Search This Blog

Showing posts with label बड़े सितारों की चूक. Show all posts
Showing posts with label बड़े सितारों की चूक. Show all posts

Tuesday, October 29, 2019

सिनेमालोक : बड़े सितारों की चूक


सिनेमालोक
बड़े सितारों की चूक
-अजय ब्रह्मात्मज
पिछले हफ्ते आई साजिद नाडियाडवाला की  फिल्म 'हाउसफुल 4' ने दर्शकों और समीक्षकों को निराश किया. इसकी वजह से फिल्म का कारोबार अपेक्षा से बहुत कम रहा. निर्माता को उम्मीद थी की दिवाली के मौके पर रिलीज हो रही यह फिल्म पहले 3 दिनों में ही 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लेगी. ट्रेड पंडितों का अनुमान था कि पहले दिन ही फिल्म का कारोबार 25 से 35 करोड़ के बीच होगा. अक्षय कुमार  समेत तीन अभिनेताओं और कृति ससैनन समेत तीन अभिनेत्रियों की यह फिल्म रिलीज के पहले से तहलका मचा रही थी.  एक गीत 'बाला बाला बाला शैतान का साला' विचित्र नृत्य मुद्राओं की वजह से लोकप्रिय हो गया था.बाला चैलेंज के तहत फिल्म बिरादरी के सदस्य और आम प्रशंसक हास्यास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर डाल रहे थे. उन्हें निर्माता रिट्वीट कर रहे थे. यूँ लग रहा था कि फ़िल्म को इस श्रेणी की पुरानी फिल्मों की तरह भारी कामयाबी मिलेगी.
ऐसा नहीं हो सका. अक्षय कुमार की लोकप्रियता से पहले दिन थोड़े दर्शक आये,लेकिन अगले दिन दर्शक ससससससZकम हो गए. कामयाब फिल्मों का एक ट्रेंड है कि शनि और रविवार को उनके कलेक्शन में 20 से 30 प्रतिशत का इजाफा होता है. इस फ़िल्म का कलेक्शन अगले दिन घट गयाससस्वस्स्ज़ज़्ज़और अब बढ़ने की उम्मीद भी नहीं है. बेहतरीन फिल्में तारीफ से दर्शक बटोरती हैं तो बुरी फिल्में निंदा से दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पातीं. यही 'हाउसफुल 4' के साथ हुआ. आम दर्शकों के साथ बैठ करफ़िल्में देखने से उनकी प्रतिजरियासमझ में आ जाती हैं. निर्माताओं ने तो सोचा था कि दिवाली का वी ।केंड उनके लिए फायदेमंद होगा.
'हाउसफुल 4' का निर्देशन पहले साजिद खान कर रहे थे। उनके 'मी टू' विवाद में फंसने के बाद फ़िल्म की शूटिंग रोक दी गई थी. कलाकारों में भी फेरबदल हुई थी. बाद में फरहाद - शामजी को ज़िम्मेदारी दी गई. फूहड़ और मज़ाकिया संवादों के लिए मशहूर निर्देशक द्वय को निर्देशन की कागज़ी ज़िम्मेदारी दी गई. यह नहीं बताया गया कि साजिद खान ने कितनी गिलम शूट कर ली थी? और फरहाद - शामजी ने कितना किया? यूँ दबी जुबान में यह भी कहा जा रहा था कि निर्देशन की कमान तो साजिद नाडियाडवाला के हाथों में ही थी. खानापूर्ति के लिए फरहाद-शामजी का नाम दिया गया. इस फ़िल्म की कहानी साजिद नाडियाडवाला की ही है. उन्हें पुनर्जन्म की यह अजीबोगरीब कहानी सूझी,जिसे शूट करने में भारी खर्च भी किया गया. यह बात फैलाई गई कि फ़िल्म की लागत 80 करोड़ ही है. और कलेक्शन पर भी विवाद हुआ कि उसे बढ़ा- चढ़ा कर बताया जा रहा है.
स्थिति जो भी हो,इस तथ्य से इनकार नहीं जिया जा सकता कि अक्षय कुमार औरसजिद नाडियाडवाला सेभरी चूक हुई. जिस मसालेदार युक्ति पर उन्हें विश्वास और भरोसा था,वह काम नहीं आया. पुनर्जन्म जैसी धारणा को इस तरीके से पेश करना दर्शकों के पल्ले नही पड़ा. बाकी कलाकारों की छवि में तो फ़र्क़ नहीं पड़ेगा,लेकिन अक्षय कुमार की लोकप्रियता को बट्टा लाह. उनकी पिछली कुछ फिल्में कंटेंट और राष्ट्रवाद के नारों की वजह से चलीं. अभी के दौर में वे भरोसेमंद स्टार माने जाते हैं. उन्हें यह समझना चाहिए कि छोटी सी चूक के भी परिणाम बड़े होते हैं. उनके पास कुछ बेहतरी  फिल्में हैं. सचमुच उन्हें ऐसी फूहड़ फिल्मों से किनारा कर लेना चाहिए.