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फिल्‍म समीक्षा : अंकुर अरोड़ा मर्डर केस

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-अजय ब्रह्मात्मज फिल्म के टायटल से स्पष्ट है कि निर्माता-निर्देशक एक घटना को बगैर लाग-लपेट के पेश करना चाहते हैं। सुहैल तातारी ने सच्ची घटनाओं पर आधारित अनेक रियलिस्टिक टीवी शो का निर्देशन किया है। उनके लिए यह काम बहुत मुश्किल नहीं रहा होगा। इस बार उन्हें लगभग दो घंटे में एक प्रभावपूर्ण कहानी दिखानी थी। अपने उद्देश्य में वे सफल रहे हैं। इस फिल्म में कथित मनोरंजन नहीं है, क्योंकि रोमांस और कॉमेडी नहीं है। यह फिल्म उदास करती है। अवसाद बढ़ा देती है। मेडिकल क्षेत्र में डाक्टर की लापरवाही और पैसों के खेल से हम सभी परिचित हैं। स्वास्थ्य सेवा लाभप्रद व्यवसाय बन चुका है। डॉ ़ अस्थाना (के के मेनन) अपने पेशे में दक्ष हैं, लेकिन व्यावसायिक मानसिकता के कारण वे अनेक जरूरतों को नजरअंदाज करते हैं। उनकी प्रतिभा का कायल रोमेश (अर्जुन माथुर) अपनी गर्लफ्रेंड रिया (विशाखा सिंह) के साथ सीखने के उद्देश्य से उनके अस्पताल में इंटर्नशिप लेता है। आरंभिक दृश्यों की भिडं़त में ही स्पष्ट हो जाता है कि डॉ ़ अस्थाना की पोल रोमेश ही खोलेगा। अस्पताल में दाखिल अंकुर अरोड़ा का एक सामान्य ऑपरेशन डॉ ़ अस्थ…

सामाजिक सरोकार की फिल्म है समर 2007

-अजय ब्रह्मात्मज
आयटम सांग, कामेडी, एक्शन और मल्टीस्टारर फिल्मों के इस दौर में सुहैल तातारी ने सामाजिक सरोकार की फिल्म निर्देशित की है। सालों बाद किसी फिल्म में गांव, किसान और किसानों की आत्महत्या के पहलू सामने आए हैं। यह डाक्यूमेंट्री, उपदेशात्मक या महज बोलवचन की फिल्म नहीं है। फिल्म अपनी बात कह जाती है। अगर आप कान एवं ध्यान लगाएं तो बात समझ में भी आती है।
अमीर परिवारों के पांच बच्चे कैपिटेशन फी देकर मेडिकल कालेज में दाखिला लेते हैं। उन सभी का ध्यान पढ़ाई से ज्यादा दूसरी चीजों में लगा रहता है। उनकी अपनी एक समृद्ध, काल्पनिक और निरपेक्ष दुनिया है। सच से उनका सामना पहली बार तब होता है, जब छात्र संघ के चुनाव का समय आता है। प्रकाश नाम का छात्र नेता अपने स्वतंत्र सोच से उन्हें चुनौती देता है और राजनीति के लिए उकसाता है। पांचों युवक चुनाव की चपेट में आते हैं और फिर एक दबाव के कारण कैंपस से पलायन करते हैं। वे बचने का आसान रास्ता चुनते हैं और गांव के प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र पर सेवा देने के बहाने निकल जाते हैं। गांव पहुंचते ही उनका यथार्थ से साक्षात्कार होता है। कुछ समय तक वे निरपेक्ष और उदासी…