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Friday, September 3, 2010

फिल्‍म समीक्षा : वी आर फैमिली

-अजय ब्रह्मात्‍मज

क्या आप ने स्टेपमॉम देखी है? यह फिल्म 1998 में आई थी। कुछ लोग इसे क्लासिक मानते हैं। 12 सालों के बाद करण जौहर ने इसे हिंदी में वी आर फेमिली नाम से प्रोड्यूस किया है। सौतेली मां नाम रखने से टायटल डाउन मार्केट लगता न? बहरहाल, करण जौहर ने इसे आधिकारिक तौर पर खरीदा और हिंदी में रुपांतरित किया है। इस पर चोरी का आरोप नहीं लगाया जा सकता,फिर भी इसे मौलिक नहीं कहा जा सकता। इसका निर्देशन सिद्धार्थ मल्होत्रा ने किया है। इसमें काजोल और करीना कपूर सरीखी अभिनेत्रियां हैं और अर्जुन राजपाल जैसे आकर्षक अभिनेता हैं।

हिंदी में ऐसी फिल्में कम बनती हैं, जिन में नायिकाएं कहानी की दिशा तय करती हों। वी आर फेमिली का नायक कंफ्यूज पति और प्रेमी है, जो दो औरतों के प्रेम के द्वंद्व में है। साथ ही उसे अपने बच्चों की भी चिंता है। 21 वीं सदी में तीन बच्चों के माता-पिता लगभग 15 सालों की शादी के बाद तलाक ले लेते हैं। तलाक की खास वजह हमें नहीं बतायी जाती। हमारा परिचय तीनों किरदारों से तब होता है जब तलाकशुदा पति के जीवन में नई लड़की आ चुकी है। पूर्व पत्‍‌नी माया और प्रेमिका श्रेया की आरंभिक भिड़ंत के बाद ही पता चल जाता है कि माया कैंसर से पीडि़त है और उसकी जिंदगी अब चंद दिनों के लिए बची है। सालों को लमहों में जीने की डॉक्टर की सलाह के बाद माया चाहती है कि श्रेया उसके परिवार में आ जाए और बच्चों की जिम्मेदारी संभाल ले। सब कुछ इतना भावुक,अश्रुपूर्ण और मैलोड्रामैटिक हो जाता है कि उनकी परेशानियों से कोफ्त होने लगती है। सुबकते-रोते हुए फिल्म देखने के शौकीन दर्शकों को यह फिल्म पसंद आएगी।

करण जौहर ब्रांड की फिल्में विभ्रम का सृजन करती है। इस फिल्म की कथा भूमि विदेश की है। नाते-रिश्ते और स्त्री-पुरुष संबंध के पहलू विदेशी हैं। भारत के चंद महानगरों में विवाह की ऐसी समस्याओं से दंपति जूझ रहे होंगे, लेकिन मूल रूप से विदेशी चरित्रों और स्थितियों को लेकर बनी यह फिल्म अपने आसपास की लगने लगती है, क्योंकि इसमें हमारे परिचित कलाकार हैं। वे हिंदी बोलते हैं। वी आर फेमिली भारतीय कहानी नहीं है। यह थोपी हुई है। जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर विदेशियों को पीछे खड़ा कर विदेशों में फिल्मांकित इन फिल्मों से करण लगातार हिंदी फिल्मों के दर्शकों को मनोरंजन के विभ्रम में रखने में सफल हो रहे हैं। ंिहंदी सिनेमा के लिए यह अच्छी स्थिति नहीं है।

दो अभिनेता या अभिनेत्री एक साथ फिल्म में आ रहे हों तो दर्शक उनके टक्कर से मनोरंजन की उम्मीद रखते हैं। काजोल और करीना कपूर के प्रशंसक इस लिहाज से निराश होंगे, क्योंकि लेखक-निर्देशक ने उनके बीच संतुलन बना कर रखा है। काजोल और करीना कपूर दक्ष अभिनेत्रियां हैं। दोनों अपने किरदारों को सही ढंग से निभा ले गई हैं। अर्जुन रामपाल को सिर्फ आकर्षक लगना था। शंकर उहसान लॉय का संगीत अब सुना-सुना सा लगने लगा है।

** दो स्टार