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दरअसल : म्यूजिकल फिल्म पंचम अनमिक्स्ड

-अजय ब्रह्मात्‍मज
हिंदी फिल्मों की पत्रकारिता ही नहीं, इतिहास, शोध और विश्लेषण में भी हम ज्यादातर हीरो-हीरोइनों पर ही फोकस करते हैं। कभी-कभी ही ऐसी कोशिश होती है, जिसमें निर्देशक और गायकों पर ध्यान दिया जाता है। इनके बाहर हम जा ही नहीं पाते। ऐसा माना जाता है कि पाठकों की रुचि तकनीकी विषय और तकनीशियनों में नहीं है। वे सिर्फ अपने स्टारों के बारे में ही पढ़ना चाहते हैं।इस माहौल में ब्रह्मानंद सिंह की अपारंपरिक कोशिश सराहनीय है। उन्होंने आर डी बर्मन पर पंचम अनमिक्स्ड नाम की फिल्म बनाई है। लगभग दो घंटे की इस फिल्म में ब्रह्मानंद हमें आर डी बर्मन के सुरीले जादुई संसार में ले जाते हैं। हम संगीतकार आर डी बर्मन से परिचित होते हैं। उनके समकालीन गीतकार, संगीतकार, गायक और संगीतज्ञों की बातचीत और नजरिए को एक सोच के साथ संपादित कर ब्रह्मानंद सिंह ने इतनी सटीक फिल्म बनाई है कि हम आर डी बर्मन यानी पंचम दा की सांगीतिक प्रतिभा को समझ पाते हैं। यह फिल्म दूसरे वृत्तचित्रों की तरह श्रेष्ठ संगीतकार की रचनाओं का सामान्य आकलन भर नहीं करती। हम उनके सहकर्मी और शार्गिदों के सौजन्य से उनके संगीत की बारीकियों को …