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Friday, August 31, 2012

फिल्‍म समीक्षा : जोकर

Film review : Joker
प्रिय शिरीष,
आप धन्य हैं, साथ ही अक्षय कुमार और यूटीवी भी धन्य है, क्योंकि उन्होंने आप की विचित्र कल्पना में निवेश किया। अक्षय कुमार तो आप की फिल्म के हीरो भी हैं। हालांकि रिलीज के समय उन्होंने फिल्म से किनारा कर लिया, लेकिन कभी मिले तो पूछूंगा कि उन्होंने इस विचित्र फिल्म में क्या देखा था?
बहरहाल, आप ने अक्षय कुमार और सोनाक्षी सिन्हा को कामयाबी की हैट्रिक नहीं लगाने दी। हाउसफुल-2 और राउडी राठोड़ के बाद अक्षय कुमार को झटका भारी पड़ेगा। वहीं सोनाक्षी सिन्हा दबंग और राउडी राठोड़ के बाद नीचे उतरेंगी।
ताश की गड्डी के जोकर को फिल्म के कंसेप्ट में बदल देना और फिर उस पर पूरी फिल्म रचना। आप की कल्पना की उड़ान की दाद देनी पड़ेगी। पगलापुर भारत के नक्शे पर हो न हो, आप के दिमाग में जरूर रहा होगा। और उसका संपर्क किसी और इंद्रिय से नहीं रहा होगा। आजादी के 65 सालों के विकास से कटे गांव के अक्षय कुमार का नासा पहुंच जाना भी विचित्र घटना है। और फिर उसका भारत लौटना। पगलापुर को ध्यान में लाने के लिए एलियन की कहानी बुनना। लॉजिक तो हिंदी फिल्मों में आम तौर पर नहीं मिलता, लेकिन आप ने तो इलॉजिकल होने की पराकाष्ठा पार की।
फिल्म के पोस्टर पर लिखा है कि कभी-कभी एलियन होना ही अकेला विकल्प होता है। आप ने वह विकल्प भी खत्म कर दिया। अब जोकर का क्या होगा?
आप के ट्विट में जबरदस्त विट और ह्यूमर रहता है। इतना ज्यादा कि आहत होकर शाहरुख खान आप पर हाथ उठा देते हैं। फिल्म के संवादों और दृश्यों में वह विट और ह्यूमर नदारद है। अक्षय कुमार, सोनाक्षी सिन्हा, अंजन श्रीवास्तव,दर्शन जरीवाला, ब्रजेश हीरजी, मिनिषा लांबा,असरानी,पित्तोबास त्रिपाठी और श्रेयस तलपड़े आदि जैसी प्रतिभाओं का दुरूपयोग कोई आप से सीखे। इनमें से एक-दो कलाकारों के सदुपयोग से •ुछ मामूली फिल्में भी मनोरंजक हो जाती हैं। आप ने तो सभी की प्रतिभा पर पानी फेर दिया। हां, अकेली चित्रांगदा सिंह का काफिराना अंदाज थोड़ी मस्ती दे गया। ऐसी ही मस्ती तीस मार खां की शीला की जवानी में भी थी। बेहतर होगा कि पूरी फिल्म के बजाए आप आयटम सांग ही सोचें और शूट किया करें। एलियन को बैकड्रॉप में रखकर हॉलीवुड के निर्माता एक से एक फिल्में बना रहे हैं। राकेश रोशन की कोई ़ ़ ़ मिल गया भी अच्छी कोशिश थी। और एक आप हैं, आदमी के सिर और शरीर पर सब्जियां चिपका कर एलियन का भी मजाक उड़ाते हैं। शिरीष आप की जोकर फिलहाल 2012 की सबसे साधारण फिल्म है। मुझे तो लगता हे कि दशक की साधारण फिल्मों में भी यह शुमार होगी।
मैं फिल्म देख कर आने के बाद से सिरदर्द से परेशान हूं। फिल्म में मन न लगे तो 105 मिनट की फिल्म भी लंबी लगती है।
अवधि- 105 मिनट
रेटिंग- * एक स्टार 
आपका,
अजय ब्रह्मात्मज

Sunday, August 5, 2012

दर्शकों की पसंद हूं मैं-सोनाक्षी सिन्हा

-अजय ब्रह्मात्मज
    सोनाक्षी सिन्हा की अभी तक दो ही फिल्में रिलीज हुई हैं, लेकिन दोनों ही सुपरहिट रही हैं। ‘दबंग’ और ‘राउडी राठोड़’ की जबरदस्त सफलता ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री की टॉप हीरोइनों में शामिल कर दिया है। हालांकि दोनों ही फिल्मों की कामयाबी का श्रेय उनके हीरो सलमान खान और अक्षय कुमार को ही मिला। फिर भी कामयाब फिल्म की हीरोइन होने के हिस्से के रूप में सोनाक्षी सिन्हा भी सफल मानी जाएंगी। अब उनकी तीसरी फिल्म ‘जोकर’ रिलीज होगी। इसमें भी उनके हीरो अक्षय कुमार हैं। सोनाक्षी सिन्हा से एक बातचीत ़ ़ ़
- दो-दो फिल्मों की कामयाबी से आप ने इतनी जल्दी ऐसी ऊंचाई हासिल कर ली है। बात कहां से शुरू करें?
0 कहीं से भी शुरू करें। इतनी छोटी जर्नी है मेरी कि न तो आप ज्यादा कुछ पूछेंगे और न मैं ज्यादा बता पाऊंगी। खुश हूं कि मेरी दोनों फिल्में दर्शकों को पसंद आई। पसंद आने की एक वजह तो मैं हूं ही।
- आप की तीसरी फिल्म शिरीष कुंदर की ‘जोकर’ होगी। उसके बारे में बताएं?
0 ‘जोकर’ वैसे मेरी दूसरी फिल्म है। ‘दबंग’ के बाद मैंने ‘जोकर’ ही साइन की थी और उसकी शूटिंग भी आरंभ हो गई थी। यह बहुत ही स्पेशल फिल्म है। इस फिल्म के यूनिकनेस ने मुझे आकर्षित किया था। अभी जैसी फिल्में आ रही हैं, उनसे बिल्कुल अलग है। बाकी अक्षय कुमार का हीरो होना दूसरा आकर्षण था। फराह खान और शिरीष कुंदर को मैं पहले से जानती थी। उनकी वजह से हां करने के लिए अधिक सोचना नहीं पड़ा।
- क्या है यूनिकनेस  ़ ़ ़ वैसे इन दिनों हर फिल्म हट के कही जाती है, लेकिन थिएटर में लगने पर सब एक सी दिखती है?
0 हाहाहा ़ ़ ़ मैं आप का इशारा समझ सकती हूं। हिंदी फिल्मों में पहले एलियन, क्रॉप सर्किल, यूएफओ आदि ऐसा नहीं आया है। थोड़ी एक्सपेरिमेंटल फिल्म है। मेरे ख्याल में शिरीष कुंदर ने बहुत अच्छी तरह शूट की है। यह फिल्म बच्चों को बहुत पसंद आएगी। बच्चे आते हैं तो उनके साथ फैमिली भी आती है फिल्में देखने। मुझे तो लगता है कि इस वजह से भी फिल्म चलेगी।
- ‘जोकर’ साइंस फिक्शन है क्या?
0 हां, साइंस फिक्शन है। थोड़ा-बहुत हिंदी फिल्मों का ड्रामा है। वास्तव में यह एक अंडरडॉग की कहानी है। भारतीय दर्शकों को ऐसे हीरो अच्छे लगते हैं। अभी के लिए इतना ही बता सकती हूं। सचमुच, यह अलग टाइप की फिल्म है, इसलिए जितना कम बताएं उतना अच्छा। इसका विजुअल आनंद है। फिल्म का इंतजार करें।
- ‘जोकर’ में अपनी मौजूदगी पर क्या कहेंगी?
0 ऑफकोर्स नयी सोनाक्षी दिखेगी। अभी तक दर्शकों ने मुझे ट्रैडिशनल लुक में ही देखा है। इसमें वेस्टर्न लुक में भी दिखूंगी। हमेशा इंडियन लुक की बात करते हुए लोग सवाल छोड़ जाते हैं कि क्या मैं वेस्टर्न लुक में जंचूंगी? उनके लिए मौका है कि वे परखें और बताएं। ‘जोकर’ में कॉमेडी करती भी दिखूंगी। वैसे ‘जोकर’ नाम से यह अर्थ न लगाएं कि यह हंसी-मजाक की फिल्म है।
- अपने किरदार और रोल के बारे में बताएं?
0 फिल्म में मेरा नाम दीवा है। फराह खान की एक बेटी का नाम दीवा है। फिल्म में मैं एक एनआरआई लडक़ी हूं। वहां से गांव में पहुंचती हूं। गांव में अक्षय कुमार और अन्य लोगों से घुलमिल जाती हूं। इसमें मेरे किरदार के दो पहलू हैं। वेस्टर्न लुक के साथ-साथ इंडियन लुक में भी नजर आऊंगी।
- क्या ‘जोकर’ पहली फिल्म ‘दबंग’ रिलीज होने के पहले ही साइन कर ली थी आप ने?
0 ‘दबंग’ की रिलीज के बाद साइन की थी। मैंने तय किया था कि ‘दबंग’ का नतीजा देखने के बाद ही अगली फिल्म साइन करनी है। दर्शकों के साथ अपनी इंडस्ट्री का रिएक्शन देख लेना चाहती थी।
- ‘दबंग’ करते समय तक आप एकदम नयी थीं। उस फिल्म की कामयाबी ने आपको झटके में बड़ा एक्सपोजर दिया और ऊंचे स्थान पर पहुंचा दिया। इस अचानक बदलाव का क्या असर हुआ?
0 ऊपरी तौर पर जरूर बदलाव हुआ। परपसेप्शन बदल गया। मेरे प्रति लोगों का नजरिया अच्छा बन गया। अंदरूनी तौर पर कोई असर नहीं हुआ। मैं इसी इंडस्ट्री की लडक़ी हूं। मैंने पापा की जिंदगी में यह शोहरत देखी है। नेम और फेम का गेम समझती हूं। मेरे लिए कामयाबी बहुत बड़ी या अलग बात नहीं थी। इस बार मैं सेंटर में थी, लेकिन इंडस्ट्री में पले-बढ़े होने की वजह से मुझे इसकी ट्रेनिंग मिल चुकी थी। परिवार में पहले से मशहूर कोई है, इसलिए भी ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। हां, सफल होने वाली परिवार की पहली सदस्य होती तो जरूर फर्क पड़ता। आप को बताया था कि ‘दबंग’ साइन करते वक्त भी एक्टर या स्टार बनने का मेरा कोई शौक नहीं था। सब कुछ अचानक हो गया। ‘दबंग’ के बाद भी निश्चित नहीं थी कि आगे क्या करना है? खुद को इतना सक्षम मानती हूं कि किसी और जॉब में रहती तो भी सफल ही रहती।
- फिर भी इस कामयाबी को सोनाक्षी सिन्हा किस स्तर पर महसूस करती हैं?
0 कामयाबी तो मिली है और मैं इसे ग्रांटेड नहीं समझ सकती। मुझे सभी की अपेक्षाओं के हिसाब से चलना है। जरूरी नहीं है कि कल भी यह कामयाबी बनी रहे। आज मैं जहां हूं, वहां कल कोई और होगा। यह सब तो चलता ही रहता है।
- करिअर के फैसले लेने में कौन मदद करता है? कैसी फिल्में चुननी हैं या बाकी क्या करना -नहीं करना है?
0 परिवार का अनुभव काम आता है। पापा-मम्मी की मदद लेना तो स्वाभाविक है। उनके 40 सालों के अनुभव के बाद भी उनसे सलाह नहीं लेना बेवकूफी ही होगी। नैरेशन में मम्मी साथ में रहती हैं। पापा शहर में नहीं होते तो उन्हें कहानी का सार बता देती हूं। वे अपनी राय दे देते हैं। उनकी राय सुनती हूं। अभी तक के चुनाव में उनकी राय का फायदा देखा है।
- चुनाव में क्या दिक्कत होती होगी? आप के पास तो बड़े ऑफर ही आते होंगे। वैसे भी आपने कोई छोटी फिल्म तो अभी तक नहीं की?
0 ऐसा नहीं है। मेरे पास हर तरह के ऑफर आते हैं और मैं सभी से मिलती भी हूं। एक समय मैं भी नयी थी। अभी कौन सी पुरानी हो गई हूं। सलमान खान जैसे सुपरस्टार मुझे लांच कर सकते हैं तो मैं किसी नए स्टार या डायरेक्टर के साथ काम नहीं कर सकती क्या? अभी तक जो फिल्में या कैरेक्टर मैंने चुने हैं, उनमें कमर्शियल वैल्यू देखी है। अभी एक्सपेरिमेंट या एकदम से हट के रोल नहीं कर सकती। उतना अनुभव भी नहीं है।
- अभी तक आप की सफलता सौ प्रतिशत रही है। 100 करोड़ क्लब में आप करीना कपूर और असिन के साथ हैं। क्या इस से दबाव या कंपीटिशन महसूस करती हैं?
0 मैं प्रेशर नहीं महसूस करती। उल्टा मुझे प्रोत्साहन सा मिला है। जितना अच्छा कर रही हूं,वैसा करती रहूं। सच कहूं तो मैं दबाव में बेहतर काम करूंगी। हर निगेटिव चीज को पॉजीटिव में बदल कर मेहनत करूंगी। मैं लकी हूं। इसे अनदेखा नहीं कर सकती। मुझे इसे बनाए रखना होगा।
- इंडस्ट्री में प्रतिभाओं को अवसर के साथ सफलताएं मिलती रही हैं, लेकिन अनेक इन्हें संभाल नहीं पाते। कुछ ही होते हैं जो शाहरुख खान की तरह सिद्ध करते हैं कि वे सफलता और अवसर के काबिल हैं  ़ ़ ़
0 बहुत सही बात कही आप ने ़ ़ ़ मेरे मन में कोई संशय नहीं है। अपने बारे में मैं श्योर हूं। मुझे तो एक्टिंग में ही नहीं आना था। आ गयी और इतना मिला। हां मैं मौके और सफलता को व्यर्थ नहीं जाने दूंगी।
- खुद को मांजने के लिए क्या करती हैं? आप को तो फुर्सत ही नहीं मिली अभी तक $  ़ ़ ़
0 फिल्में करने के दौरान ही यह होता है। डायरेक्टर और अनुभवी एक्टरों के साथ काम करने से सीखने को मिलता है। मेरी फिल्में ही मेरा ट्रेनिंग या लर्निंग ग्राउंड है। हर फिल्म में कुछ नया सीखती हूं। टेक्नीशियन तक कुछ न कुछ सिखा जाते हैं।
- कहां तक जाना है  ़ ़ ़ कोई लक्ष्य या मंजिल  ़ ़ ़
0 कुछ नहीं मालूम  ़ ़ ़ मुझे तो कल के बारे में भी नहीं मालूम कि क्या करना है? फिर भी माधुरी दीक्षित, रानी मुखर्जी, करीना कपूर और विद्या बालन की तरह कुछ कर लेना चाहूंगी।
- आप ने विद्या बालन का नाम लिया। लंबे समय के बाद आप दोनों ने हिंदी फिल्मों की हीरोइनों का कांसेप्ट बदला। बीच में तो जीरो साइज का फैशन चल गया था।
0 मैं अपनी सेहत और देह को लेकर अतिरिक्त सचेत नहीं रही। सभी का नजरिया अलग-अलग हो सकता है। स्क्रीन पर अपीलिंग लगना चाहिए। फैशन हो गया था  पतली-दुबली और जीरो साइज दिखना। विदेशों की फैशन मैग्जीन पढ़ कर और सौंदर्य प्रतियोगिताओं की वजह से यह हुआ था। गौर करें तो हिंदी फिल्मों की हीरोइनों का इमेज कभी ऐसा था ही नहीं। सालों के बाद विद्या जी और मेरे साथ यह ट्रेंड वापस आया तो रिफ्रेशिंग चेंज की तरह लगा। हम दोनों कभी डिफेंसिव नहीं रहे। मैं खुश हूं, स्वस्थ हूं और खाते-पीते घर की हूं। आप ने नहीं सुना होगा कि सेट पर बेहोश होकर गिर गई। हट्टी-कट्टी हूं तो बुरा क्या है? जो लिखते हैं, वे कम होते हैं यानी आलोचक, जो देखते हैं वे ज्यादा होते हैं। यानी दर्शक। मैं तो दर्शकों की पसंद हूं।
- किस इलाके में सबसे ज्यादा प्रशंसक हैं आप के?
0 यह कहने की बात ही नहीं है। बिहार और वह भी खास कर पटना के ज्यादा प्रशंसक हैं। झारखंड से भी फैन मेल आते हैं। जर्मनी, रूस, यूक्रेन, अमेरिका, ब्रिटेन सभी देशों में हैं फैन। उनसे ट्विटर के माध्यम से ही इंटरेक्ट करती हूं। फुर्सत मिलने पर कुछ के जवाब देती हूं।
- अपने निर्देशक शिरीष कुंदर के बारे में कुछ बताएं?
0 उन्होंने मुझे पूरी आजादी दी। हालांकि ‘जोकर’ मेरी दूसरी फिल्म थी। मैंने एक बार पूछा भी कि आप टोकते क्यों नहीं? उनका जवाब था कि तुम सब कुछ सही कर रही हो। तुम्हें कुछ बताने या टोकने की जरूरत ही नहीं है। उनमें भरोसा करने का गुण है।


Sunday, May 13, 2012

जूनियर शॉटगन सोनाक्षी सिन्हा

जूनियर शॉटगन
-अजय ब्रह्मात्मज
अभिनव सिंह कश्यप की फिल्म दबंग से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में दमदार दस्तक दे चुकी सोनाक्षी सिन्हा की दूसरी फिल्म अभी तक नहीं आई है। 10 सितंबर 2010 को रिलीज हुई दबंग ने कई मायने में इतिहास रचा और सोनाक्षी की जगह फिल्म इंडस्ट्री में पक्की कर दी। उन्हें कई पुरस्कार मिले और कंज्यूमर प्रोडक्ट के विज्ञापन भी। कुछ फिल्में भी मिलीं,लेकिन उनके निर्माण में ही पिछला साल निकल गया। 2011 में सोनाक्षी ने सिनेमाघरों में दर्शकों को दर्शन नहीं दिया। हल्की फुसफुसाहट भी सुनने को मिली कि कहीं सोनाक्षी वन फिल्म वंडर तो नहीं हैं। शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी पर सभी की नजर है। स्टारपुत्र और पुत्रियों को खारिज करने के लिए आलोचकों का एक समूह डटा रहता है। अपनी दूसरी-तीसरी फिल्मों में सोनाक्षी को ऐसी कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ेगा।
अभी की बात करें तो सोनाक्षी अपनी फिल्मों के चक्कर में देश के विभिन्न शहरों के दौरे कर रही हैं। कभी बादामी तो कभी डलहौजी,कभी पटियाला तो कभी कोलकाता,हंपी और मुंबई... चार फिल्मों की शूटिंग की तारीखों और किरदारों को संभालने के साथ देश के भिन्न इलाकों में लगे सेट और लोकेशन पर समय से पहुंचना ...सोनाक्षी ने साबित किया है कि वह अपने पिता की बदनाम लेटलतीफी से दूर हैं। हालांकि ट्विटर पर अपने परिचय में उन्होंने खुद को शॉटगन जूनियर लिखा है। बातचीत में प्रगल्भ होने के बावजूद वह अपने पिता की तरह वाचाल नहीं हैं। वह हाजिरजवाब जरूर हैं। निश्चित ही उन्हें यह गुण अपने पिता से मिला है,लेकिन पहली फिल्म की कामयाबी ने उनके इस गुण को निखार दिया है। उनके जुड़वां बड़े भाइयों लव और कुश ने भी फिल्मों में बतौर एक्टर जमने की कोशिश की,लेकिन उन्हें सोनाक्षी जैसी सफलता नहीं मिली। सोनाक्षी में हिंदी फिल्मों की पारंपरिक अभिनेत्रियों की कुछ मूलभूत विशेषताएं हैं। वह नरगिस,मधुबाला,वैजयंती माला,हेमामालिनी,श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित की अगली कड़ी हैं। महिलाओं के भारतीय सौंदर्य का आधुनिक प्रतिरूप। सौंदर्य प्रतियोगिताओं से आई अभिनेत्रियों ने हिंदी फिल्मों की हीरोइनों के सौंदर्य का मानदंड बदल दिया था। जीरो साइज अभिनेत्रियों की भी चर्चा होने लगी थी। एक अरसे के बाद सोनाक्षी सिन्हा के रूप में हिंदी फिल्मों को पारंपरिक हीरोइन मिली। सोनाक्षी अपनी इस खूबी को जानती हैं और उनके निर्देशक उनकी इस खूबी का उचित इस्तेमाल कर रहे हैं।
सोनाक्षी सिन्हा की शिरीष कुंदर निर्देशित जोकर की शूटिंग पूरी हो चुकी है। अभी वह राउडी राठोर,लूटेरा,सन ऑफ सरदार और दबंग-2 की एक साथ शूटिंग कर रही हैं। चारों ही बड़ी फिल्में हैं। इनमें उनके हीरो अक्षय कुमार,रणबीर सिंह,अजय देवगन और सलमान खान हैं। दबंग-2 की शूटिंग उन्होंने 18 मार्च से आरंभी की है। सोनाक्षी सिन्हा ने अपने किसी प्रशंसक के सवाल पर ट्विट किया है कि जून से मैं ही मैं हूं। उनकी पांचों फिल्में इस साल की जून से लेकर अगले साल की ईद तक रिलीज होंगी। एक साल में पांच फिल्मों का रिलीज होना भी एक घटना होगी।
सोनाक्षी सिन्हा ने डिजायनिंग की पढ़ाई की है और उन्होंने डिजायनिंग के प्रोफेशन में जाना तय कर लिया था कि सलमान खान से मुलाकात हुई और दबंग की योजना बन गई। फिल्मों में उनका अकस्मात आना हुआ,लेकिन पहली फिल्म के लिए उन्होंने वजन घटाने और सिनेमा का क्राफ्ट सीखने में कोई कसर नहीं रहने दी। उन्होंने अपने पिता की सीख को अपनाया। शत्रुघ्न सिन्हा हमेशा कहते हैं कि अगर श्रेष्ठ न बन सको तो भिन्न होकर दिखाओ। सोनाक्षी सिन्हा समकालीन सभी अभिनेत्रियों से भिन्न हैं और अपनी भिन्नता से सभी को लुभा रही हैं। सोनाक्षी सिन्हा के व्यक्तित्व में एक देसी घरेलूपन है। वह अपने परिवार से जुड़ी हुई हैं। फिल्मों की शूटिंग के सिलसिले में लंबी अवधि तक घर से दूर रहने पर उन्हें मां का ताना और घर का खाना याद आने लगता है।
सोनाक्षी सिन्हा की लोकप्रियता और स्वीकृति के सबूत के रूप में हम उनके एंडोर्स किए जा रहे प्रोडक्ट को देख सकते हें। वह जेवर,सौंदर्य प्रसाधन,टूथपेस्ट,ड्रेस मैटेरियल रेंज की बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट के चेहरे के तौर पर नजर आ रही हैं। अपने प्रोडक्ट एंडोर्समेंट में वह ताजगी और भरोसा ले आती हैं।
काम के प्रति अपनी लगन और व्यस्तता से सोनाक्षी ने उम्मीद जगायी है कि वह जल्दी ही हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की अभिनेत्रियों की अगली कतार में शामिल हो जाएंगी। उन्होंने एक बातचीत में कहा था कि मेरा सबसे बड़ा संघर्ष उम्मीदों,अफवाहों और तुलना के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखना है। श्रेष्ठ होने का दबाव कई बार नाहक कमजोर करता है। सोनाक्षी सिन्हा के साथ मां-पिता का मजबूत संबल है। वह सुदृढ़ और संस्कारी परिवार से आई युवा अभिनेत्री हैं।