’ के सहयोग से बनी है। नेटफिल्‍क्‍स ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म है। आप एक निश्चित रकम देकर नेटफिल्‍क्‍स पर फिल्‍में,टीवी शो और अन्‍य ऑडिये-विजुअल कार्यक्रम देख सकते हैं। भारत में नेटफिल्‍क्‍स के साथ अमैजॉन भी भविष्‍य की तैयारियों में है। ये दोनों प्‍लेटफॉर्म बड़ पैमाने पर भारतीय कंटेंट खरीद रहे हैं और भारतीय निर्माताओं व कलाकारों के सहयोग से नए कंटेंट तैयार कर रहे हैं। इन दिनों हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री का हर सक्रिय सदस्‍य किसी न किसी प्रकार इन दोनों ऑन लाइन फल्‍ेटफॉर्म में से किसी एक से जुड़ना चाह रहा है। ब्रैड पिट ने त्रवार मशीन’ का निर्माण नेटफिल्‍क्‍स के लिए किया। यह फिल्‍म ऑनलाइन ही देखी जा सकेगी। माना जा रहा है कि सिनेमा का यही भविष्‍य है या फिर एक कमाईदार विकल्‍प है। ‘वार मशीन’ जैसी फिल्‍में थिएटर रिलीज को ध्‍यान में रख कर नहीं बनाई जा सकती थी। हालीवुड के स्‍टूडियो भी ऐसी फिल्‍मों में निवेश करने से …

फिल्‍म समीक्षा : सचिन

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फिल्‍म रिव्‍यू सचिन सचिन सचिन : अ बिलियन ड्रीम्‍स -अजय ब्रह्मात्‍मज ’सचिन सचिन’ की आवाज और गूंज के साथ यह फिल्‍म सभी दर्शकों दिल-ओ-दिमाग में प्रतिध्‍वनित होती है। सचिन भी बताते हैं ये दो शब्‍द ‘सचिन सचिन’ वे नहीं भूल पाए हैं। इन दो शब्‍दों में ही प्रशंसकों और देशवासियों का प्रेम समा जाता है। न तो यह फीचर फिल्‍म है और न डाक्‍यूमेंट्री। भारतीय क्रिकेट के के श्रेष्‍ठ खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के खेल जीवन के प्रसंगों और लाइव फुटेज को जोड़ कर बनायी गयी यह फिल्‍म एक खिलाड़ी के समर्पण,लगन और जीवन का परिचय देती है। फिल्‍म में एक जगह आमिर खान बिल्‍कुल सही कहते हैं कि सचिन हमारे सामूहिक गर्व के प्रतीक हैं। फिल्‍म में अमिताभ बच्‍चन भी बताते हैं कि सचिन के मैदान में मौजूद रहने पर सारी संभावनाएं कायम रहती हैं। यह फिल्‍म स्‍कूलों में अनिवार्य कर देनी चाहिए। बच्‍चे किसी भी क्षेत्र में अपनी रुचि से बड़ें,लेकिन उनमें लगन और समर्पण तो होना ही चाहिए। खेलप्रेमी खास कर क्रिकेटप्रेमी सचिन के बारे में सब कुछ जानते हैं। यह फिल्‍म सचिन के मैचों के फुटेज से वैसा ही रोमांच पैदा करती है। फिल्‍म देखते हुए वे पल याद आ जाते…

दरअसल : नंदिता दास के मंटो

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दरअसल... नंदिता दास के मंटो -अजय ब्रह्मात्‍मज
नंदिता दास पिछले कुछ सालों से ‘मंटो’ के जीवन पर फिल्‍म बनाने में जुटी हैं। भारतीय उपमाद्वीप के सबसे ज्‍यादा चर्चित लेखक सआदत हसन मंटो के जीवन में पाठकों और दर्शकों की रुचि है। वे अपने लखन और लेखन में की गई टिप्‍पणियों से चौंकाते और हैरत में डाल देते हैं। आज उनकी जितनी ज्‍यादा चर्चा हो रही है,अगर इसका आंशिक हिस्‍सा भी उन्‍हें अपने जीवनकाल में मिल गया होता। उन्‍हें समुचित पहचान के साथ सम्‍मान मिला होता तो वे 42 की उम्र में जिंदगी से कूच नहीं करते। मजबूरियां और तकलीफें उन्‍हें सालती और छीलती रहीं। कौम की परेशानियों से उनका दिल पिघलता रहा। वे पार्टीशन के बाद पाकिस्‍तान के लाहौर गए,लेकिन लाहौर में मुंबई तलाशते रहे। मुंबई ने उन्‍हें लौटने का इशारा नहीं दिया। वे न उधर के रहे और न इधर के। अधर में टंगी जिंदगी धीरे-धीरे घुलती गई और एक दिन खत्‍म हो गई। नंदिता दास अपनी फिल्‍म में उनके जीवन के 1946 से 1952 के सालों को घटनाओं और सहयोगी किरदारों के माध्‍यम रख रही हैं। यह बॉयोपिक नहीं है। यह पीरियड उनकी जिंदगी का सबसे अधिक तकलीफदेह और खतरनाक हैं। कुछ पाठकों क…

रोज़ाना : प्रियंका चोपड़ा की 51वीं फिल्‍म

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रोज़ाना प्रियंका चोपड़ा की 51वीं फिल्‍म -अजय ब्रह्मात्‍मज भारत छोड़ कर पूरी दुनिया में आज रिलीज हो रही ‘बेवाच’ प्रियंका चोपड़ा की पहली हॉलीवुड फिल्‍म है। अगर उनकी हिंदी फिल्‍मों को शामिल कर लें तो यह उनकी 51वीं फिल्‍म होगी। 50 फिल्‍मों के बाद हॉलीवुड में इस दस्‍तक से प्रियंकाचोपड़ा समेत उनके प्रशंसक खुश हैं। किसी भारतीयअभिनेत्री की बड़ी उपलब्धि की तरह इसे पेश किया जारहा है। लोकप्रिय टीवी शो पर आधारित इस फिल्‍म के प्रति दर्श्‍कों केनजरिए में भिन्‍नता हो सकती है,फिर भी यह स्‍वीकार करने में दिक्‍कत नहीं होनी चाहिए कि प्रियंका चोपड़ा ने कुछ उल्‍लेखनीय हासिल किया है। ‘देसी गर्ल’ के नाम से विख्‍यात प्रियंका चोपड़ा की जमशेदपुर से हॉलीवुडतक की यह यात्रा देसी व छोटे शहर की लड़कियों के लिए मिसाल व प्रेरणा है। प्रियंका चोपड़ा ने मिस इंडिया के बाद फिल्‍मों में कदम रखा। अपनी गलतियों से सीखती हुई वह आगे बढ़ती रही। माता-पिता के संरक्षण और दिशानिर्देश में प्रियंका चोपड़ा ने छोटी-छोटी कामयाबियों से हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री में अपनी जगह बनायी। एक्टिंग करिअर में वह अपने साथ आई लारा दत्‍ता से काफी आगे बढ़ ग…

रोजाना : रंगोली सजाएंगी नीतू चंद्रा

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रोजाना रंगोली सजाएंगी नीतू चंद्रा -अजय ब्रह्मात्‍मज
अगले रविवार से दूरदर्शन से प्रसारित ‘रंगोली’ की होस्‍ट बदल रही हैं। अभी तक इसे स्‍वरा भास्‍कर प्रस्‍तुत कर रही थीं। 28 मई से नीतू चंद्रा आ जाएंगी। 12 साल पहले हिंदी फिल्‍म ‘गरम मसाला’ से एक्टिंग करिअर आरंभ कर चुकी हैं। नीतू चंद्रा ने कम फिल्‍में ही की हैं। बहुप्रतिभा की धनी नीतू एक्टिंग के साथ खेल में भी एक्टिव हैं। वह थिएटर भी कर रही हैं। अब वह टीवी के पर्दे को शोभायमान करेंगी। नई भूमिका में वह जंचेंगी। इस बीच उन्‍होंने भोजपुरी और मैथिली में फिल्‍मों का निर्माण किया,जिनका निर्देशन उनके भाई नितिन नीरा चंद्रा ने किया। बिहार की भाषाओं में ऑडियो-विजुअल कंटेंट के लिए कटिबद्ध भाई-बहन का समर्पण सराहनीय है। ‘रंगोली’ दूरदर्शन का कल्‍ट प्रोगांम है। कभी हेमा मालिनी इसे प्रस्‍तुत करती थीं। बाद में शर्मिला टैगोर,सारा खान,श्‍वेता तिवारी,प्राची शाह और स्‍वरा भास्‍कर भी होस्‍ट रहीं। सैटेलाइट चैनलों के पहले दूरदर्शन से प्रसारित ‘रंगोली’ और ‘चित्रहार’ दर्शकों के प्रिय कार्यक्रम थे। सभी को उनका इंतजार रहता था। दोनों कार्यक्रमों ने कई पीढि़यों का स्‍वस्‍थ…

रोज़ाना : दर्शकों के समर्थन से कामयाब ‘हिंदी मीडियम’

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रोज़ाना दर्शकों के समर्थन से कामयाब ‘हिंदी मीडियम’ -अजय ब्रह्मात्‍मज
पिछले हफ्ते रिलीज हुई ‘हिंदी मीडियम’ और ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ की कहानियां एक-दूसरे की पूरक की तरह दर्शकों के बीच आईं। साकेत चौधरी के निर्देशन में बनी ‘हिंदी मीडियम’ में इरफान और सबा कमर मुख्‍य भूमिकाओं में थे। इस फिल्‍म दीपक डोबरियाल ने भी एक अहम किरदार निभाया है। दिल्‍ली के परिवेश में रची इस कहानी में नायक बने इरफान अपनी बीवी सबा कमर के दबाव में आकर बेटी का एडमिशन हाई-फाई अंग्रेजी स्‍कूल में करवाना चाहता है। इसके लिए उसे झूठ और प्रपंच का भी सहारा लेना पड़ता है। दूसरी फिल्‍म तो चूतन भगत के उपन्‍यास ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ पर आधारित है। इसका नायक अर्जुन कपूर अंगेजी न बोल पाने की वजह से थोड़ी दिक्‍कत में है। वह अंग्रेजी से आतंकित नहीं है,लेकिन अंग्रेजी नहीं जानने की वजह से उसकी जिंदगी में अड़चनें आती हैं। एक ही दिन रिलीज हुई दोनों फिल्‍मों का वितान और परिवेश अलग है। उनके किरदार अलग हैं। ‘हिंदी मीडियम’ ठेठ दिल्‍ली से आज की दिल्‍ली के बीच पसरी है। आज की दिल्‍ली में समा चुकी अंग्रेजी मानसिकता की विसंगतियों को लेकर चलती यह फिल्‍म सामाजिक …

फर्क है बस नजरिए का - कृति सैनन

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कृति सैनन -अजय ब्रह्मात्‍मज - कृति सैनन के लिए ‘राब्‍ता’ क्‍या है? फिल्‍म और शब्‍द... 0 शब्‍द की बात करूं तो कभी-कभी किसी से पहली बार मिलने पर भी पहली बार की भेंट नहीं लगती। लगता है कि पहले भी मिल चुके हैं। कोई संबंध हे,जो समझ में नहीं आता... मेरे लिए यही ‘राब्‍ता’ है। मेरा मेरी पेट(पालतू) के साथ कोई राब्‍ता है। फिल्‍म मेरे लिए बहुत खास है। अभी यह तीसरी फिल्‍म है। पहली फिल्‍म में तो सब समझ ही रही थी। मार्क,कैमरा आदि। ‘दिलवाले’ में बहुत कुछ सीखा,लेकिन इतने कलाकारों के बीच में परफार्म करने का ज्‍यादा स्‍पेस नहीं मिला। इसकी स्‍टोरी सुनते ही मेरे साथ रह गई थी। एक कनेक्‍शन महसूस हुआ। मुझे दो कैरेक्‍टर निभाने को मिले-सायरा और सायबा। दोनों की दुनिया बहुत अलग है। -दोनों किरदारों के बारे में बताएं? 0 दोनों किरदार मुझ से बहुत अलग हैं। इस फिल्‍म में गर्ल नेक्‍स्‍ट डोर के रोल में नहीं हूं। सायरा को बुरे सपने आते हें। उसके मां-बाप बचपन में एक एक्‍सीडेंट में मर गए थे। वह बुदापेस्‍ट में अकेली रहती है। चॉकलेट शॉप चलाती है। उसे पानी से डर लगता है। वह बोलती कुछ है,लेकिन सोचती कुछ और है। फिर भी आप उससे प्‍या…

रोज़ाना : नमक हलाल की री-रिलीज

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रोज़ाना नमक हलाल की री-रिलीज -अजय ब्रह्मात्‍मज इस कॉलम की शुरूआत हम ने सुभाष घई की फिल्‍म ‘ताल’ की खास स्‍क्रीनिंग से की थी। मुंबई में आयोजित उस शो में फिल्‍म के संगीतकार और कैमरामैन आए थे। उन्‍होंने अपनी यादें शेयर की थीं। पुरानी फिल्‍मों को फिर से देखना या पहली बार देखना अनोखा अनुभव होता है। पुरानी पीढ़ी फिल्‍म देखते हुए डायरी के पन्‍ने पलटती है और उस शो में साथ आए दोस्‍तों-परिजनों के साथ उन लमहों को याद करती है। नई पीढ़ी ऐसी फिल्‍मों के जरिए अपने इतिहास से वाकिफ होती है। मोबाइल फोन पर फिल्‍म देखने की सुविधा आ जाने के बावजूद फिल्‍म देखने का पूरा आनंद तो बड़े पर्दे पर ही आता है। पहले रीरिलीज का चलन था। पुरानी फिल्‍में विभिन्‍न अवसरों और ईद-होली जैसे त्‍योहारों पर रिलीज की जाती थीं। उन्‍हें देखने दर्शक उमड़ते थे। देखना है कि इस रविवार को मुंबई के जुहू पीवीआर और दिल्‍ली के नारायणा पीवीआर में 21 मई रविवार के दिन ‘नमक हलाल’ देखने कितने दर्शक आते हैं? 30 अप्रैल 1982 को पहली बार रिलीज हुई यह फिल्‍म 35 सालों के बाद 21 मई को फिर से रिलीज हो रही है। प्रकाश मेहरा निर्देशित इस फिल्‍म ने रिलीज के स…

फिल्‍म समीक्षा : हाफ गर्लफ्रेंड

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फिल्‍म रिव्‍यू हाफ गर्लफ्रेंड
शब्‍दों में लिखना और दृश्‍यों में दिखाना दो अलग अभ्‍यास हैं। पन्‍ने से पर्दे पर आ रही कहानियों के साथ संकट या समस्‍या रहती है कि शब्‍दों के दृश्‍यों में बदलते ही कल्‍पना को मूर्त रूप देना होता है। अगर कथा परिवेश और भाषा की जानकारी व पकड़ नहीं हो तो फिल्‍म हाफ-हाफ यानी अधकचरी हो जाती है। मोहित सूरी निर्देशित ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ के साथ यही हुआ है। फिल्‍म का एक अच्‍छा हिस्‍सा बिहार में है और यकीनन मुंबई की ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ टीम को बिहार की सही जानकारी नहीं है। बिहार की कुछ वास्‍तविक छवियां भी धूमिल और गंदिल रूप में पेश की गई हैं। भाषा,परिवेश और माहौल में ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ में कसर रह जाता है और उसके कारण अंतिम असर कमजोर होता है। उपन्‍यास के डुमरांव को फिल्‍म में सिमराव कर दिया गया है। चेतन भगत ने उपन्‍यास में उड़ान ली थी। चूंकि बिल गेट्स डुमरांव गए थे,इसलिए उनका नायक डुमरांव का हो गया। इस जोड़-तोड़ में वे नायक माधव को झा सरनेम देने की चूक कर गए। इस छोटी सी चूक की भरपाई में उनकी कहानी बिगड़ गई। मोहित सूरी के सहयोगियों ने भाषा,परिवेश और माहौल गढ़ने में कोताही की है। पट…