सलमान खान का शुक्राना


सलमान खान ने भी ब्लॉग लिखना शुरू कर दिया है.उन्होंने यह ब्लॉग हम सभी की तरह ब्लागस्पाट पर ही आरंभ किया है.इसका नम दस का दम रखा गया है.इसी नाम से सलमान खान सोनी टीवी पर एक शो लेकर आ रहे है.यह उसी से संबंधित है.लोगों को लग सकता है कि दस का दम के प्रचार के लिए इसे शुरू किया गया है.अगर ऐसा है भी तो क्या दिक्कत है?सलमान खान ने अभी तक पाँच पोस्ट डाली है।

आप अवश्य पढ़ें.आप समझ पाएंगे कि सलमान किस मिजाज के व्यक्ति हैं.उनमें एक प्रकार का आलस्यपना है.वह उनके लेखन में झलकता है.खान त्रयी के बाकी दोनों खान आमिर और शाहरुख़ कि तरह उन्हें बतियाने नहीं आता.बहुत कम बोलते हैं और जिंदगी की साधारण चीजों में खुश रहते हैं.सलमान खान ने यहाँ अपने दर्शकों से सीधे बात की है.चवन्नी को तो उनकी बातों रोचक जानकारी मिली है.सलमान खान का कहना है कि अक्ल हर काम को ज़ुल्म बना देती है.यही कारन है कि सलमान खान अक्लमंदी की बातें करने से हिचकते हैं।

सलमान खान का अपना दर्शक समूह है.उनकी फ़िल्म को पहले दिन अवश्य दर्शक मिलते हैं.गौर करें तो उन्होंने बहुत उल्लेखनीय फ़िल्म नहीं की है,फिर भी लोकप्रियता के मामले में वे आगे रहे हैं.सलमान के दर्शकों का समूह अलग है.आप चाहें तो उसे चवन्नी छाप भी कह सकते है।

सलमान से एक बार चवन्नी ने पूछा था कि कभी वे दूसरे सितारों की तरह ऐतिहासिक या पीरियड फ़िल्म क्यों नहीं करते?तो सलमान खान ने छूटते ही कहा ...पागल हुआ हूँ क्या?मुझे एक्टिंग नहीं आती.मैं जैसा हूँ,वही परदे पर दिखाना है तो ठीक है.सलमान खान में गजब का आकर्षण है.परदे पर आते ही मानो किरणें निकलती है,जो आम दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर लेती हैं।
सलमान खान दस का दम को शुक्राना कह रहे हैं.उनका मानना है कि दर्शकों ने पिछले १९ सालों में उन्हें जो प्रेम और स्नेह दिया है,वे उसी का शुक्रिया अदा कर रहे हैं।

Comments

PD said…
link kahan hai bhaiya????
Ghost Buster said…
सलमान समझदार हैं. अपने धनात्मक गुणों को बखूबी पहचानते हैं. एक्टिंग उनके बस की नहीं इसे भी जानते हैं. अपनी लम्पटता को बिकाऊ मीडिया की मदद से चमकदार पैकिंग में बेचना भी जानते हैं. बिल्कुल उनका एक अलग दर्शक वर्ग है जो हाई स्कूल की किशोरियों और चवन्नी छाप तलछट दर्शकों का उचित सम्मिश्रण है.

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