Search This Blog

Showing posts with label करण देओल की लॉचिंग. Show all posts
Showing posts with label करण देओल की लॉचिंग. Show all posts

Tuesday, September 10, 2019

सिनेमालोक : करण देओल की लॉचिंग


सिनेमालोक
करण देओल की लॉचिंग
-अजय ब्रह्मात्मज
अगले हफ्ते सनी देओल के बेटे और धर्मेंद्र के पोते करण देओल की पहली फिल्म ‘पल पल दिल के पास’ रिलीज होगी. इसका निर्माण और निर्देशन खुद सनी देओल ने किया है. शुरू में खबर आई थी कि इम्तियाज अली या राहुल रवैल इस फिल्म का निर्देशन करेंगे, लेकिन सनी देओल ने बेटे की लॉचिंग की कमान किसी और को नहीं सौंपी. जब उनसे पूछा गया कि किसी और को निर्देशन की जिम्मेदारी क्यों नहीं दी तो उनका जवाब था कि मैं खुद निर्देशक हूं. सच्ची, इस तथ्य से कौन इंकार कर सकता है, लेकिन यह बात तो जहन में आती है कि सनी देओल निर्देशित फिल्मों का क्या हश्र हु? पुत्रमोह में सब कुछ अपनी मुट्ठी में रखना हो तो कोई भी कारण, प्रश्न या तर्क समझ में नहीं आएगा,
इस फिल्म के ट्रेलर और गानों से यह एहसास तो हो रहा है कि ‘पल पल दिल के पास’ खूबसूरत लोकेशन पर बनी फिल्म है’ इस फिल्म की शूटिंग के लिए पूरी यूनिट ने दुर्गम घाटियों की चढ़ाई की. करण देवल और सहर बांबा ने मुश्किल स्टंट किए. फिल्म एक्शन और रोमांस से भरपूर है. कोशिश है कि दादा धर्मेंद्र और पिता सनी देओल की अभिनय छटा और छवि के साथ करण देओल को पेश किया जाए. सनी देओल ने नयनाभिरामी लोकेशन के साथ दिल दहला देने वाले एक्शन को जोड़ा है. यह फिल्म दादा-पिता के भाव और अंदाज को साथ लेकर चलती है. ट्रेलर में ही दिख रहा है कि करण देओल को भी पिता की तरह चीखने के दृश्य दिए गए हैं. फिलहाल ढाई किलो का मुक्का तो नहीं दिख रहा है,लेकिन मुक्का  है और उसकी गूंज भी सुनाई पड़ती है.
‘पल पल दिल के पास’ टाइटल धर्मेंद्र की फिल्म ‘ब्लैकमेल’ के गीत से लिया गया है’ इस गीत में राखी और धर्मेंद्र के रोमांटिक खयालों के दृश्य में अद्भुत आकर्षण है’ पहाड़ी लोकेशन पर शूट किए गए इस गीत में धर्मेंद्र के प्यार को शब्द दिए गए हैं. उसी रोमांस को दोहराने और धर्मेंद्र के साथ जोड़ने के लिए फिल्म का टाइटल चुना गया. इस फिल्म का नाम सुनते ही धर्मेंद्र का ध्यान आता है. उनके साथ करण देओल का रिश्ता उनकी लोकप्रियता को ताजा कर देता है. सनी देओल ने सोच-समझकर ही यह रोमांटिक टाइटल चुना है. वे अपने पिता से मिली विरासत से बेटे को रुपहले पर्दे पर जोड़ रहे हैं. करण देओल के प्रति जो भी उत्साह बनाया वह सिर्फ और सिर्फ धर्मेंद्र और सनी देओल की वजह से है. रिलीज होने के बाद पता चलेगा कि यह फिल्म दर्शकों के दिल के पास टिकती है या नहीं?
हिंदी फिल्मों में नेपोटिज्म की चर्चा जोरों पर है. यही सच्चाई है कि स्टार और डायरेक्टर अपने बच्चों के लिए प्लेटफार्म बनाते रहेंगे. सामंती समाज के हिंदी दर्शक दादा और पिता से बेटे को सहज ही जोड़ लेते हैं. हिंदी फिल्मों में आए और आ रहे आउटसाइडर ईर्ष्या करते रहें और भिन्नाते रहें. नेपोटिज्म का सिलसिला चलता रहेगा. आने वाले सालों में और भी स्टारकिड लॉन्च किए जाएंगे. उनकी लॉचिंग को वाजिब ठहराने की कोशिश भी की जाएगी. इस सिलसिले और तरकीब के बावजूद हमें या नहीं भूलना चाहिए कि दर्शक आखिरकार खुद फैसला लेते हैं और चुनते हैं. उन्होंने सनी देओल को प्यार दिया लेकिन बॉबी देओल को भूल गए. कपूर खानदान और सलमान खान के परिवार में भी हम इसके उदाहरण देख सकते हैं. प्रचार के बाद भी चलता वही है जिसमें सार हो. दर्शक थोथी प्रतिभाओं को उड़ा देते हैं.
‘पल पल दिल के पास’ में सनी देओल ने और भी पुरानी तरकीब इस्तेमाल की है. गौर किया होगा कि फिल्म के मुख्य किरदारों के नाम करण और सहर ही हैं. उनके सरनेम भले ही सिंह और सेठी कर दिए गए हों. ‘बेताब’ में सनी देओल का नाम सनी ही रखा गया था. किरदार को कलाकार का नाम देने के पीछे यही यत्न रहता है कि नए कलाकार का नाम दर्शकों को बार-बार सुनाया और बताया जाए. करण देओल और सहर बांबा अभी पूरे आत्मविश्वास में नहीं दिख रहे हैं. विभिन्न चैनलों पर आये इंटरव्यू में वे दोनों सनी देओल के साथ ही दिखे. हर इंटरव्यू में सनी देओल ही बोलते रहे. करण देओल ने कम बातें कीं और सहर बांबा ने तो और भी कम. ना तो पत्रकारों के पास करण देओल के लिए नए सवाल थे और न करण के जवाबों में कोई नवीनता सुनाई पड़ी.
अब देखना है कि अगले हफ्ते दर्शक क्या फैसला सुना रहे हैं?