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सिनेमालोक : कामयाब संजय मिश्रा

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सिनेमालोक कामयाब संजय मिश्रा अजय ब्रह्मात्मज जल्दी ही संजय मिश्रा अभिनीत 'कामयाब' रिलीज होगी.हार्दिक मेहता के निर्देशन में बनी इस फिल्म की चर्चा 2018 से हो रही है. इस फिल्म में संजय मिश्रा नायक सुधीर की भूमिका निभा रहे हैं. सुधीर ने 499 फिल्में कर ली हैं. अब वह 500वीं फिल्में करना चाहता है. सुधीर की इस महात्कावाकांक्षा का चित्रण करने में उसकी जिंदगी के पन्ने पलटते हैं. हम सुधीर के जरिए सिनेमा के उन कलाकारों को जान पाते हैं, जिन्हें एक्स्ट्रा कहा जाता है. 'कामयाब' एक एक्स्ट्रा की एक्स्ट्राऑर्डिनरी कहानी है. फिल्मों में बार-बार दिखने से ये परिचित चेहरे तो बन जाते हैं, लेकिन उनके बारे में हम कुछ नहीं जानते. दर्शकों की अधिक रूचि नहीं होती और मीडिया को लोकप्रिय सितारों से फुर्सत नहीं मिलती. इस फिल्म को शाह रुख खान की कंपनी रेड चिलीज पेश कर रही है और इसका निर्माण दृश्यम फिल्म्स ने किया है. संजय मिश्रा सुपरिचित चेहरा बन चुके हैं. उनके बारे में अलग से बताने की जरूरत नहीं होती. फिल्मों में उनकी मौजूदगी से दर्शकों के बीच खुशी की लहर दौड़ जाती है. मैंने तो देखा और लिखा है कि कमर्शियल…

सिनेमालोक : आरके स्टुडियो का संताप

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सिनेमा स्टुडियो का संताप -अजय ब्रह्मात्मज 69 की उम्र में मेरी चिता सज गई थी. उसके दोसालों के बाद मेरे वारिसों ने मुझे किसी और के हवाले कर दिया. इसके एवज में उन्हें कुछ पैसे मिल गए. देश और मुंबई शहर के एक बड़े बिल्डर ने मुझे खरीद लिया. अभी पिछले शनिवार यानी 15 फरवरी को उस बिल्डर ने एक विज्ञापन के जरिये मेरे बारे में आप सभी को बताया. मेरी सज-धज चल रही है. कायाकल्प हो गया है मेरा. कभी जहां राज कपूर,उनकी नायिकाएं, उनके दोस्तों और फिल्म बिरादरी के दूसरे सदस्यों के ठहाके गूंजा करते थे. बैठकी लगती थी. बोल लिखे जाते थे. धुनें सजती थीं. रात-रात भर शूटिंग होती थी. पार्टियाँ चलती थीं. फिल्मकारों के सपने साकार होते थे. जल्द ही वहां तीन-चार कमरों के आलीशान अपार्टमेंट रोशन हो जाएंगे. धड़कने वहां भी होंगी, लेकिन उनमें वे किस्से और कहकहे नहीं होंगे. आह नहीं होगी.वाह नहीं होगी. जी आपने सही समझा मैं आर के स्टुडियो हूँ. मैं अपने बारे में आप सभी को बताना चाहता हूं. मैं राज कपूर का ख्वाब था. पहली फिल्म के निर्माण और निर्देशन के समय ही आप सभी के राजू ने मेरे बारे में सोचा था. अपनी पीढ़ी का वह अकेला नायक था,ज…

सिनेमालोक : कोरियाई सिनेमा के 100वें साल में पैरासाइट का रिकॉर्ड

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सिनेमालोक कोरियाई सिनेमा के 100वें साल में पैरासाइट का रिकॉर्ड  -अजय ब्रह्मात्मज कल 52 में एकेडमी का अवार्ड का सीधा प्रसारण था. दुनिया के सबसे चर्चित और प्रतिष्ठित अवार्ड पर सभी फिल्मप्रेमियों की निगाहें लगी रहती हैं. एकेडमी अवार्ड मिलना गौरव की बात मानी जाती है. यह ऐसी पहचान है, जिसे विजेता तमगे की तरह पहनते और घर दफ्तर में सजाते हैं. इस अवार्ड के नामांकन सूची में आ जाना भी गुणवत्ता की कसौटी पर खरा उतरना माना जाता है. मुख्य रूप से अमेरिका में बनी अंग्रेजी फ़िल्में ही पुरस्कारों की होड़ में रहती हैं. गैरअंग्रेज़ी फिल्मों के लिए विदेशी भाषा फिल्म की श्रेणी है. हॉलीवुड के नाम पर दुनिया भर में वितरित हो रही मसालेदार फिल्मों से अलग सिनेमाई गुणों से भरपूर ऐसी फिल्मों का स्वाद सुकून, शांति और विरेचन देता है. फिल्मप्रेमी एकेडमी अवार्ड से सम्मानित फिल्मों के फेस्टिवल करते हैं. टीवी चैनलों पर इनके विशेष प्रसारण होते हैं. ग्लोबल दुनिया में भारत के फिल्मप्रेमियों की जिज्ञासा भी ऑस्कर से जुड़ गई हैं. इस साल कोरियाई फिल्म ‘पैरासाइट’ को चार ऑस्कर मिले हैं. सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश…

सिनेमालोक : दिखता नहीं है सच

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सिनेमालोक दिखता नहीं है सच -अजय ब्रह्मात्मज हिंदी फिल्मों की राजधानी मुंबई से निकलने और देश के सुदूर शहरों के दर्शकों पाठकों से मिलने के रोचक अनुभव होते हैं. उनके सवाल जिज्ञासाओं अनुभवों को सुनना और समझना मजेदार होता है. जानकारी मिलती है कि वास्तव में दर्शक क्या देख, सोच और समझ रहे हैं? हिंदी फिल्मों की जानकारियां मुंबई में गढ़ी जाती हैं.मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारियां दर्शकों तक पहुंचती हैं और देखी पढ़ी-जाती हैं. उनसे ही सितारों के बारे में दर्शकों के धारणाएं बनती और बिगड़ती हैं. पिछले दिनों गोरखपुर लिटरेरी फेस्ट में जाने का मौका मिला..एक छोटे से इंटरएक्टिव सेशन में फिल्म इंडस्ट्री की कार्यशैली और उन धारणाओं पर बातें हुईं. कुछ लोग मानते हैं कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री और उसके सितारों के बारे में कायम रहस्य सोशल मीडिया और मीडिया के विस्फोट के दौर में टूटा है. फिल्मप्रेमी दर्शक और पाठक अपने सितारों के बारे में ज्यादा जानने लगे हैं. सच कहूं तो यह भ्रम है कि हम मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए सितारों के जीवन में झांकने लगे हैं. वास्तव में ऐसा नहीं है. एयरपोर्ट …

सिनेमालोक : छपाक बनाम तान्हाजी

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सिनेमालोक छपाक बनाम तान्हाजी -अजय ब्रह्मात्मज एक ही दिन रिलीज हुई फिल्मों की तुलना पहले भी होती रही है. खासकर पहले उनकी टकराहट के असर की चर्चा होती है और उसके बाद बताया जाता है कि किसे कितना नुकसान हुआ? उनके कलेक्शन के आधार पर ये चर्चाएं और तुलनाएं होती है. देश में सिनेमाघरों और स्क्रीन की सीमित संख्या की वजह से साल के अनेक शुक्रवारों को ऐसी हलचल और टकराहट हो जाती है. पिछले हफ्ते 10 जनवरी को रिलीज हुई ‘छपाक’ और ‘तान्हाजी’ को लेकर भी तुलना चल रही है. अनेक स्वयंभू विश्लेषक,पंडित और टीकाकार निकल आए हैं. वे अपने हिसाब से समझा रहे हैं. व्याख्या कर रहे हैं. इस बार की तुलना में सिर्फ कलेक्शन के प्रमुख मुद्दा नहीं है. कुछ और भी बातें हो रही है. दो धड़े बन गए हैं. एक धड़ा ‘छपाक’ के विरोध में सक्रिय है और दूसरा धड़ा ‘तान्हाजी’ के समर्थन में है. विरोध का धड़ा नए किस्म का है. इस धड़े ने तय कर लिया है कि उन्हें न सिर्फ ‘छपाक’ का बहिष्कार करना है, बल्कि तमाम तर्क जुटा कर उसे फ्लॉप भी साबित करना है. यह धड़ा वास्तव में दीपिका पादुकोण को सबक सिखाना चाहता है और इसी बहाने तमाम फिल्म कलाकारों को संदेश भी द…

सिनेमालोक : भाए न रंग सांवला

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सिनेमालोक भाए न रंग सांवला -अजय ब्रह्मात्मज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सांवले रंग के प्रति गहरी अरुचि और एलर्जी है .शुरू से ही फिल्म के हीरो-हीरोइन और अन्य चरित्रों के लिए गौर वर्ण के कलाकारों की मांग रही है. हिंदी सिनेमा के विकास के साथ राजा रवि वर्मा द्वारा चित्रित आकृतियां और रूपाकार ही फिल्मों के किरदारों के आदर्श बने. राजा रवि वर्मा ने जब देवी-देवताओं के काल्पनिक पोर्ट्रेट तैयार तो उनके रंग, कद, काठी और एपीयरेंस पर खास ध्यान दिया. गौर वर्ण, सुतवां नाक,उन्नत ललाट,नीली-भूरी आंखें, घनी-टेढ़ी भौहें में और सीधे लहराते बाल... बाद में फिल्मों में भी उन्हें अपनाया गया. धीरे-धीरे अघोषित रुढ़ि बन गयी. खास कर हीरो-हीरोइन के लिए गौर वर्ण अनिवार्य हो गया. हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय कलाकारों में शायद ही कोई श्याम वर्ण का मिले. दो-चारअपवाद हो सकते हैं. मनोरंजन की दुनिया में गौर वर्ण के दबाव का सबसे बड़ा उदाहरण माइकल जैक्सन हैं. लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचने के बाद उन्हें गोरे होने की धुन चढ़ी. अमेरिका में ‘अश्वेत’ होने का खास राजनीतिक निहितार्थ है/ तमाम मुश्किलों और अवरोधों को पार कर माइकल जैकसन ने श…

सिनेमालोक : विदा 2019

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सिनेमालोक विदा 2019 अजय ब्रह्मात्मज 2019 का आखिरी दिन है आज. पिछले हफ्ते रिलीज हुई राज मेहता की फिल्म ‘गुड न्यूज़’ हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को कामयाबी का शुभ समाचार दे गई. अक्षय कुमार. करीना कपूर खान. दिलजीत दोसांझ और कियारा आडवाणी की यह फिल्म पहले वीकेंड में 60 करोड़ से अधिक का कलेक्शन कर चुकी है. जाहिर सी बात है कि अक्षय कुमार की फिल्म 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी.’केसरी’, ‘मिशन मंगल’. ‘हाउसफुल 4’ और ‘गुड न्यूज़’ की भरपूर कमाई से अक्षय कुमार सफल सितारों की अगली कतार में सबसे आगे खड़े हैं. उन्हें रितिक रोशन की वाजिब मुकाबला दे रहे हैं. ‘सुपर 30’ और ‘वॉर’ की कामयाबी ने उन्हें अगली कतार में ला दिया है. कुछ और सितारे भी जगमगाते रहे कुछ की चमक बढ़ी और कुछ की धीमी पड़ी. बकामयाबी के दूसरे छोर पर आयुष्मान खुराना भी तीन फिल्मों की सफलता के साथ मुस्कुरा रहे हैं. इन दोनों छोरों के बीच कार्तिक आर्यन हैं, जो धीमे से अपनी धमक बढ़ाने में आगे रहे. कामयाब रणवीर सिंह भी रहे. अभिनेत्रियों की बात करें तो तापसी पन्नू और भूमि पेडणेकर के लिए 2019 विविधता लेकर आया. दोनों अभिनेत्रियों ने बढ़त हासिल की और जाहिर …

सिनेमालोक : फाल्के पुरस्कार और अमिताभ बच्चन

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सिनेमालोक फाल्के पुरस्कार और अमिताभ बच्चन -अजय ब्रह्मात्मज कल दिल्ली में 2018 के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार वितरित किए गए. विभिन्न श्रेणियों में देश की सभी भाषाओं की प्रतिभाओं को सम्मानित करने का यह समारोह पुरस्कार प्रतिष्ठा और प्रभाव के लिहाज से देश में सर्वश्रेष्ठ है. इन दिनों अनेक मीडिया घरानों और संस्थानों द्वारा हिंदी समेत तमाम भाषाओं में फिल्म पुरस्कार दिए जा रहे हैं. इन पुरस्कारों की भीड़ में यह अकेला अखिल भारतीय फिल्म पुरस्कार है, जिसमें देश की सभी भाषाओं के बीच से प्रतिभाएं चुनी जाती हैं. निश्चित ही इस पुरस्कार का विशेष महत्व है. फीचरफिल्म, गैरफीचर फिल्म और फिल्म लेखन की तीन मुख्य श्रेणियों में ये पुरस्कार दिए जाते हैं. राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के साथ ही दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भी दिया जाता है. यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा के विकास और संवर्धन में अप्रतिम योगदान के लिए किसी एक फिल्मी व्यक्तित्व को सौंपा जाता है. इस साल यह पुरस्कार अमिताभ बच्चन को दिया गया है पुरस्कार की पूर्व संध्या को अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर अपने प्रशंसकों को सूचना दी... वह बुखार में हैं. उन्हें यात्रा करने से म…

सिनेमालोक : कार्तिक आर्यन की बढ़ी लोकप्रियता

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सिनेमालोक कार्तिक आर्यन की बढ़ी लोकप्रियता -अजय ब्रह्मात्मज मुदस्सर अजीज की ‘पति पत्नी और वो’ अभी तक सिनेमाघरों में चल रही है। इस फिल्म की कामयाबी से कार्तिक आर्यन की लोकप्रियता में बढ़ोतरी हुई है। ट्रेड पंडितों की राय में कार्तिक आर्यन भरोसेमंद युवा स्टार के तौर पर उभरे हैं। उनकी लोकप्रियता नई पीढ़ी के दूसरे अभिनेताओं से अलग और विशेष है। पिछले दो-तीन सालों में कार्तिक आर्यन, राजकुमार राव, आयुष्मान खुराना और विकी कौशल ने अपनी फिल्मों से दमदार दस्तक दी है। इन चारों में कार्तिक आर्यन को शेष तीन की तरह विषय प्रधान फिल्में नहीं मिलीं। बतौर एक्टर उन्हें बड़ी सराहना भी नहीं मिली, बल्कि कुछ समीक्षकों की राय में कार्तिक आर्यन को अभी समर्थ अभिनेता की पहचान बनाने में थोड़ा वक्त और लगेगा। समीक्षकों की उपेक्षा और आलोचना के बीच कार्तिक आर्यन ने दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की। फिल्म दर फिल्म उनकी स्थिति मजबूत होती गई है। इम्तियाज अली की उनकी फिल्म पूरी हो चुकी है, जो अगले साल फरवरी में रिलीज होगी। कार्तिक आर्यन 2011 शुरुआत की। ‘प्यार का पंचनामा’ उनकी पहली फिल्म थी। इस फिल्म के बाद उन्हें ‘आकाशवाण…

सिनेमालोक : हिंदी फिल्मों में पंजाबी गाने

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सिनेमालोक हिंदी फिल्मों में पंजाबी गाने -अजय ब्रह्मात्मज फिल्मों की कहानियां हिंदी प्रदेशों में जा रही हैं. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार के साथ ही उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की कहानियां हिंदी फिल्मों में आने लगी हैं. हिंदी फिल्मों का यह शिफ्ट नया और सराहनीय है. लंबे समय तक हिंदी फिल्मों ने पंजाब की सैर की. पंजाब आज भी हिंदी फिल्मों में आ रहा है, लेकिन अब वह यश चोपड़ा वाला पंजाब नहीं रह गया है. युवा फिल्मकार किसी फिल्म में उनसे आगे तो किसी फिल्म में उनसे पीछे दिखाई पड़ते हैं. सच्ची और सामाजिक कहानियां भी बीच-बीच में आ जाती हैं. गौर करें तो हिंदी फिल्मों में पंजाब का प्रभाव रच-बस गया है. फिल्म कलाकार पंजाब से आते हैं. फिल्मों के किरदारों के सरनेम पंजाबी होते हैं. पंजाबी रीति-रिवाज और संगीत भी हिंदी फिल्मों में पसर चुका है. किसी समय यह नवीनता बड़ा आकर्षण थी. अब इसकी अधिकता विकर्षण पैदा कर रही है. हिंदी प्रदेशों की कहानियों में जब अचानक पंजाबी बोल के गाने सुनाई पड़ते हैं तो खटका लगता है. कई फिल्मों में खांटी पटना, लखनऊ, कानपुर, भोपाल और इलाहाबाद के किरदार पंजाबी गीत गाते सुनाई…

सिनेमालोक : सेंसर नहीं होगी वेब सीरीज

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सिनेमालोक सेंसर नहीं होगी वेब सीरीज -अजय ब्रह्मात्मज ऑनलाइन स्ट्रीमिंग की तकनीक के प्रसार और ओटीटी प्लेटफॉर्म के पॉपुलर होने के साथ नैतिकता, राष्ट्रीयता और शुद्धता के पहरुए जाग गए हैं. लगातार सरकार पर दबाव डाला जा रहा है कि वेब सीरीजऔर दूसरे मनोरंजक स्ट्रीमिंग कंटेंट की निगरानी की जाए. उनका आग्रह है कि वेब सीरीज में गाली-गलौज और अश्लीलता बढ़ती जा रही है. राष्ट्रीय हितों का ख्याल नहीं रखा जा रहा है. दक्षिणपंथी सोच के स्तंभकार और लेखक-पत्रकार चाहते हैं कि वेब सीरीज को भी सेंसरशिप के घेरे में लाया जाए. उनकी आपत्ति है कि कई बार इन वेब सीरीज में राष्ट्र विरोधी बातें होती है. उनकी बातों का विश्लेषण करें तो पाएंगे कि वे सत्ताधारी पार्टी की सोच की विरोधी टिप्पणी और विचार पर पाबंदी चाहते हैं. वे नहीं चाहते कि सरकार विरोधी बातों पर आधारित संवाद हो. मामला कोर्ट में भी गया है. कोर्ट ने भी पाबंदी या सेंसरशिप से सहमति नहीं दिखाई. पिछले दिनों चल रहे विचार-विमर्श में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चाएं हुईं. शुद्धतावादियों के आग्रह को स्वीकार नहीं किया गया. पिछले दिनों एक ज़िम्मेदार सरकारी अधिकारी ने बताया कि फि…

सिनेमालोक : आ रहीं ऐतिहासिक फिल्में

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सिनेमालोक आ रहीं ऐतिहासिक फिल्में -अजय ब्रह्मात्मज पिछले शुक्रवार को यशराज फिल्म्स की डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी के निर्देशन में बन रही ‘पृथ्वीराज’ की पूजा के साथ विधिवत शुरुआत हो गई. इस फिल्म में अक्षय कुमार और मानुषी छिल्लर मुख्य भूमिकायें निभा रहे हैं. उनके साथ संजय दत्त, आशुतोष राणा, मानव विज और अन्य कलाकार हैं. डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी को हम सभी टीवी धारावाहिक ‘चाणक्य’ के उल्लेखनीय निर्देशन के लिए जानते हैं. उन्होंने अभी तक ‘पिंजर’, ‘जेड प्लस’ और ‘मोहल्ला अस्सी’ फिल्मों के निर्देशन से अपनी एक पहचान बना ली है. खासकर भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी उनकी फिल्म ‘पिंजर’ की विशेष चर्चा होती है. यह फिल्म अमृता प्रीतम के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है. डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी की पहले की तीनों फिल्में किसी न किसी सहितियिक कृति पर आधारित है.’ पृथ्वीराज’ के लिए भी उन्होंने चंदबरदाई की ‘पृथ्वीराज रासो’ से कथासूत्र लिए हैं और फिल्म के रूप में उनका विस्तार किया है. अगर ‘पृथ्वीराज’ योजना के मुताबिक बन गई तो ऐतिहासिक फिल्मों के संदर्भ में यह नए मानक मानक गढ़ेगी. वास्तव में डॉ. चंद्रप्रक…