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रीमा कागती से अजय ब्रह्मात्‍मज की बातचीत

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-अजय ब्रह्मात्मज

- फिल्म इंडस्ट्री में पहली फिल्म थोड़ी आसानी से मिल जाती है। दिक्कत दूसरी फिल्म में होती है। क्योंकि पहले के प्रदर्शन के आधार पर सारी चीजें तय होती है। आपकी दूसरी फिल्म ‘तलाश’ है, जो हर लिहाज से बड़ी फिल्म है। कैसे मुमकिन हुआ यह?
0 मेरी पहली फिल्म ‘हनीमून ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड’ छोटी और खास फिल्म थी। उसे सीमित सफलता मिली थी। वह पसंद भी की गई थी। ऐसा नहीं था कि उसके बाद मैंने किसी बड़ी फिल्म की प्लानिंग की। दूसरी फिल्म की मुश्किलों के बारे में आपकी राय सही है, लेकिन कई बार उल्टा भी होता है। इसी प्रोडक्शन में जोया अख्तर पहली फिल्म बनाने में सालों लग गए, लेकिन दूसरी फिल्म फटाफट बन  गई। मुझे पहली फिल्म में कोई मुश्किल नहीं हुई। ‘तलाश’ को फ्लोर पर लाने में समय लग गया।
- क्या ‘तलाश’ की प्लानिंग में शुरू से आमिर खान थे?
0 जोया के साथ जब हमने यह फिल्म लिखनी शुरू की तो आमिर खान ही हमारे दिमाग थे। स्क्रिप्ट तैयार होने पर रितेश ने आमिर खान को फोन किया तो उन्होंने इसे सुनने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अभी मैं ‘गजनी’ कर रहा हूं। उसके बाद एक छोटी फिल्म ‘धोबी घाट’ करूंगा। सच तो …

फिल्‍म समीक्षा : तलाश

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-अजय ब्रह्मात्‍मज लगभग तीन सालों के बाद बड़े पर्दे पर लौटे आमिर खान 'तलाश' से अपने दर्शकों और प्रशंसकों को नए ढंग से रिझाते हैं। 'तलाश' है हिंदी सिनेमा ही, लेकिन रीमा कागती और आमिर खान ने उसे अपडेट कर दिया है। सस्पेंस के घिसे-पिटे फार्मेट को छोड़ दिया है और बड़े ही चुस्त तरीके से नए तत्व जोड़ दिए हैं। छल, प्रपंच, हत्या, दुर्घटना और बदले की यह कहानी अपने अंतस में इमोशनल और सोशल है। रीमा कागती और जोया अख्तर ने संबंधों के चार गुच्छों को जोड़कर फिल्म का सस्पेंस रचा है। 'तलाश' मुंबई की कहानी है। शाम होने के साथ मुंबई की जिंदगी करवट लेती है। रीमा कागती ने अपने कैमरामैन मोहनन की मदद से बगैर शब्दों में रात की बांहों में अंगड़ाई लेती मुंबई को दिखाया है। आरंभ का विजुअल कोलाज परिवेश तैयार कर देता है। फिल्म एक दुर्घटना से शुरू होती है। मशहूर फिल्म स्टार ओंकार कपूर की गाड़ी का एक्सीडेंट हो जाता है। उनकी कार सीफेस रोड से सीधे समुद्र में चली गई है। मुंबई पुलिस के अन्वेषण अधिकारी सुर्जन सिंह शेखावत (आमिर खान) की तहकीकात आरंभ होती है। फिल्मसिटी से दुर्घटना स्थल के बी…