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Showing posts from July, 2018

सिनेमालोक जान्हवी और ईशान को लेकरT करण जौहर परेशान

सिनेमालोक जान्हवी और ईशान को ्लेकर करण जौहर परेशान - अजय ब्रह्मात्मज शुक्रवार 19 जुलाई से आज तक सोशल मीडिया पर ‘धड़क’ के बारे में जितना लिखा गया है,उतना हाल-फिलहाल में किसी और फ़िल्म के लिए नहीं लिखा गया। कारण जौहर ने लीड ले रखा है। सिर्फ उनके ट्वीट हैंडल पर नज़र डालें तो पाएंगे कि चार दिनों में उन्होंने सबसे ज्यादा ट्वीट किए। उन्होंने फिल्म की छोटी और संक्षिप्त तारीफों को भी रिट्वीट कर बाद और विस्तृत बना दिया है। यूँ लग रहा है कि फिलहाल ‘धड़क’ के अलावा मनोरंजन जगत में कुछ नहीं हो रहा है। फ़िल्म पत्रकार,समीक्षक,डेस्क राइटर,कंटेंट क्रिएटर और फ़िल्म पंडित सभी तारीफ करने और जानकारी देने में एक-दूसरे को धकिया रहे हैं।कारण उनकी धकमपेल के मज़े ले रहे है। वे खुश और परेशान है। खुश इसलिए हैं कि फ़िल्म ध्येय और आशा के अनुरूप कमाई कर रही है। परेशान इसलिए हैं कि फ़िल्म की कमाई बढ़े। पहली ही फ़िल्म से जान्हवी और ईशान स्थापित हो जाएं।
करण जौहर कुशल संरक्षक और बेशर्म प्रचारक हैं। वे अपने कलाकारों से बेइंतहा प्यार करते हैं। उनका जम कर प्रचार करते हैं। उनकी आक्रामकता प्रभावित करती है। ‘धड़क’ और जान्हवी व ईशान का ही…

कास्टिंग : कांटेक्ट,कांटेस्ट,काउच,कम्प्रोमाइज़ और क्राउन

फिल्म लॉन्ड्री
कास्टिंग : कांटेक्ट,कांटेस्ट,काउच,कम्प्रोमाइज़ और क्राउन
-अजय ब्रह्मात्मज
प्रसंग एक - 2015 में 20वीं सदी के मशहूर डायरेक्टर ए आर कारदार के दफ्तर की कुछ तस्वीरें अचानक वायरल हुई थीं.सभी ने खूब चुस्की लेकर उसे ‘कास्टिंग काउच' से जोड़ा था.सच्चाई यह थी कि कारदार 1951 में अपनी नयी फिल्म ‘दिल-ए-नादां’ के लिए दो लड़कियों का चुनाव कर रहे थे.इस फिल्म के लिए आखिरकार पीस कँवल और चाँद उस्मानी चुनी गयी थीं.लाइफ मैगज़ीन के फोटोग्राफर ने ये तस्वीरें कारदार साहेब के दफ्तर में उतारी थीं.मुमकिन है,उन दिनों किरदारों के मुआफिक कलाकारों के चुनाव के लिए ऑडिशन का यही तरीका अपनाया जाता हो. ए आर कारदार लाहौर के एक्टर और फिल्मकार थे.जो निजी कारणों से विभाजन के पहले ही लाहौर से कोलकाता और फिर मुंबई आ गए थे. प्रसंग दो - मधुर भंडारकर की फिल्म ‘पेज 3’ में महानगरों के पेज 3 कल्चर को एक्स्पोज करने के लिए फिल्म और फैशन इंडस्ट्री के कुछ अंदरूनी सीन रखे गए थे.एक खास सीन में अंग्रेजी की फिल्म जर्नलिस्ट माधवी (कोंकणा सेन) फिल्म स्टार रोहित(विक्रम सलूजा) से स्ट्रगलिंग एक्टर गायत्री (तारा शर्मा) को मिलवाती है औ…

दरअसल : ‘धड़क’ में ‘सैराट’ की धड़कन

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सिनेमालोक : कहाँ गए सिनेमाघर?

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सिनेमालोक कहाँ गए सिनेमाघर? -अजय ब्रह्मात्मज
मधुबनी के जिस होटल में ठहरा हूं,उसके मैनेजर से मैंने पूछा कि क्या उन्होंने संजू देखी है? उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,'जी देखी है।पिछले हफ्ते जमशेदपुर गया था तो वहां प्रकाश झा के नए मल्टीप्लेक्स में मैंने राजकुमार हिरानी की 'संजू' देखी।' इस सामान्य से जवाब से मैं थोड़ा हैरान हुआ। मेरा अगला सवाल था, 'क्यों,मधुबनी में देखने का मौका नहीं मिला या यहां यह फ़िल्म नहीं लगी है?' उनका जवाब था, 'फिल्म लगने के लिए सिनेमाघर चाहिए। मधुबनी का आखिरी सिनेमाघर शंकर टॉकीज अभी पिछले दिनों बंद हो गया। कभी इस शहर में तीन सिनेमाघर थे। सभी में भीड़ उमड़ती थी। अभी तीनों सिनेमाघर बंद पड़े हैं।सुना है जल्दी ही एक मल्टीप्लेक्स बनने वाला है।' 
मधुबनी शहर में चार मॉल आ गए हैं। इनमें पॉपुलर ब्रांड के कपड़े और दूसरे उपभोक्ता सामान मिलते हैं। मैंने शहर के कुछ युवकों से बात की कि आखिर वे फिल्में कैसे देखते हैं? उनसे पता चला कि शहर के सिनेमा प्रेमियों का सहारा स्मार्टफोन है। कोई भी फिल्म रिलीज हो। वह गैरकानूनी तरीके से बाजार में आ ही जाती है।…

फिल्म समीक्षा : सूरमा

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फिल्म समीक्षा सूरमा प्रेरक ज़िन्दगी और फिल्म -अजय ब्रह्मात्मज
‘सूरमा’ अर्जुन अवार्ड से सम्मानित हॉकी खिलाडी संदीप सिंह के जीवन पर आधारित शाद अली निर्देशित फिल्म है. इसमें दिलजीत सिंह ने संदीप सिंह की भावपूर्ण और ओजपूर्ण भूमिका निभाई है. संदीप सिंह हॉकी के नामी खिलाड़ी रहे हैं.यह फिल्म उनकी जिंदगी और खेत न्याय उतार चढ़ाव को पूरी संजीदगी के साथ दिखाती हैं खिलाड़ियों पर बन रहे बायोपिक का भी धीरे-धीरे एक फार्मूला बनता जा रहा है. यह फिल्म भी उस फार्मूले से अंशतः प्रभावित है.
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद गांव के गुरुचरण सिंह औरदलजीत कौर के छोटे बेटे संदीप सिंह स्थानीय कोच से आतंकित होकर हॉकी खेलना छोड़ देता है. उसका भाई बिक्रमजीत हॉकी का अभ्यास जारी रखता है और राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनता है.इस बीच संदीप सिंह अपने ताऊ के खेतों में चिड़िया भगाने के लिए हॉकी स्टिक और गेंद का इस्तेमाल करता है अनजाने में वह बहुत साधा हुआ फ्लिकर बन जाता है.पड़ोस की हरप्रीत उसे बहुत पसंद है. वह भी हॉकी खेलती है. संदीप उसके खेल से प्रभावित होकर और उसे लुभाने के लिए हॉकी खेलना शुरू करता है.
शुरू में हॉकी की तर…