Posts

Showing posts with the label डार्लिंग

साधारण फिल्मों की फेहरिस्त में डार्लिग

-अजय ब्रह्मात्मज
राम गोपाल वर्मा की डार्लिग उन दर्शकों के लिए सबक है जो विवाहेतर रिश्तों में फंसे हैं। आपकी प्रेमिका भूत बनकर भी आपका पीछा कर सकती है। सो, बेहतर है कि अभी से संभल जाएं।
बीवी और वो के साथ डबल शिफ्ट कर रहे आदित्य सोमण (फरदीन खान) को लगता है कि वह डबल मजे ले रहा है। एक दिन अचानक पता लगता है कि वो गर्भवती हो गई है। उनमें हाथापाई होती है और वो को ऐसी चोट लगती है कि वह मर जाती है। किस्सा यहीं से शुरू होता है। वो यानी कि गीता मेनन (एषा देओल) बदले की भावना से आदित्य की जिंदगी और घर में प्रवेश करती है। भेद खुलने तक स्थितियां काफी उलझ चुकी होती हैं। बीवी अश्विनी की मौत हो जाती है। गीता की भटकती आत्मा अपने प्रेमी आदित्य के साथ रहने के लिए अश्विनी (ईशा कोप्पिकर) के शरीर में प्रवेश कर जाती है।
वहम, अंधविश्वास और अतार्किक घटनाओं की यह कहानी किसी भी स्तर पर नहीं छूती। राम गोपाल वर्मा की कमजोर और साधारण फिल्मों की फेहरिस्त में डार्लिग भी शामिल की जाएगी। सोच के स्तर पर इस दिवालियापन को लेकर क्या कहें?

शुक्रवार ७ सितंबर

चवन्नी ने तय किया है कि आज से हर शुक्रवार को वह मुम्बई की फिल्म इंडस्ट्री में चल रही चर्चाओं और बदलती हवा के रुख़ की जानकारी आप को देगा.कल देर रात चवन्नी 'धमाल' के प्रीमियर से लौटा.मुम्बई के अंधेरी उपनगर के पश्चिमी इलाक़े में कई मल्टीप्लेक्स आ गए हैं.वहीँ फिल्मों के प्रीमियर हुआ करते हैं.वैसे प्रीमियर तो अब नाम भर ही रह गया है.ना वो पहले जैसा ताम-झाम बच गया है और ना लाव -लश्कर राग गया है.प्रीमियर पैसे बचाने का साधन बन गया है।खैर,कल रात 'धमाल' के प्रीमियर में संजय दत्त आये थे.एक तरह से कहें तो उनके जमानत पर छूटने की खुशी में ही इस प्रीमियर का आयोजन हुआ था.अगर आप को याद हो तो उनकी गिरफ्तारी के समय कई कार्यक्रम रद्द कर दिए गए थे.संजय दत्त आये थे.उन्होने काली बंडी पहन रखी थी.आप ने देखा होगा कि वह झूम कर चलते हैं.कल रात उनकी चाल में पुराना जोश नही था.कानून,जेल और सजा से लोग टूट जाते हैं.संजय के साथ जो हुआ और हो रह है उस पर फिर कभी.'धमाल' चवन्नी के ख़्याल से पहली हिंदी फिल्म है,जिस में कोई हीरोइन नही है.इसके पोस्टर पर भी मर्द ही मर्द हैं.है ना अजूबी बात.लेकिन इसका मत…