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यूट्यूब हिंदी टाकीज पर सत्‍याग्रह का रिव्‍यू

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सत्‍याग्रह का रिव्‍यू द हिंदी टाकीज पर...

फिल्‍म समीक्षा : सत्‍याग्रह

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-अजय ब्रह्मात्‍मज                    इस फिल्म के शीर्षक गीत में स्वर और ध्वनि के मेल से उच्चारित 'सत्याग्रह' का प्रभाव फिल्म के चित्रण में भी उतर जाता तो यह 2013 की उल्लेखनीय और महत्वपूर्ण सामाजिक-राजनीतिक फिल्म हो जाती। प्रकाश झा की फिल्मों में सामाजिक संदर्भ दूसरे फिल्मकारों से बेहतर और सटीक होता है। इस बार उन्होंने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया है। प्रशासन के भ्रष्टाचार के खिलाफ द्वारिका आनंद की मुहिम इस फिल्म के धुरी है। बाकी किरदार इसी धुरी से परिचालित होते हैं।               द्वारिका आनंद ईमानदार व्यक्ति हैं। अध्यापन से सेवानिवृत हो चुके द्वारिका आनंद का बेटा भी ईमानदार इंजीनियर है। बेटे का दोस्त मानव देश में आई आर्थिक उदारता के बाद का उद्यमी है। अपने बिजनेस के विस्तार के लिए वह कोई भी तरकीब अपना सकता है। द्वारिका और मानव के बीच झड़प भी होती है। फिल्म की कहानी द्वारिका आनंद के बेटे की मृत्यु से आरंभ होती है। उनकी मृत्यु पर राज्य के गृहमंत्री द्वारा 25 लाख रुपए के मुआवजे की रकम हासिल करने में हुई दिक्कतों से द्वारिका प्रशासन को थप्पड़ मारते हैं। इस अपराध में …

हमें भी महत्ता मिले-मनोज बाजपेयी

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-अजय ब्रह्मात्मज

-‘सत्या’ से लेकर ‘सत्याग्रह’ तक के सफर में अभिनेता मनोज बाजपेयी के क्या आग्रह रहे?
0 सत्य और न्याय का आग्रह ही करता रहा हूं। हमलोगों की...मेरी हो चाहे इरफान की हो या नसीर की हो, ओमपुरी की हो हम सब की लड़ाई एक ही रही है। अभिनय में प्रशिक्षित अभिनेताओं को बराबर मौका मिले। अपने काम के जरिए हमलोगों ने यही कोशिश की है। लगातार कोशिशों के बावजूद अभी भी सेकेंड क्लास सीटिजन हंै हम सभी। अनुराग, दिबाकर, तिग्मांशु के आने के बाद हमरा महत्व बढ़ा है, लेकिन अभी भी मुझे लगता है कि दूर से आए लोगों की महत्ता या थिएटर से आए लोगों की महत्ता पर जोर देना चाहिए। अगर कमर्शियल हिट्स भी  सबसे हमारे हिस्से में आ रहे हैं तो महत्व देने में क्या जाता है? उचित स्थान देने में क्या जाता है? यही आग्रह हमेशा से रहा है। यह आग्रह हम अपने काम के जरिए करते रहे हैं।
- उचित श्रेय नहीं मिल पाने के लिए कौन जिम्मेदार है? इंडस्ट्री, मीडिया और दर्शक तीनों में कौन ज्यादा जिम्मेदार है?
0 सब जिम्मेदार हैं। थोड़े-थोड़े सब जिम्मेदार हैं। इंडस्ट्री पुराने पैमाने से ही जांचती है।
- इंडस्ट्री आपको इनसाइडर मानती है या आउटसाइड…

‘सत्याग्रह’ में पॉलिटिकल जर्नलिस्ट हूं मैं-करीना कपूर

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-अजय ब्रह्मात्मज
    आम धारणा है कि शादी के बाद फिल्म अभिनेत्रियों को नई फिल्मों के ऑफर नहीं मिलते। उन्हें घर पर रहना पड़ता है। कुछ सालों पहले की इस सच्चाई को हाल-फिलहाल में शादीशुदा हुई अभिनेत्रियों ने झुठला दिया है। विद्या बालन ‘घनचक्कर’ पूरी करने के बाद ‘शादी के साइड इफेक्टस’ की शूटिंग कर रही हैं। हाल ही में निर्णायक मंडल के सदस्य के तौर पर उन्होंने कान फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लिया। करीना कपूर भी व्यस्त हैं। उन्होंने प्रकाश झा की ‘सत्याग्रह’ की शूटिंग पूरी कर ली है। फिलहाल वह धर्मा प्रोडक्शन की ‘गोरी तेरे प्यार में’ की शूटिंग कर रही हैं। कमर्शियल के साथ-साथ उद्देश्यपरक और सामाजिक फिल्मों में करीना कपूर की मौजूदगी से हम परिचित हैं। उन्होंने ‘चमेली’, ‘देव’, ‘ओमकारा’ और ‘हीराइन’ जैसी फिल्मों में काम किया है। प्रकाश झा की ‘सत्याग्रह’ इसी तरह की उनकी अगली फिल्म है। इस फिल्म में वह एक बार फिर अजय देवगन के साथ दिखेंगी। - प्रकाश झा के साथ काम करने का कैसा अनुभव रहा? 0 अच्छा रहा। मैंने सभी एक्टिव डायरेक्टर के साथ काम किया है। कुछ ऐसा संयोग रहा कि प्रकाश झा के साथ कभी काम करने का मौका नह…

7 तस्‍वीरें सत्‍याग्रह की

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