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दरअसल : फिल्मों का सद्प्रभाव

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-अजय ब्रह्मात्मज
    आए दिन खबरें आती हैं कि फिल्मों के दुष्प्रभाव से समाज में कुरीतियां फैल रही हैं। चोरी, हत्या, बलात्कार आदि घटनाओं के उल्लेख के साथ बताया जाता है कि फलां-फलां फिल्म के प्रभाव से ऐसा हुआ। अनेक सामाजिक चिंतक समाज में बढ़ रही गड़बडिय़ों के लिए लोकप्रिय माध्यमों को निशाना बनाने से नहीं चूकते। भारत जैसे देश में फिल्में मनोरंजन का सबसे सस्ता और सुलभ माध्यम हैं। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि फिल्में समाज को प्रभावित करती हैं,लेकिन हम केवल दुष्प्रभावों को ही खबर बनाते हैं। सद्प्रभावों या सकारात्मक प्रभावों के बारे में उल्लेख तक नहीं किया जाता।
    पिछले दिनों हैदराबाद जाते-आते समय जैकी श्रॉफ से मुलाकात हुई। बीते जमाने के स्टार जैकी श्रॉफ के साथ कोई ताम-झाम नहीं चलता। वे अकेले ही खड़े फ्लाइट का इंतजार कर रहे थे। बीच-बीच में कोई यात्री उनके पास आ जाता था। साथ में तस्वीरें खिंचवाता था। हाथ मिलाता था। उनकी किसी फिल्म या भूमिका की तारीफ करता था। लोकप्रिय हस्तियों की यह समस्या बनी रहती है। वे हमेशा मुस्कराते और तस्वीरें खिंचवाने के लिए तत्पर रहते हैं। यह तत्परता पेशेगत मजबूरी…