Posts

Showing posts with the label दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे

DDLJ रोमैंटिंक प्रेम का नया आख्‍यान

-जगदीश्वर चतुर्वेदी यह एकदम नए परि‍प्रेक्ष्‍य की फि‍ल्‍म थी। यह ऐसे समय में आयी थी जब चारों ओर से रोमैंटि‍क प्रेम पर तरह-तरह के हमले हो रहे थे,रोमैंटि‍क प्रेम का समाज में एक सांस्‍थानि‍क स्‍थान है। गे और लेस्‍बि‍यन से लेकर फंडामेंटलि‍स्‍टों तक, कठमुल्‍ले वामपंथि‍यों से लेकर कठमुल्‍ला स्‍त्रीवादि‍नि‍यों तक सबमें रौमेंटिंक प्रेम के प्रति‍ घृणा देखी जा सकती है। ये सभी रोमैंटि‍क प्रेम को आए दि‍न नि‍शाना बनाते हैं। 'दि‍ल वाले दुल्‍हनि‍या ले जाएंगे' इस अर्थ में नए पैराडाइम की फि‍ल्‍म है क्‍योंकि‍ इसमें रोमैंटि‍क प्रेम का संस्‍थान के रूप में रूपायन कि‍या गया है। उसकी सफलता का रहस्‍य भी यही है। हमारे समाज में स्‍त्रीवादी आंदोलन ने भी रोमैंटि‍क प्रेम पर हमले कि‍ए हैं। जगह-जगह अनेक महि‍ला संगठनों का इस प्रसंग में हस्‍तक्षेप देखने में आया है। स्‍त्रीवादी संगठनों का मानना है रोमैंटि‍क प्रेम स्‍त्री की स्‍वायत्‍तता को छीन लेता है। उसे परनि‍र्भर बना देता है। रोमैटिंक प्रेम का चि‍त्रण करते हुए फि‍ल्‍म के प्रमुख स्‍त्री पात्र कुछ इस तरह दि‍खाए गए हैं कि‍ वे स्‍त्री की शि‍रकत को बढावा देते हैं…

DDLJ लाइन मारना तो शाहरुख ने ही समझाया था....

-सुशांत झा
घर से नजदीकी शहर मधुबनी 35 किलोमीटर दूर था, अकेले जाने की इजाजत अक्सर नहीं मिलती थी जब डीडीएलजे का वक्त आया था। बिहार बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में जब फर्स्ट क्लास में पास हुआ तो अचानक इज्जत बढ गई, मधुबनी अकेले जाने का पासपोर्ट मिल गया-जो हमारे लिए उस वक्त कैलिफोर्नियां से कम नहीं था। उससे पहले सिनेमा का मतलब गांव का वीसीआर और दूरदर्शन पर आनेवाला सिनेमा था जो दरभंगा के कमजोर टावर की वजह से अक्सर डिस्टर्व आता था। हम कड़ियों को जोड़-जोड़ कर सिनेमा का अनुमान लगाते थे। गांव में छिटपुट घरो में टीवी आई था जो बिजली न होने की वजह से बैटरी से देखी जाती था और बैटरी चार्ज कराकर लानेवाले और टीवी चलाने वाले की इज्जत आईआईटी इंजिनियर से कम नहीं थी। हमें टीवी पर रंगोली, चित्रहार और सप्ताह में एक फिल्म देखने की इजाजत थी, इससे ज्यादा देखने पर आवारा का तमगा निश्चित था। रामायण के वक्त शायद 89 या 90 में जब मेरे बड़े चाचा जो स्कूल में मास्टर थे ने टीवी लाया था तो उनका दावा था कि उनका टीवी दुनिया का बेहतरीन ब्रांड है और मुजफ्फरपुर दुनिया का सबसे अच्छा शहर। वजह? उन्होने मुजफ्फरपुर से टीवी लाया था ज…