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Showing posts from June, 2015

दरअसल : पहली छमाही की उपलब्धि रहीं कंगना

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-अजय ब्रह्मात्‍मज
पहली छमाही खत्‍म होने पर आ गई है।इस छमाही में अन्‍य सालों की तुलना में कम फिल्‍में रिलीज हुई हैं। लगभग 60 फिल्‍मों की रिलीज तो हुई,लेकिन उनका बिजनेस प्रतिशत भी पिछले सालों की तुलना में कम रहा। इस साल अभी तक केवल ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्‍स’ ही स्‍पष्‍ट तौर पर 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर सकी है। छह महीनों में सिर्फ एक फिल्‍म की सौ करोड़ी कामयाबी शुभ संकेत नहीं है। पहले छह महीनों में पॉपुलर स्‍टारों की फिल्‍में भी आई हैं,लेकिन उनमें से किसी ने भी बाक्‍स आफिस पर धमाल नहीं मचाया। जिन फिल्‍मों से बेहतरीन प्रदर्शन और कमाई की उम्‍मीद थी,उन फिल्‍मों ने अधिक निराश किया। किसी भी फिल्‍म ने चौंकाया नहीं। ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्‍स’ ने तो पहले प्रोमो से ही दर्शकों के दिल में जगह बना ली थी। हां,ट्रेड पंडित यह समझने में लगे हैं कि कैसे कंगना रनोट की फिल्‍म ने ऐसा चमत्‍कारिक कारोबार किया? हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री के घाघ ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्‍स’ की सफलता को पचा नहीं पा रहे हैं। वे अस्‍वीकार की मुद्रा अपना चुके हैं। अब आंकड़ों को कौन झुठला सकता है? हिंदी की सर्वाधिक कारोबार करने वाली फिल्‍मो…

सबसे काबिल शिक्षक है पिता - महेश भट्ट

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पिता महेश भट्ट
प्रस्‍तुति-अजय ब्रह्मात्‍मज पिता हजारों शिक्षक से अधिक प्रभावशाली होता है। स्‍कूल और जिंदगी के ज्‍यादातर शिक्षक किताबी होते हैं। वे सिखाते तो हैं,लेकिन उनका सीमित असर होता है। पिता अपने बच्‍चों के जहन पर गहरा छाप छोड़ता है। खास कर अपनी बेटियों पर ... जिसका पगभाव अकल्‍पनीय होता है। अगर मेरी बेटियां और बेटा आत्‍मनिर्भर हैं तो इसमें मेरा असर है। पूजा अभी जयपुर के पास रेगिस्‍तान में शूटिंग कर रही है। फिल्‍म इंडस्‍ट्री में आए आर्थिक संकट के दौर में उनलोगों के साथ फिल्‍म बना रही है,जो स्‍आर नहीं माने जाते हें। यह उसकी अपनी जीत और हिम्‍मत है। आलिया ने अपनी जिंदगी में 21 की उम्र में वह मुकाम हासिल कर लिया है,जो मुझे 50 की उम्र में भी नहीं मिला था।
अपना क्लोन न बनाएं  यह पिता का विश्‍वास होता है कि हमारे बच्‍चे हमारे तो होते हैं,लेकिन वे हम से अलग होते हैं। यह तो मानव अधिकार की बात है कि हर किसी को अलग होने और रहने का अधिकार है। इस मुल्‍क में यह बात हम भूल जाते हैं कि बच्‍चों को अपना क्‍लोन न बनाएं। कुदरत के बेमिसाल क्रिएशन को उसकी पृथक पहचान पर अपनी मानसिकता थोपेंगे तो फिर उनकी …

फिल्‍म समीक्षा : एबीसीडी 2

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स्‍टार- **1/2 ढाई स्‍टार
-अजय ब्रह्मात्‍मज  रैमो डिसूजा की फिल्म ‘एबीसीडी 2’ में डांस है, जोश है, देशभक्ति और अभिमान भी है, वंदे मातरम है, थोड़ा रोमांस भी है...फिल्मों में इनसे ही अलग-अलग संतुष्ट होना पड़ेगा। दृश्ये और प्रसंग के हिसाब से इन भाव और भावनाओं से मनोरंजन होता है। कमी रह गई है तो बस एक उपयुक्त कहानी की। फिल्म सच्ची कहानी पर आधारित है तो कुछ सच्चाई वहां से ले लेनी थी। कहानी के अभाव में यह फिल्म किसी रियलिटी शो का आभास देती है। मुश्किल स्टेप के अच्छेे डांस सिक्वेंस हैं। डांस सिक्वेंस में वरुण धवन और श्रद्धा कपूर दोनों सुरु और विन्नी के किरदार में अपनी लगन से मुग्ध करते हैं। कहानी के अभाव में उनके व्यक्तिगत प्रयास का प्रभाव कम हो जाता है। पास बैठे युवा दर्शक की टिप्पणी थी कि इन दिनों यूट्यूब पर ऐसे डांस देखे जा सकते हैं। मुझे डांस के साथ कहानी भी दिखाओ।
 सुरु और विन्नी मुंबई के उपनगरीय इलाके के युवक हैं। डांस के दीवाने सुरु और विन्नी का एक ग्रुप है। वे स्थानीय स्तुर पर ‘हम किसी से कम नहीं’ कंपीटिशन में हिस्सा लेते हैं। नकल के आरोप में वहां उनकी छंटाई हो जाती है। उसकी वजह से जग…

मोहल्‍ला अस्‍सी के निर्देशक ने कथित ट्रेलर को बताया फर्जी

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सोशल मीडिया पर वायरल हुए ‘मोहल्ला अस्सी’ के अनधिकृत वीडियो फुटेज पर चल रही टिप्पणियों और छींटाकशी के बीच अपनी फिल्म की असामयिक और असंगत चर्चा से फिल्म के निर्देशक डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी व्यथित हैं। उन्हें लगातार हेट मेल, एसएमएस और सवाल मिल रहे हैं, जिनमें सभी की जिज्ञासा है कि असली माजरा क्या है? ज्यादातर लोग इसे अधिकृत ट्रेलर समझ कर उत्तेहजित हो रहे हैं। डॉ. द्विवेदी ने इस फिल्म की शूटिंग 2011 में पूरी कर ली थी। पोस्ट प्रोडक्शेन और डबिंग की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। वीडियो फुटेज को लेकर चल रहे शोरगुल के बीच अजय ब्रह्मात्मज ने फिल्म के निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी की प्रतिक्रिया ली।   सोशल मीडिया पर चल रहे ‘मोहल्ला अस्सी’ के वीडियो फुटेज से उत्तेजना फैली हुई है। आप को इसकी जानकारी कब मिली और आप क्या कहना चाहेंगे? सबसे पहले तो यह ‘मोहल्ला अस्सी’ का ट्रेलर नहीं है। यह उस फिल्म का अनधिकृत फुटेज है, जिसे किसी शातिर और विकृत व्यक्ति ने कहीं से प्राप्त किया है। उसने उत्तेजना और विरोध का वातावरण बनाने के लिए इसे अपलोड कर दिया है। मैं जानना चाहूंगा कि यह कहां से और कब अपलोड ह…

तोहफों की ये शुरूआत -प्रीतम

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-अजय ब्रह्मात्‍मज प्रीतम लौट आए हैं। कबीर खान की ‘बजरंगी भाईजान’ के लिए तैयार किया उनका गीत ‘सेल्‍फी ले ले’ पॉपुलर हो रहा है। इस गीत से अपनी वापसी दर्ज करने के साथ ही प्रीतम ने जाहिर कर दिया है कि वे फिर से सक्रिय हो चुके हैं। उनकी वापसी ‘बजरंगी भाईजान’ से हो रही है। अपनी अनुपस्थिति के बारे में प्रीतम बताते हैं,’ लगातार काम करते-करते मैं थक चुका था। पिछले साल ’धूम’ पूरा करने के बाद ही मैंने मन बना लिया था कि अब ब्रेक लेना है। मई 2014 तक मैंने हाथ में लिया काम समेट लिया था। सबसे पहले बच्‍चों को लेकर लंदन गया। वहां डेढ़-दो महीने रहा। इरादा यही था कि कुछ भी कंपोज नहीं करना है। छह महीनों तक मैंने कोई काम नहीं किया। उसकी वजह यही है कि मैं बोर हो गया था। अपने काम में ही एनर्जी नहीं मिल रही था। इस बीच में कुछ म्‍यूजिकल शो जरूर किए मैंने। उसमें तो कुछ भी कंपोज नहीं करना पड़ता। पुराना गा दो और सुना दो।‘ वापसी की वजह बने कबीर खान और अनुराग बसु... दोनों की फिल्‍मों की शूट चल रही थी। प्रीतम को लगातार फोन जा रहे थे। आखिरकार वे लौटे। खुद कहते हैं प्रीतम,’ मैं कबीर खान की ‘फैंटम’ कर रहा हूं। वे ‘बजरंग…

दिमाग का एक्‍शन है ‘दृश्‍यम’ -अजय देवगन

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दिमाग का एक्‍शन है ‘दृश्‍यम’ में-अजय देवगन -अजय ब्रह्मात्‍मज अजय देवगन ने हालिया इमेज से अलग जाकर ‘दृश्‍यम’ की है। इस फिल्‍म में वे सामान्‍य नागरिक विजय सालस्‍कर हैं। विजय अपने परिवार को बचाने के लिए सारी हदें पार करता है। पिछले दिनों मुंबई के महबूब स्‍टूडियो में उनसे मुलाकात हुई। वहां वे एक बनियान कंपनी के लिए फोटो शूट कर रहे थे।
-आप भी विज्ञापनों और एंडोर्समेंट में दिखने लगे हैं ? 0 मैं ज्‍यादा विज्ञापन नहीं करता। इस कंपनी के प्रोडक्‍ट पर भरोसा हुआ तो हां कह दिया। यह मेरी पर्सनैलिटी के अनुकूल है।
- ‘दृश्‍यम’ के लिए हां करने की वजह क्‍या रही ? ‘सिंघम’ से आप की एक्‍शन हीरो की इमेज मजबूत हो गई है। क्‍या यह उस इमेज से निकलने की कोशिश है ? 0 हम हमेशा एक जैसी फिल्‍में नहीं कर सकते। दर्शकों के पहले क्रिटिक उंगली उठाने लगते हैं। यह फिल्‍म मुझे अच्‍छी लगी। मैं ओरिजिनल फिल्‍म को क्रेडिट देना चाहूंगा। कमल हासन भी इसकी तमिल रीमेक बना रहे हैं। मैंने उनसे बात की थी। पूछा था कि उन्‍होंने क्‍या तब्‍दीली की है ? उन्‍होंने किसी भी चेंज से मना किया। उनका कहना था कि हाथ न लगाओ। ओरिजिनल जैसा ही बनाओ। हमारे न…

मामूली लोग होते हैं मेरे किरदार -सुभाष कपूर

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-अजय ब्रह्मात्‍मज मैंने ‘फंस गए रे ओबामा’ खत्‍म करने के समय ही ‘गुड्डू रंगीला’ की स्क्रिप्‍ट लिखनी शुरू कर दी थी। बात ढंग से आगे नहीं बढ़ रही थी तो मैंने उसे छोड़ दिया और ‘जॉली एलएलबी’ पर काम शुरू कर दिया था। उस फिल्‍म को पूरी करने के दौरान ही मुझे ‘गुड्डू रंगीला’ का वैचारिक धरातल मिल गया। उसके बाद तो उसे पूरा करने में देर नहीं लगी। मैं स्क्रिप्‍ट जल्‍दी लिखता हूं। पत्रकारिता की मेरी अच्‍छी ट्रेनिंग रही है। समय पर स्‍टोरी हो जाती है। ‘ग़ुड्डू रंगीला’ के निर्माण में अमित साध के एक्‍सीडेंट की वजह से थोड़ी अड़चन आई,लेकिन फिल्‍म अब पूरी हो गई है। मुझे खुशी है कि मैं अपने काम से संतुष्‍ट हूं। जरूरी है वैचारिक धरातल मेरे लिए फिल्‍म का वैचारिक धरातल होना जरूरी है। आप मेरी फिल्‍मों में देखेंगे कि कोई न कोई विचार जरूर रहता है। मैं किसी घटना या समाचार से प्रेरित होता हूं। उसके बाद ही मेरे किरदार आते हैं। ‘गुड्डू रंगीला’ की शुरूआत के समय मेरे विचार स्‍पष्‍ट नहीं थे। यह तो तय था कि हरियाणा की पृष्‍ठभूमि रहेगी और उसमें खाप पंचायत की भी उल्‍लेख रहेगा। अटकने के बाद मैंने आधी-अधूरी स्क्रिप्‍ट छोड़ दी …

दरअसल : उपभोक्‍ता समाज में सितारों की समझदारी