Posts

Showing posts with the label मोहल्‍ला अस्‍सी

अपने मिजाज का सिनेमा पेश किया - सनी देओल

Image
-अजय ब्रह्मात्‍मज
हिंदी फिल्‍म जगत में 50 पार खानत्रयी का स्‍टारडम बरकरार है। सनी देओल अगले साल साठ के हो जाएंगे। इसके बावजूद वे अकेले अपने कंधों पर फिल्‍म की सफलता सुनिश्चित करने में सक्षम हैं। ’घायल वंस अगेन’ इसकी नवीनतम मिसाल है।
- दर्शकों से मिली प्रतिक्रिया से आप कितने संतुष्ट हैं? इस फिल्म के बाद मेरी खुद की पहचान बनी है। वह पहले भी थी, लेकिन मेरे लिए अभी यह बनाना जरूरी था। कई सालों से मैं सिनेमा में कुछ कर भी नहीं रहा था। जो एक-दो फिल्मों में अच्छा काम किया, वे फिल्में भी अटकी हुई थी। उनका काम शुरू नहीं हो रहा था। इसके अलावा मैं जो भी कर रहा था, हमेशा एक सरदार ही था। कई सालों से लोग मुझे एक ही रूप में देख रहे थे। नॉर्मल रूप किरदार में नहीं देख पा रहे थे। यह सारी चीजें थी, जो मेरे साथ नहीं थी। मेरी इस फिल्म से अलग शुरुआत हुई है। हांलाकि मुझे इतनी बड़ी सफलता नहीं मिली है, पर मेरे लिए इतना काफी है। क्योंकि इस फिल्म से मेरे काम को सराहा जा रहा है। लोग मेरी वापसी को पसंद कर रहे हैं। -आप इस फिल्म के एक्टर सनी देओल की सफलता मानते हैं या डायरेक्टर सनी देओल की? मेरे लिए मैंने डायरेक्टर पूरी…

मोहल्‍ला अस्‍सी के निर्देशक ने कथित ट्रेलर को बताया फर्जी

Image
सोशल मीडिया पर वायरल हुए ‘मोहल्ला अस्सी’ के अनधिकृत वीडियो फुटेज पर चल रही टिप्पणियों और छींटाकशी के बीच अपनी फिल्म की असामयिक और असंगत चर्चा से फिल्म के निर्देशक डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी व्यथित हैं। उन्हें लगातार हेट मेल, एसएमएस और सवाल मिल रहे हैं, जिनमें सभी की जिज्ञासा है कि असली माजरा क्या है? ज्यादातर लोग इसे अधिकृत ट्रेलर समझ कर उत्तेहजित हो रहे हैं। डॉ. द्विवेदी ने इस फिल्म की शूटिंग 2011 में पूरी कर ली थी। पोस्ट प्रोडक्शेन और डबिंग की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। वीडियो फुटेज को लेकर चल रहे शोरगुल के बीच अजय ब्रह्मात्मज ने फिल्म के निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी की प्रतिक्रिया ली।   सोशल मीडिया पर चल रहे ‘मोहल्ला अस्सी’ के वीडियो फुटेज से उत्तेजना फैली हुई है। आप को इसकी जानकारी कब मिली और आप क्या कहना चाहेंगे? सबसे पहले तो यह ‘मोहल्ला अस्सी’ का ट्रेलर नहीं है। यह उस फिल्म का अनधिकृत फुटेज है, जिसे किसी शातिर और विकृत व्यक्ति ने कहीं से प्राप्त किया है। उसने उत्तेजना और विरोध का वातावरण बनाने के लिए इसे अपलोड कर दिया है। मैं जानना चाहूंगा कि यह कहां से और कब अपलोड ह…

पन्ने से परदे तक – कहानी पिंजर और मोहल्ला अस्सी की : डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी

Image
भारतीय साहित्य की दोंनों बहु चर्चित कृतियों का फिल्म के लिए लेखन कुछ आसान भी था और कठिन भी. आसान इसलिए की दोंनों के पास एक पुख्ता ज़मीन थी.कथा की.चरित्रों की.चरित्रोंके विकास और उत्थन पतन की.और कथा के प्रवाह और चरित्रों में परिवर्तन की. मुश्किल इसलिए की दोंनों की कथा का विस्तार और काल खंड विस्तृत था.दोंनों ही अपने समाज के इतिहास को अपने अंक में संजोये एक विशिष्ट काल और समाज की यात्रा पर ले जाते हैं. पहले बात पिंजर की अमृता प्रीतम की पिंजर में कथा का काल लगभग बारह साल से अधिक का है. मूल कहानी सियाम ( वर्तमान थाईलेंड ) से प्रारंभ होती है.लगभग सन १९३५ का सियाम.कहानी की नायिका पूरो (उर्मिला मातोंडकर ) के पिता (कुलभूषण खरबंदा ) अपने परिवार सहित सियाम में रहते हैं.सन १९३५ के सियाम की पुनर्रचना खर्चीला भी था और सियाम के इतिहास और स्थापत्य का मेरा अध्ययन भी नहीं था.इसलिए विचार आया कि क्यों न परिवार की स्थापना अमृतसर में की जाये.यह आसान भी था और सियाम की तुलना में कम खर्चीला.१९३५ के अमृतसर की छबियाँ भी उपलब्ध थी और ऐसे बहुत से लोगों को ढूँढा भी जा सकता था जिन्होंने उस अमृतसर को देखा था.दूसरा यह मेर…

मोहल्‍ला अस्‍सी

Image

मोहल्‍ला अस्‍सी : गालियों और चाय की चुस्कियों...

Image
मोहल्‍ला अस्‍सी पर तहलका के अतुल चौरसिया की रपट... गालियों और चाय की चुस्कियों में लिपटी सभ्यता को पर्दे पर उतारने की कोशिशबनारस के अस्सी घाट पर वरिष्ठ साहित्यकार काशीनाथ सिंह की बहुचर्चित किताब काशी का अस्सी पर आधारित फिल्म मोहल्ला अस्सी की शूटिंग से लौटे अतुल चौरसिया फिल्म और साहित्य के प्रति फिल्म के निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी, काशीनाथ सिंह और कहानी के वास्तविक एवं फिल्मी पात्रों का नजरिया साझा कर रहे हैं(लेख में आई कुछ गालियां काशी का अस्सी पुस्तक से संदर्भश: ली गई हैं)बुलेट जैसी निर्जीव मशीन की मां-बहन से किसी का नितांत अंतरंग रिश्ता जुड़ते देखकर ही यह एहसास विश्वास में बदल जाता है कि हम 'सुबहे बनारस' के शहर में हैं, जिसकी धमनियों में गंगा, गलियां और गालियां रक्त के समान ही प्रवाहित होती हंै. चंदुआ सट्टी से लंका की तरफ बढ़ते ही जाम ने अपना मुंह सुरसा की तरह फैला रखा है. नये लोग और दिल्ली-बेंगलुरु के असर में जीने वाले शहर के इस तुमुल कोलाहल पर मुंह बिचकाते दिखते हैं लेकिन सात समंदर पार से यहां आने वाले अंग्रेज और अंग्रेजिनों के माथों पर कोई शिकन तक नहीं दिखती. उनकी निगाह…

काशी कथा वाया मोहल्ला अस्सी-रामकुमार सिंह

Image
यह पोस्‍ट रामकुमार सिंह की है।उन्‍होंने बनारस से लौटकर राजस्‍थान पत्रिका में लिख।चवन्‍नी को पसंद आया,इसलिए नकलचेंपी...
बनारस के घाटों की गोद में अलसायी सी लेटी गंगा को सुबह सुबह देखिए। सूरज पूर्व से अपनी पहली किरण उसे जगाने को भेजता है और अनमनी सी बहती गंगा हवा की मनुहारों के साथ अंगड़ाई लेती है। नावों के इंजन घरघराते हैं, हर हर महादेव की ध्वनियां गूंजती हैं। लोग डुबकियां लगा रहे हैं। यह मैजिक ऑवर है, रोशनी के लिहाज से। डा.चंद्रप्रकाश द्विवदी निर्देशित फिल्म "मोहल्ला अस्सी" की यूनिट नावों में सवार है।

वे इसी जादुई रोशनी के बीच सुबह का शिड्यूल पूरा कर लेना चाहते हैं। काशी की जिंदगी के महžवपूर्ण हिस्से और धर्म की धुरी कहे जाने वाले मोहल्ला अस्सी पर हिंदी के अनूठे कथाकार काशीनाथ सिंह के उपन्यास "काशी का अस्सी" के शब्दों को पिघलाकर चलते हुए चित्रों में तब्दील किया जा रहा है। यह सिनेमा और साहित्य के संगम का अनूठा अवसर है। हम घूमने बनारस गए हैं और देखा कि वहां शूटिंग भी चल रही है तो यह यात्रा अपने आप में नई हो गई।

यह बेहद दिलचस्प है कि एक प्रतिबद्ध वामपंथी लेखक काशीनाथ सिंह…

कुछ समय संग सनी के

Image
-अजय ब्रह्मात्मज
सनी देओल ने आठ मार्च को डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी की फिल्म मोहल्ला अस्सी की शूटिंग पूरी कर दी। यह उनकी अभी तक की सबसे कम समय में बनी फीचर फिल्म है। मोहल्ला अस्सी डॉ. काशीनाथ सिंह के उपन्यास पर आधारित है। एक बातचीत में डॉ. द्विवेदी ने बताया था कि एक हवाई यात्रा में उषा गांगुली के नाटक काशीनामा का रिव्यू पढ़ने के बाद उनकी रुचि इस किताब में जगी। उसे पढ़ने के बाद उन्होंने पाया कि इस पर तो अच्छी फिल्म बन सकती है। चंद मुलाकातों में उन्होंने डॉ. काशीनाथ सिंह से अधिकार लिए और स्क्रिप्ट लिखनी शुरू की। आरंभिक दौर में जिसने भी इस किताब पर फिल्म लिखने की बात सुनी, उसका एक ही सवाल था कि इस पर फिल्म कैसे बन सकती है? बहरहाल, फिल्म लिखी गई और उसके किरदारों के लिए ऐक्टर का चयन आरंभ हुआ।फिल्म के प्रमुख किरदार धर्मनाथ पांडे हैं। यह फिल्म उनके अंतद्र्वद्व और उनके निर्णयों पर केंद्रित है। इस किरदार के लिए एनएसडी से निकले मशहूर और अनुभवी अभिनेताओं से बातें चलीं। अलग-अलग कारणों से उनमें से कोई भी फिल्म के लिए राजी नहीं हुआ। डॉ. द्विवेदी और सनी देओल पिछले कुछ सालों से साथ काम करने के लिए इच्छुक…

मोहल्ला अस्सी में बनारस की धड़कन

Image
-अजय ब्रह्मात्‍मज पिछले रविवार को डॉ. चद्रप्रकाश द्विवेदी की फिल्म 'मोहल्ला अस्सी' की शूटिंग पूरी हो गई। निर्देशक के मुताबिक 'मोहल्ला अस्सी' में दर्शक पहली बार बनारस की गलियों, घाटों और मोहल्लों में रचे-बसे असली किरदारों का साक्षात्कार करेंगे। फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में डॉ. द्विवेदी सनी देओल, रवि किशन, साक्षी तवर, सौरभशुक्ला और अखिलेन्द्र मिश्र सहित पूरी यूनिट के साथ 13 दिनों से बनारस में थे। कुछ दृश्य काशी स्टेशन, रामनगर और अन्य घाटों पर भी फिल्माकित हुए।अपने घूंसे और गुस्से के लिए मशहूर सनी 'मोहल्ला अस्सी' में बनारसी पडे धर्मनाथ पाडे का किरदार निभा रहे हैं। इस फिल्म के लिए उन्होंने नया गेटअप लिया है। धोती और कमीज पहने घाट पर बैठकर श्रद्धालुओं को सकल्प कराते समय वह दूसरे पडों से भिन्न नहीं लग रहे थे। हालाकि मत्रों के उच्चारण में उन्हें थोड़ी कठिनाई हो रही थी, लेकिन उन्होंने कसर नहीं रहने दी।फिल्म इंडस्ट्री में अधिकाश लोग चकित हैं कि सनी के साथ इतने कम दिनों में किसी फिल्म की शूटिंग कैसे पूरी हो सकी? डॉ. द्विवेदी ने खुलासा किया, 'सनी को फिल्म की स्क्रिप…

गाली तो होगी पर बोली के अंदाज में-सनी देओल

Image
काशी की तिकड़ी फिल्म का आधार हो तो भला गालियों की काशिका का अंदाज कैसे जुदा हो सकता है। लेखक डॉ. काशीनाथ, चरित्र व पटकथा काशी और फिल्मांकन स्थल भी काशी। ऐसे में भले ही कथा का आधार उपन्यास बनारस का बिंदासपन समेटे हो लेकिन आम दर्शकों के लिए पर्दे पर कहानी का रंग ढंग कैसा होगा। कुछ ऐसे ही सवाल रविवार को मोहल्ला अस्सी फिल्म की यूनिट के सामने थे। फिल्मों में गाली-गुस्सा और मुक्का के लिए मशहूर अभिनेता सन्नी देओल ने पर्दा हटाया। बोले-गालियां इमोशन के हिसाब से होती हैं। इसमें भी है लेकिन गाली की तरह नहीं, बोली की तरह। आठ-दस साल में सिनेमा बदल गया है। सफलता के लिए जरूरी नहीं कि मुक्का या वल्गेरिटी हो। फिल्म यूनिट होटल रमादा में पत्रकारों से रूबरू थी। मुद्दे कि कमान निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने संभाली। कहा कि श्लील व अश्लील परसेप्शन है। रही बात गालियों की तो लोगों की उम्मीद से कम होंगी। हवाला दिया-फिल्म की स्कि्रप्ट बेटी पढ़ना चाहती थी। मैंने उसे रोक दिया। कहा कि तुम फिल्म देखना। लिहाजा फिल्म उपन्यास का इडिटेड वर्जन होगी। इसे सभी लोग घर-परिवार के साथ बैठकर देख सकेंगे। हां, उपन्यास की आत्मा …