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Showing posts from May, 2020

सिनेमालोक : फिल्मकारों की बढ़ी चुनौतियाँ

सिनेमालोक फिल्मकारों की बढ़ी चुनौतियाँ -अजय ब्रह्मात्मज अगले महीने से विधिवत फिल्में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आनी शुरू हो जाएगी. 5 जून को अनुराग कश्यप निर्देशित ‘चोक्ड-पैसा बोलता है’ आएगी और उसके बाद 12 जून को शूजीत सरकार निर्देशित ‘गुलाबो सिताबो’ दिखेगी. इन दोनों फिल्मों के बाद अनु मेनन निर्देशित ‘शकुंतला देवी’ का नंबर है. स्पष्ट संकेत है कि फिल्म निर्माता नई फिल्मों के लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आने में हिचकना बंद कर रहे हैं. अभी तक फिल्में पहले सिनेमाघरों में रिलीज होती थीं. उसके बाद टीवी, सेटेलाइट और दूसरे प्रसारण और वितरण के लिए उनके अधिकार बेचे जाते थे. बड़ी फिल्मों को हमेशा से मुंहमांगी राशि मिलती रही है. बाकी छोटी और मझोली फिल्मों का भाव उनके बॉक्स ऑफिस परफॉर्मेंस के हिसाब से तय किया जाता था. इस प्रक्रिया में कई बार दर्शकों के बीच स्वीकृत और प्रशंसित छोटी फिल्मों को अच्छी कीमत मिल जाती थी और कभी-कभी बड़ी फिल्मों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था. ओटीटी प्लेटफॉर्म के चलन में आने के बाद बिजनेस के तौर-तरीके बदलेंगे. ‘न्यू नार्मल’ में फिल्मों के मूल्य तय करने का पैमाना बॉक्स ऑफिस नहीं रहेगा. ऐ…

सिनेमालोक : संभावना और आशंका दोनों सच हो गईं

सिनेमालोक  संभावना और आशंका दोनों सच हो गईं (कोरोना काल में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री) -अजय ब्रह्मात्मज संभावना और आशंका दोनों सच हो गयीं.. लॉकडाउन की सरकारी घोषणा से पहले ही देश के सिनेमाघर बंद होने लगे थे. सबसे पहले केरल, उसके बाद जम्मू और फिर दिल्ली के सिनेमाघरों के बंद होने के बाद तय हो गया था कि पूरे देश के सिनेमाघर देर-सवेर बंद होंगे. सिनेमाघर दर्शकों और फिल्मों के बीच का वह प्लेटफार्म है, जहां दोनों मिलते हैं. दर्शकों का मनोरंजन होता है. मल्टीप्लेक्स और फिल्म निर्माता मुनाफा कमाते हैं. मल्टीप्लेक्स का पूरा कारोबार सिर्फ और सिर्फ मुनाफे पर टिका होता है. मल्टीप्लेक्स के मालिक कस्बों और शहरों के पुराने सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर चित्रा, मिलन, एंपायर आदि जैसे सिनेमाघरों के मालिक नहीं हैं. याद करें तो बीसवीं सदी के सिनेमाघरों के मालिकों के लिए फिल्म का प्रदर्शन कारोबार के साथ-साथ उनका पैशन भी हुआ करता था. फ़िल्में देखने-दिखने में उनकी व्यक्तिगत रूचि होती थी. 21वीं सदी में सब कुछ बदल चुका है. 20 सालों के विस्तार और विकास के बाद ‘कोरोना काल’ में मल्टीप्लेक्स के मुनाफे का मार्ग ऐसा अवरुद्ध हुआ है…

सिनेमालोक : मल्टीप्लेक्स की गुहार और धौंस

सिनेमालोक मल्टीप्लेक्स की गुहार और धौंस -अजय ब्रह्मात्मज कोविड-19 का सबसे पहला असर सिनेमाघरों पर दिखा था. केरल और जम्मू के सिनेमाघरों के बंद होने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी सिनेमाघरों को बंद करने के आदेश दे दिए थे. उसके बाद तो एक-एक कर सभी राज्यों ने सिनेमाघर बंद किए और फिर पूर्णबंदी की घोषणा हो गई. सिनेमाघर बंद हैं और नई फिल्में रिलीज नहीं हो सकतीं. इस बार ईद का मुबारक मौका भी फिल्म इंडस्ट्री को नहीं मिल पाएगा. सलमान खान और अक्षय कुमार की फिल्में ईद पर आने के लिए जूझ रही थीं. पूर्णबंदी के हालात में इन फिल्मों की रिलीज के कोई आसार नहीं हैं. फिल्म इंडस्ट्री में घबराहट फैल रही है. पिछले कुछ समय से सुगबुगाहट जारी है. रिलीज के लिए तैयार फिल्मों के निर्माता ओटीटी प्लेटफॉर्म के अधिकारियों से बातें कर रहे हैं. कुछ फिल्मों के प्रसारण की समझदारी अंतिम चरण में है. इसकी भनक लगते ही मल्टीप्लेक्स के मालिक सक्रीय और सचेत हो गए हैं. उन्होंने संयुक्त विज्ञप्ति जारी की है. पहले तो वे गुहार कर रहे थे. फिल्म निर्माताओं से उनका आग्रह था कि वे धैर्य से काम लें और इंतजार करें. पूर्णब…