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Friday, July 24, 2009

आत्मकथा नहीं लिखना चाहते सलीम खान


-अजय ब्रह्मात्मज


सलीम खान के साथ घंटों बिताने के बाद चलते वक्त नंबर लेने के बाद जब मैंने पूछा कि क्या कभी उनसे फोन पर बातें की जा सकती हैं? उनका सीधा जवाब था, भाई, मैं तो रॉन्ग नंबर से आए कॉल पर भी आधे घंटे बात करता हूं। आप तो परिचित हैं और पत्रकार हैं। सलीम खान के व्यक्तित्व का अनुमान बगैर उनकी संगत के नहीं हो सकता। वे मीडिया से बातें नहीं करते और न अपने जोड़ीदार जावेद अख्तर की तरह बयान और भाषणों के लिए उपलब्ध रहते हैं। उनका अपना एक रुटीन है। वे उसमें व्यस्त रहते हैं। आज जिस उदारता, मेहमाननवाजी और फराक दिल के लिए सलमान खान की तारीफ की जाती है, वह सब उन्हें सलीम खान से विरासत में मिली है। सलीम खान इसे स्वीकार करते हैं, लेकिन साथ में यह बताना नहीं भूलते कि सलमान की अपनी खासियतें हैं। वह अपने ढंग का वाहिद लड़का है। मेरा बेटा है, इसलिए नहीं.., वह सचमुच टैलेंटेड आर्टिस्ट है।
सलीम खान कमरे में टंगी पेंटिंग्स की तरफ इशारा करते हैं। उसे नींद नहीं आती। वह बेचैन रहता है। मैं उसकी क्रिएटिव छटपटाहट को समझ सकता हूं। कभी मैं भी उसकी तरह बेचैन रहता था। वे यादों की गलियों में लौटते हुए बताते हैं कि इंदौर में मेरी प्रेमिका की शादी कहीं और हो रही थी। उसके घर वालों ने मुझे इसलिए नकार दिया था कि मेरे पास एक मोटर साइकिल और कुछ ख्वाब थे। उन्होंने दुनियावी नजरिए से ठीक ही सोचा था कि ख्वाब से खाना नहीं मिलता। मैं इंदौर के एक टीले पर उदास और हारे हुए प्रेमी की तरह दुनिया को गाली देता बिसूर रहा था, तो किसी ने कंधे पर हाथ रखा और कहा, कुछ ऐसा करो कि तुम्हारी प्रेमिका और उसके घरवालों को अफसोस हो कि उन्होंने तुम्हें क्यों नकारा! सलीम खान को सलाह अच्छी लगी और वे मुंबई आ गए। दिल में फिल्मों में काम करने का जज्बा था। तब दिलीप कुमार का जमाना था। उनके पोस्टर और होर्डिग नुक्कड़ों पर लगे रहते थे। सलीम खान ने सोचा कि एक दिन अपना भी पोस्टर लगेगा। पोस्टर लगे, लेकिन ऐक्टर के रूप में नहीं। सलीम खान बहुत बड़े रायटर के रूप में मशहूर हुए। पहली बार तब लोगों ने पोस्टर पर लेखकों के नाम बडे़ और बोल्ड अक्षरों में देखे। सलीम-जावेद की जोड़ी हिट फिल्मों का पर्याय बन चुकी थी। उन दिनों वे फिल्म स्टारों की किस्मत पलट रहे थे। कई स्टार हैं, जिनमें से कुछ आज भी दोस्त हैं और कुछ समय के साथ छिटककर दूर चले गए हैं। दूर जाने वालों में अमिताभ बच्चन भी हैं। सलीम खान की लिखी अनेक फिल्मों के हीरो रहे अमिताभ से उनकी कोई बातचीत नहीं है। इस प्रसंग पर फिर कभी..
फिलहाल उनके निष्क्रिय होने की बात चली, तो सलीम खान स्पष्ट करते हैं कि मेरा बेटा तब तक स्टार बन चुका था। मुझे लगा कि अगर मैं अपनी कहानी किसी और के पास लेकर जाऊंगा, तो वह सोचेगा कि सलीम साहब सलमान के साथ क्यों काम नहीं करते? अगर कभी उसने बिठा दिया, तो मुझे और बेटों को तकलीफ होगी। बेटे के साथ फिल्म करूं, तो दूसरी दिक्कतें हैं। फिल्म हिट हो गई, तो सेहरा बेटे के नाम और अगर कहीं फिल्म पिट गई, तो झूठ का मैं बदनाम। लिहाजा मैंने लिखना बंद कर दिया। अचानक घर में बैठना तो भारी रहा होगा। कोई रोशनी से बाहर आ जाए, तो घुप्प अंधेरा मिलता है। कुछ भी नहीं सूझता। सलीम खान के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ। वे बेटों की देखभाल में लग गए। अपनी मसरूफियत के बारे में वे बताते हैं कि जिंदगी में जो गलतियां मैं कर चुका था, वैसी गलतियां मेरे बेटे न करें, इस खयाल से मैंने उनकी देखभाल की। मैंने उनके कमाए धन का सही निवेश किया। आज मेरे सभी बच्चे इस स्थिति में हैं कि उन्हें भविष्य की चिंता नहीं है। सभी अपने ढंग से कमा रहे हैं और बाकी देखभाल के लिए मैं हूं। यहां कई तरह के जरूरतमंद आते हैं। उनकी मदद करने से सुकून मिलता है।
क्या कभी आत्मकथा लिखने का विचार नहीं आया। उनके अनुभव और जीवन के प्रसंग दूसरों के लिए प्रेरणादायी हो सकते हैं। सलीम खान आत्मकथा के महत्व को समझते हैं और इसी वजह से वे अपनी आत्मकथा नहीं लिखना चाहते। उनका मानना है कि आत्मकथा में साफगोई होनी चाहिए। मैं अगर सब कुछ साफ-साफ लिखूंगा, तो कई लोगों के चेहरों पर चढ़े नकाब उतर जाएंगे। इसके अलावा जीवन के अंतरंग प्रसंग हैं। उन्हें दुनिया के साथ शेयर नहीं किया जा सकता। कुछ कहानियां कहने-सुनने के लिए नहीं होतीं।
फिलहाल सलीम खान अपने बेटे सोहेल खान की फिल्म किसान को लेकर बहुत उत्साहित हैं। वे कहते हैं कि इस दौर में सोहेल ने ऐसी फिल्म बनाने की जरूरत समझी। मुझे फिल्म की थीम अच्छी लगी। मैंने उसे कहा कि इसे खुद ही वितरित करो।