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सात सवाल : तिग्‍मांशु धूलिया

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सात सवाल तिग्‍मांशु धूलिया -अजय ब्रह्मात्‍मज तिग्‍मांशु धूलिया ने आईएनए ट्रायल पर ‘राग देश’ फिल्‍म निर्देशित की है। यह फिल्‍म लाल किले में सहगल,ढिल्‍लों औौर शाहनवाज पर चले मुकदमे का पर आधारित है। राज्‍य सभा टीवी ने इसका निर्माण किया है। -राज्‍य सभा टीवी के लिए ‘राग देश’ बनाने का संयोग कैसे बना? 0 ऐसी कोई फिल्‍म मेरे एजेंडा में नहीं थी। राज्‍य सभा टीवी के गुरदीप सप्‍पल मेरे पास दो प्रोजेक्‍ट लेकर आए- एक सरदार पटेल और दूसरा आईएनए ट्रायल। उन्‍होंने पूछा कि बनाना चाहोगे क्‍या? मैंने तुरंत कहा कि सरदार पटेल तो मैं कर चुका हूं। आईएनए ट्रायल पर काम करूंगा। मेरी इतिहास में थोड़ी रुचि है। और फिर मुंबई के सेटअप में मुझे ऐसी फिल्‍म बनाने के लिए कोई णन देता नहीं। - आप ने इसे किस तरह शूट किया। फार्मेट का चुनाव कैसे किया? 0 हम ने स्क्रिप्‍ट तो 6 घंटों के 6 एपीसोड के हिसाब से लिखी थी। शूट भी वैसे ही किया। एडिट पर हम ने यह फिल्‍म निकाली। -यह हमारे निकट अतीत की बात है,जिसके साक्ष्‍य मौजूद हैं। फिल्‍म के रूप में लाने की कैसी चुनौतियां रहीं? 0 फिल्‍म के 99 प्रतिशत दृश्‍य दस्‍तावेज के रूप में मौजूद हैं। पीरियड फि…

सात सवाल : दिलजीत दोसांझ

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सात सवाल -अजय ब्रह्मात्‍मज दिलजीत दोसांझ की ‘सुपर सिंह’ पंजाबी में आ रही है। पंजाबी की यह पहली सुपरहीरो फिल्‍म है। पंजाबी और हिंदी फिल्‍मों के परिचित और लोकप्रिय अभिनेता दिलजीत दोसांझ इसमें शीर्षक भूमिका निभा रहे हैं। यह फिल्‍म बड़े पैमाने पर पंजाब से बाहर यहां तक कि पाकिस्‍तान में भी रिलीज की जा रही है।‍ -‘सुपर सिंह’ का खयाल कैसे आया? 0 सुपरहीरो फिल्‍म पंजाब में बनाना चाहते थे। पिछले डेढ़-दो साल से निर्माता खोज रहे थे। बाकी पंजाबी फिल्‍मों से इसका बजट ज्‍यादा था। फायनली एकता कपूर की कंपनी बालाजी का सपोर्ट मिल गया। -क्‍या कांसेप्‍ट है? यह कैसे अलग होगा या दिखेगा? 0 पजाब की जड़ों से जुड़ी कहानी है। रामांटिक कॉमेडी के साथ सुपरहीरो का पावर भी है। हमें सीमित बजट में ही काम करना था। बहुत ज्‍यादा वीएफएक्‍स नहीं है,जो भी है वह स्‍तरीय है। -आप ने मास्‍क कम लगाया है और चड्ढी भी ऊपर से नहीं पहनी है? 0मैंने शुरु में ही स्‍पष्‍ट कर दिया था कि चड्ढी ऊपर से नहीं पहननी है। बाकी ड्रेस आप तय कर लो। मुझे बहुत बुरी लगती है। मैंने सिर पर पगड़ी बांधी हुई है तो मैं ऐसी हरकत नहीं कर सकता। मास्‍क है और एक खास ड्रेस…

सात सवाल : पलट’ मोमेंट होता है प्रेम में -सुशांत सिंह राजपूत

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सात सवाल ‘पलट’ मोमेंट होता है प्रेम में सुशांत सिंह राजपूत सुशांत सिंह राजपूत ने टीवी से फिल्‍मों में कदम रखा। अपनी फिल्‍मों के चुनाव और अभिनय से वे खास मुकाम बना चुके हैं। उनकी ‘राब्‍ता’ जल्‍दी ही रिलीज होगी,जिसे दिनेश विजन ने निर्देशित किया है। -प्रेम क्‍या है आप के लिए? 0 प्रेम से ही सेंस बनता है हर चीज का। जिंदगी के लिए जरूरी सारी चीजें प्रेम से जुड़ कर ही सेंस बनाती हैं। -प्रेम का पहला एहसास कब हुआ था? 0 बचपन में अकेला नहीं सो पाता था। मां नहीं होती थी दो रातों तक नहीं सो पाता था। मेरे लिए वही प्रेम का पहला एहसास था। - रामांस की अनुभूति कब हुई 0 सच कहूं तो चौथे क्‍लास में। अपनी क्‍लास टीचर से मेरा एकतरफा रोमांस हो गया था। वह मुझे बहुत अच्‍छी लगती थीं। उन्‍हें भी इस बात का अंदाजा था। -हिंदी फिल्‍मों ने आप को प्रेम के बारे में क्‍या सिखाया और बताया? 0लड़कियों को चार्म कैसे करते हें। मेरे पास कोई रेफरेंस नहीं था। मुझे एकदम याद है कि ‘दिलवाले दुल्‍‍हनिया ले जाएंगे’ देखने के बाद लगा कि लड़का तो ऐसा ही होना चाहिए। उसके बाद ‘कुछ कुछ होता है’ देख कर शाह रूख की तरह होने की इच्‍छा हुई। इन फिल्‍मों क…

सात सवाल : कृति सैनन

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कृति सैनन -अजय ब्रह्मात्‍मज सात सवाल -यहां आने से पहले हिंदी फिल्‍मों के प्रति क्‍या परसेप्‍शन था? 0 बिल्‍कुल आम दर्शकों की तरह ही मेरा परसेप्‍शन था। मीडिया के जरिए जो पढ़ती और सुनती थी,वही जानती थी। इसका ग्‍लैमर आकर्षित करता था। लगता था कि स्‍टारों के लिए सब मजेदार और आसान होगा। बस,डांस करना है। -परसेप्‍शन क्‍या बदला? 0 आने के बाद पता चला कि बहुत मेहनत है। फिल्‍म इंडस्‍ट्री के हर डिपार्टमेंट में काम करनेवालों के लिए रेसपेक्‍ट बढ़ गई है। एक छोटे से सीन के लिए भी सौ चीजें सोचनी पड़ती हैं। कई बार दर्शक उन पर ध्‍यान भी नहीं देते,लेकिन वही सिंक में न हो तो खटकेगा। - कहते हैं यह टीमवर्क है? 0 बिल्‍कुल। हर डिपार्टमेंट मिल कर ही फिल्‍म पूरी करता है। फिल्‍मों में काम करने के बाद ही यह सब पता चला। मुझे लगता है कि क्रिटिक और दर्शकों को भी सभी के काम पर गौर करना चाहिए। - हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री की क्‍या खासियत है? 0 विविधता है। हर तरह की प्रतिभाएं हैं। फिल्‍मों के विषयों की विविधता तो गजब की है। मैं देखती हूं कि अलग-अलग कारणों से सभी जुड़े हैं। एक बात समान है कि सभी को मेहनत करनी पड़ती है। - हम कैसे अलग ह…

सात सवाल : अर्जुन कपूर

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सात सवाल अर्जुन कपूर मोहित सूरी निर्देशित ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ में अर्जुन कपूर बिहारी युवक माधव झा का किरदार निभा रहे हैं। चेतन भगत के इसी नाम के अंग्रेजी उपन्‍यास पर आधारित इस फिल्‍म के लिए अर्जुन कपूर ने भाषा और आचार-व्‍यवहार पर मेहनत की। वे पटना भी गए। बिहारी मूल के व्‍यक्तियों के संपर्क में रहे। उन्‍होंने माधव झा को पर्दे पर उतारने की हर कोशिश की है। -बिहार के बारे में आप कितना जानते हैं? 0 इस फिल्‍म के पहले ऊपरी तौर पर ही जानता था। मैं इस फिल्‍म के पहले भी एक बार पटना जा चुका हूं। उसे देखा और महसूस किया है। मनोज बाजपेयी के साथ ‘तेवर’ के प्रचार के समय गया था। कह समता हूं कि मैं बिहार जा चुका हूं। - ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ के माधव झा की तैयारी में और क्‍या समझ बढ़ी? 0 बिहार के बारे में शेष भारत क्‍या सोचता है और असलियत दोनों में फर्क है। अब लगता है कि मेरे बिहारी दोस्‍तों पर क्‍या बीतती होगी,जब कुछ सामान्‍य टिप्‍पणियां धारणा के आधार पर कर दी जाती हैं। वे बातें चुभती होंगी। माधव झा को भी झेलना पड़ता है फिल्‍म में। -ऐसा क्‍यों होता है? 0 हम सभी का माइंडसेट बन जाता है। हम सोच लेते हैं कि अच्‍छा फलां स्‍…