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रेड कार्पेट पर मटकते चहकते सितारे

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-अजय ब्रह्मात्मज आए दिन पत्र-पत्रिका और टीवी चैनलों पर स्टारों के रेड कार्पेट पर चलने की खबर और तस्वीरें आती रहती हैं। कान फिल्म समारोह में पहले सोनम कपूर के रेड कार्पेट पर चलने की खबर आई। फिर इंटरनेशनल सौंदर्य प्रसाधन कंपनी ने स्पष्टीकरण दिया कि रेड कार्पेट पर ऐश्वर्या राय ही चलेंगी। अंदरूनी कानाफूसी यह हुई कि ऐश्वर्या ने सोनम का पत्ता कटवा दिया। समझ सकते हैं कि रेड कार्पेट का क्या महत्व है? ऑस्कर के रेड कार्पेट पर स्लमडॉग मिलेनियर के लिए भारतीय एक्टर अनिल कपूर और इरफान खान चले। साथ में फिल्म के बाल कलाकार भी थे। भारत में ऑस्कर रेड कार्पेट की तस्वीरें प्रमुखता से छपीं। उन्हें पुरस्कार समारोह के समान ही महत्व दिया गया। कान फिल्म समारोह में काइट्स की जोड़ी रितिक रोशन और बारबरा मोरी ने रेड कार्पेट पर तस्वीरें खिंचवाई। देखें तो रेड कार्पेट पिछले कुछ सालों में प्रकाश में आया है। पहले विदेश से आए प्रमुख राजनयिक मेहमानों के लिए रेड कार्पेट वेलकम का चलन था। बाद में विदेश के पुरस्कार समारोह और कार्यक्रमों की तर्ज पर भारत मेंभी रेड कार्पेट का चलन बढ़ा। मुख्य कार्यक्रम से पहले स्टार और सेलिब्रि

जो काम मिले, उसे मन से करो: बिपाशा बसु

फिल्म बचना ऐ हसीनों की एक हसीना बिपाशा बसु हैं। उनका फिल्म के हीरो से मुंबई में रोमांस होता है। कुछ गाने होते हैं और बस काम खत्म। हीरोइन की ऐसी भूमिकाओं से बहुत संतुष्ट नहीं होतीं बिपाशा बसु, हालांकि वे नाखुश भी नहीं हैं। वे आह भरती हुई कहती हैं, अब कहां बची हैं लीड भूमिकाएं। वैसे रोल ही नहीं लिखे जा रहे हैं! मैंने तो कुछ सालों पहले ही लीड रोल की चिंता छोड़ दी। काम करना है, तो जो भूमिका मिले, उसे मन से करो और उसी में अपनी छाप छोड़ दो। बिपाशा आश्वस्त हैं कि दीपिका पादुकोण और मिनिषा लांबा जैसी नई अभिनेत्रियों के बीच वे बेमेल नहीं लगेंगी। वे धीरे से बता भी देती हैं, मिनिषा उम्र में मुझसे बड़ी ही होंगी। हां, वे देर से फिल्मों में आई हैं, इसलिए मुझ से छोटी दिखती हैं। वैसे उम्र से क्या फर्क पड़ता है? आप जब तक पर्दे पर आकर्षक और ग्लैमरस दिखते हैं, तब तक सब ठीक है। बिपाशा इस फिल्म में राधिका का किरदार निभा रही हैं, जो दुनिया के रस्म-ओ-रिवाज को नहीं मानती। वे मानती हैं किउनकी स्क्रीन एज ज्यादा है। वे पिछले छह सालों से काम कर रही हैं। मॉडलिंग, फिल्में और विज्ञापनों की वजह से उनका चेहरा जाना-पहचा

फ़िल्म समीक्षा:बचना ऐ हसीनों

एक फिल्म में तीन प्रेम कहानियां बहरहाल, हिंदी लिखने और बोलने में बरती जा रही लापरवाही बचना ऐ हसीनों में भी दिखती है। शीर्षक में ही हसीनो लिखा गया है। फिल्म में राज और उसकी जिंदगी में आई तीन हसीनाओं की कहानी है। राज दिलफेंक किस्म का नौजवान है। लड़कियों को प्रेमपाश में बांधना और फिर उनके साथ मौज-मस्ती करने को उसने राजगीरी नाम दे रखा है। वह अपनी जिंदगी में आई माही और राधिका को धोखा देता है। उनकी मनोभावनाओं और प्यार की कद्र नहीं करता। फिर उसकी मुलाकात गायत्री से होती है। वह गायत्री से प्रेम करने लगता है। जब गायत्री उसका दिल तोड़ती है और उसके प्रेम को अस्वीकार कर देती है, तब उसकी समझ में आता है कि दिल टूटने पर कैसा लगता है? इस अहसास के बाद वह पुरानी प्रेमिकाओं, माही और राधिका, से माफी मांगने वापस लौटता है। वह उनके सामने स्वीकार करता है कि वह कमीना और गिरा हुआ आदमी है। संभवत: हिंदी फिल्म में पहली बार हीरो ने खुद को कमीना और गिरा हुआ इंसान कहा है। पुरानी प्रेमिकाओं से जबरदस्ती माफी लेने के बाद राज नई प्रेमिका गायत्री के पास लौटता है। इस दरम्यान गायत्री को भी अहसास हो चुका है कि वह राज से प्र