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फ़िल्म समीक्षा:जश्न

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सपनों और रिश्तों के बीच
-अजय ब्रह्मात्मज
भट्ट कैंप की फिल्मों का अपना एक फार्मूला है। कम बजट, अपेक्षाकृत छोटे और मझोले स्टार, इमोशनल कहानी, म्यूजिकल सपोर्ट, गीतों व संवादों में अर्थपूर्ण शब्द। इस फार्मूले में ही विशेष फिल्म्स की फिल्में कभी कमाल कर जाती हैं और कभी-कभी औसत रह जाती हैं। जश्न कमाल कर सकती है। भट्ट बंधु ने सफलता के इस फार्मूले को साध लिया है। उनकी जश्न के निर्देशक रक्षा मिस्त्री और हसनैन हैदराबादवाला हैं।
जश्न सपनों और आकांक्षाओं की फिल्म है। इसे हर जवान के दिल में पल रहे नो बडी से सम बडी होने के सपने के तौर पर प्रचारित किया गया है। फिल्म का नायक आकाश वर्मा सपनों के लिए अपनों का सहारा लेता है। लेकिन असफल और अपमानित होने पर पहले टूटता, फिर जुड़ता और अंत में खड़ा होता है। सपनों और आकांक्षाओं के साथ ही यह शहरी रिश्तों की भी कहानी है। हिंदी फिल्म के पर्दे पर भाई-बहन का ऐसा रिश्ता पहली बार दिखाया गया है। बहन खुद के खर्चे और भाई के सपने के लिए एक अमीर की रखैल बन जाती है। भाई इस सच को जानता है। दोनों के बीच का अपनापा और समर्थन भाई-बहन के रिश्ते को नया आयाम देता है। सारा आज की बहन …

हाल-ए-दिल:21वीं सदी में आजादी के समय का प्रेम

-अजय ब्रह्मात्मज
कई बार फिल्मों के शीर्षक ही उनकी क्वालिटी का अहसास करा देते हैं। 21वीं सदी में हाल-ए-दिल नाम थोड़ा अजीब सा लगता है न? यह फिल्म भी अजीब है। शिमला से मुंबई तक फैली इस कहानी में न तो महानगर मुंबई की आधुनिकता दिखती है और न शिमला की स्थिर भावुकता। फिल्म का बड़ा हिस्सा ट्रेन में है, लेकिन वहां भी जब वी मेट जैसी कहानी और प्रसंगों की छुक-छुक नहीं है।
संजना पिछली सदी की यानी आजादी के आसपास की लड़की और प्रेमिका लगती है। रोहित के प्यार में डूबी संजना अंत-अंत तक शेखर की भावनाओं को नजरअंदाज करती है। और फिर रोहित जैसे परिवेश का युवक इस सदी में अपनी प्रेमिका से अलग किए जाने पर भला क्यों नींद की गोलियां खाएगा? कहीं कुछ गड़बड़ है। किरदारों को गढ़ने में लेखक से मूल गलतियां हो गई हैं। उसके बाद जो कहानी लिखी जा सकी, वह विश्वसनीय नहीं लगती। इसके अलावा फिल्म की रफ्तार इतनी धीमी है कि किरदारों से सहानुभूति के बजाय ऊब होने लगती है। युवा धड़कनों की प्रेम कहानी में मन उचाट हो जाए तो लेखक और निर्देशक की विफलता स्पष्ट है। इस फिल्म में तीन नए एक्टर हैं। अमिता पाठक के स्वाभाविक गुणों के अनुरूप संजना…