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Showing posts with the label करीना कपूर

इतना तो हक़ बनता है - करीना कपूर

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-अजय ब्रह्मात्मज
    करीना कपूर ने दस दिन पहले ‘सिंघम रिटन्र्स’ के लिए योयो हनी सिंह और अजय देवगन के साथ एक गाने की शूटिंग पूरी की है। सब की तरह उन्हें भी हनी सिंह पसंद हैं। क्यों? क्रेज है। सभी उनसे गाने गवा रहे हैं। रोति शेट्टी के साथ उन्होने ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ के लिए लुंगी डांस गाना किया था। उस गाने से वे बहुत पॉपुलर हुए? करीना बताने से ज्यादा पूछ लेती हैं। वह सलमान खान की ‘किक’ के बारे में भी जानना चाहती हैं। वह मानती हैं कि सलमान खान की फिल्मों के मामले में रिव्यू बेमानी हो जाते हैं। वह सुपरस्टार हैं। वह रिव्यू के बारे में परेशान भी नहीं रहते। जिन फिल्मों को अच्छे रिव्यू मिलते हैं,उन्हें दर्शक थिएटर में देखने नहीं जाते। रिव्यू के संबंध में उनकी राय पूछने पर करीना कपूर कहती हैं,‘सभी की अपनी ओपिनियन होती है। जिन फिल्मों को पब्लिक पसंद कर लेती है,वे चलती हैं। रोहित की फिल्में खूब चलती हैं। उनको अच्छे रिव्यू नहीं मिलते। जरूरी तो नहीं है कि हर कोई क्लासी (खास रुचि) फिल्में बनाए। कुछ को मासी (जन रुचि) फिल्में बनानी चाहिए।’ करीना कपूर की धारणा में रोहित शेट्टी की फिल्मों की खास स्टायल है…

फिल्‍म समीक्षा : गोरी तेरे प्‍यार में

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-अजय ब्रह्मात्‍मज  धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बनी पुनीत मल्होत्रा की फिल्म 'गोरी तेरे प्यार में' पूरी तरह से भटकी, अधकचरी और साधारण फिल्म है। ऐसी सोच पर फिल्म बनाने का दुस्साहस करण जौहर ही कर सकते थे। करण जौहर स्वयं क्रिएटिव और सफल निर्देशक हैं। उन्होंने कुछ बेहतरीन फिल्मों का निर्माण भी किया है। उनसे उम्मीद रहती है, लेकिन 'गोरी तेरे प्यार में' वे बुरी तरह से चूक गए हैं। जोनर के हिसाब से यह रोमांटिक कामेडी है। इमरान खान और करीना कपूर जैसे कलाकारों की फिल्म के प्रति दर्शकों की सहज उत्सुकता बन जाती है। अफसोस है कि इस फिल्म में दर्शकों की उत्सुकता भहराकर गिरेगी। दक्षिण भारत के श्रीराम (इमरान खान) और उत्तर भारत की दीया (करीना कपूर) की इस प्रेमकहानी में कुछ नए प्रसंग,परिवेश और घटनाएं हैं। उत्तर-दक्षिण का एंगल भी है। ऐसा लगता है कि लेखक-निर्देशक को हीरो-हीरोइन के बीच व्यक्ति और समाज का द्वंद्व का मसाला अच्छा लगा। उन्होंने हीरोइन की सामाजिक प्रतिबद्धता को हीरो के प्रेम में अड़चन की तरह पेश किया है। हाल-फिलहाल तक हीरोइन का साथ और हाथ हासिल करने के लिए हीरो उसके …

फिल्‍म समीक्षा : सत्‍याग्रह

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-अजय ब्रह्मात्‍मज                    इस फिल्म के शीर्षक गीत में स्वर और ध्वनि के मेल से उच्चारित 'सत्याग्रह' का प्रभाव फिल्म के चित्रण में भी उतर जाता तो यह 2013 की उल्लेखनीय और महत्वपूर्ण सामाजिक-राजनीतिक फिल्म हो जाती। प्रकाश झा की फिल्मों में सामाजिक संदर्भ दूसरे फिल्मकारों से बेहतर और सटीक होता है। इस बार उन्होंने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया है। प्रशासन के भ्रष्टाचार के खिलाफ द्वारिका आनंद की मुहिम इस फिल्म के धुरी है। बाकी किरदार इसी धुरी से परिचालित होते हैं।               द्वारिका आनंद ईमानदार व्यक्ति हैं। अध्यापन से सेवानिवृत हो चुके द्वारिका आनंद का बेटा भी ईमानदार इंजीनियर है। बेटे का दोस्त मानव देश में आई आर्थिक उदारता के बाद का उद्यमी है। अपने बिजनेस के विस्तार के लिए वह कोई भी तरकीब अपना सकता है। द्वारिका और मानव के बीच झड़प भी होती है। फिल्म की कहानी द्वारिका आनंद के बेटे की मृत्यु से आरंभ होती है। उनकी मृत्यु पर राज्य के गृहमंत्री द्वारा 25 लाख रुपए के मुआवजे की रकम हासिल करने में हुई दिक्कतों से द्वारिका प्रशासन को थप्पड़ मारते हैं। इस अपराध में …

‘सत्याग्रह’ में पॉलिटिकल जर्नलिस्ट हूं मैं-करीना कपूर

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-अजय ब्रह्मात्मज
    आम धारणा है कि शादी के बाद फिल्म अभिनेत्रियों को नई फिल्मों के ऑफर नहीं मिलते। उन्हें घर पर रहना पड़ता है। कुछ सालों पहले की इस सच्चाई को हाल-फिलहाल में शादीशुदा हुई अभिनेत्रियों ने झुठला दिया है। विद्या बालन ‘घनचक्कर’ पूरी करने के बाद ‘शादी के साइड इफेक्टस’ की शूटिंग कर रही हैं। हाल ही में निर्णायक मंडल के सदस्य के तौर पर उन्होंने कान फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लिया। करीना कपूर भी व्यस्त हैं। उन्होंने प्रकाश झा की ‘सत्याग्रह’ की शूटिंग पूरी कर ली है। फिलहाल वह धर्मा प्रोडक्शन की ‘गोरी तेरे प्यार में’ की शूटिंग कर रही हैं। कमर्शियल के साथ-साथ उद्देश्यपरक और सामाजिक फिल्मों में करीना कपूर की मौजूदगी से हम परिचित हैं। उन्होंने ‘चमेली’, ‘देव’, ‘ओमकारा’ और ‘हीराइन’ जैसी फिल्मों में काम किया है। प्रकाश झा की ‘सत्याग्रह’ इसी तरह की उनकी अगली फिल्म है। इस फिल्म में वह एक बार फिर अजय देवगन के साथ दिखेंगी। - प्रकाश झा के साथ काम करने का कैसा अनुभव रहा? 0 अच्छा रहा। मैंने सभी एक्टिव डायरेक्टर के साथ काम किया है। कुछ ऐसा संयोग रहा कि प्रकाश झा के साथ कभी काम करने का मौका नह…

महिला दिवस: औरत से डर लगता है

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-अजय ब्रह्मात्‍मज उनके ठुमकों पर मरता है, पर ठोस अभिनय से डरती है फिल्‍म इंडस्‍ट्री। आखिर क्या वजह है कि उम्दा अभिनेत्रियों को नहीं मिलता उनके मुताबिक नाम, काम और दाम...विद्या बालन की 'द डर्टी पिक्चर' की कामयाबी का यह असर हुआ है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में महिला प्रधान [वीमेन सेंट्रिक] फिल्मों की संभावना तलाशी जा रही है। निर्माताओं को लगने लगा है कि अगर हीरोइनों को सेंट्रल रोल देकर फिल्में बनाई जाएं तो उन्हें देखने दर्शक आ सकते हैं। सभी को विद्या बालन की 'कहानी' का इंतजार है। इस फिल्म के बाक्स आफिस कलेक्शन पर बहुत कुछ निर्भर करता है। स्वयं विद्या बालन ने राजकुमार गुप्ता की 'घनचक्कर' साइन कर ली है, जिसमें वह एक महत्वाकांक्षी गृहणी की भूमिका निभा रही हैं। पिछले दिनों विद्या बालन ने स्पष्ट शब्दों में कहा था, 'मैं हमेशा इस बात पर जोर देती हूं कि किसी फिल्म की कामयाबी टीमवर्क से होती है। चूंकि मैं 'द डर्टी पिक्चर' की नायिका थी, इसलिए सारा क्रेडिट मुझे मिल रहा है। मैं फिर से कहना चाहती हूं कि मिलन लुथरिया और रजत अरोड़ा के सहयोग और सोच के बिना मुझे इतने प…

कट्रीना से बहुत आगे है करीना

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-अजय ब्रह्मात्मज अभी भी खबर केवल यह आई है कि रोहित शेट्टी ने शाहरुख खान के साथ के लिए कट्रीना कैफ को अप्रोच किया है।शाहरुख खान लंबे समय से रोहित शेट्टी को घेर रहे थे कि वे उनके साथ एक फिल्म करें। पहले आइडिया था कि अजय देवगन के साथ अपनी कॉमेडी फिल्मों से मशहूर हुए रोहित शेट्टी उनके लिए एक कॉमेडी फिल्म बनाएंगे। किसी पुरानी मशहूर कॉमेडी फिल्म के रीमेक के बारे में सोचा जा रहा था। इसी बीच अजय देवगन के साथ आई उनकी सिंघम हिट हो गई तो शाहरुख खान ने तय किया कि वे अब रोहित के साथ ऐक्शन फिल्म ही करेंगे। एक्शन हो या कॉमेडी। फिलहाल खबर यह है कि इस फिल्म में कट्रीना कैफ भी होंगी और इस खबर केसाथ स्थापित किया जा रहा है कि कट्रीना अपने प्रतिद्वंद्वी करीना से आगे निकल रही हैं।सही है कि कट्रीना कैफ लगातार सफल फिल्मों का हिस्सा रही हैं। अपनी खूबसूरती के दम पर उन्होंने एक अलग किस्म का मुकाम हासिल कर लिया है, लेकिन अभिनय की बात करें तो अभी उन्हें प्रूव करना है।उनकी कोई भी फिल्म इस लिहाज से उल्लेखनीय नहीं है। अपनी सफल फिल्मों में वे नाचती-गाती गुडि़या से अधिक नहीं होतीं। निर्देशक भी उनकी सीमाओं से वाकिफ हैं,…

फिल्‍म समीक्षा : बॉडीगार्ड

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सलमान खान शो-अजय ब्रह्मात्मज सिद्दिकी मलयालम के मशहूर निर्देशक हैं। उनकी फिल्में खूब पसंद की जाती हैं। प्रियदर्शन ने उनकी कई फिल्मों का हिंदी रिमेक किया है। इस बार सिद्दिकी की शर्त थी कि उसी को हिंदी में रिमेक का अधिकार देंगे, जो उन्हें इसे हिंदी में निर्देशित करने देगा। नतीजा सामने है। सिद्दिकी और सलमान खान ने मिलकर बॉडीगार्ड को हिंदी दर्शकों के लिए फिर से रचा है। इस फिल्म में पूरी तरह से सलमान खान के प्रशंसक दर्शकों का खयाल रखा गया है और हिंदी सिनेमा के मेलोड्रामा का छौंक लगाया गया है। इस छौंक में करीना कपूर काम आ गई हैं।बॉडीगार्ड सामान्य एक्शन फिल्म नहीं है। यह एक्शन की जबदरस्त फैंटेसी है। रियल लाइफ में ऐसा मुमकिन नहीं है। रील पर अवश्य ही रजनीकांत के साथ ऐसी फैंटेसी क्रिएट की जाती रही है। सलमान खान अकेले ही दर्जनों पर भारी हैं। दुश्मनों की गोलीबारी उन पर बूंदाबादी लगती है। इस फिल्म के एक्शन के लिए हैरतअंगेज से आगे का कोई शब्द खोजना होगा। सिंगल लाइन स्टोरी है बॉडीगार्ड लवली सिंह को दिव्या की सेक्युरिटी की ड्यूटी मिलती है। उसे परेशान करने की कोशिश में दिव्या उससे प्रेम क…