Posts

Showing posts with the label प्रियंका चोपड़ा

पूर्वाग्रह तोड़ने निकली हूं - प्रियंका चोपड़ा

Image
-अजय ब्रह्मात्‍मज     अगर आप प्रियंका चोपड़ा के ट्विटर हैंडल के 98 लाख 26 हजार 796 फॉलोअर्स में से एक हैं तो आप का बताने की जरूरत नहीं है कि वह इन दिनों कितनी व्‍यस्‍त चल रही हैं।  देश में अहमदाबाद,चंडीगढ़ और दिल्‍ली की यात्राओं से मुंबई लौटती हैं तो यहां बैठकों और इंटरव्‍यू का सिलसिला चलता है। कुछ कमिटमेंट पूरे होते हैं और कुछ अगली बार के लिए टल जाते हैं। किसी भी फिल्‍म स्‍टार के लिए ऐसा वक्‍त बहुत नाजुक होता है,क्‍योंकि वह एक तरफ आपने नए प्रशंसक बना रहा होता है,लेकिन दूसरी तरफ पुराने समर्थक खो रहा होता है। हीरोइनों के मामले में मामला और संगीन हो जाता है। प्रियंका चोपड़ा अभी इसी दौर से गुजर रही हैं। उन्‍होंने जोया अख्‍तर की ‘ दिल धड़कने दो ’ में आएशा मेहरा की भूमिका निभाई है। इस फिल्‍म में रणवीर सिंह उनके भाई बने हैं। दोनों की पिछली फिल्‍म ‘ गुंडे ’ थी। उसमें वे रोमांस करते नजर आए थे। कहना मुश्किल है कि प्रेमी ’ प्रेमिका के रूप में रणवीर सिंह और प्रियंका चोपड़ा को देख चुके दर्शक भाई-बहन के रूप में उन्‍हें पसंद करेंगे कि नहीं ? शाह रूख खान और ऐश्‍वर्या राय की ‘ जोश ’ को

दीपिका और प्रियंका का मुकाबला नृत्य

Image
-अजय ब्रह्मात्मज याद है, संजय लीला भंसाली की ‘देवदास’ में ‘डोला रे डोला’ गीत विशेष आकर्षण बन गया था। इस गाने में पारो और चंद्रमुखी दोनों ने अपने पांवों में बांध के घुंघरू और पहन के पायल मनोहारी नृत्य किया था। ‘देवदास’ में ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित के युगल नृत्य को बिरजू महाराज ने संजोया था। संजय लीला भंसाली की फिल्मों की भव्यता की एक विशेषता सम्मोहक और शास्त्रीय नृत्य भी होती है। अपनी फिल्मों में उन्होंने सभी अभिनेत्रियों को नृत्य में पारंगता दिखाने के मौके दिए हैं। पिछली फिल्म ‘गोलियों की रासलीला ़ ़ ऱामलीला’ में दीपिका पादुकोण को ‘ढोल बाजे’ गाने में अपना हुनर दिखाने का अवसर मिला तो सिर्फ एक गाने ‘राम जाने’ में आई प्रियंका चोपड़ा भी पीछे नहीं रहीं। अब ‘बाजीराव मस्तानी’ दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा का युगल नृत्य दिखेगा। इसे रेमो फर्नांडिस निर्देशित कर रहे हैं।     ‘बाजीराव मस्तानी’ में दीपिका पादुकोण मस्तानी की भूमिका निभा रही हैं। प्रियंका चोपड़ा बाजीराव की पत्नी काशीबाई की भूमिका में हैं। इन दिनों दोनों इस फिल्म के युगल नृत्य की शूटिंग कर रही हैं। दीपिका और प्रियंका ने

फिल्‍म समीक्षा : मैरी कॉम

Image
-अजय ब्रह्मात्‍मज                    मैरी कॉम के जीवन और जीत को समेटती ओमंग कुमार की फिल्म 'मैरी कॉम' मणिपुर की एक साधारण लड़की की अभिलाषा और संघर्ष की कहानी है। देश के सुदूर इलाकों में अभाव की जिंदगी जी रहे किशोर-किशोरियों के जीवन-आंगन में भी सपने हैं। परिस्थितियां बाध्य करती हैं कि वे उन सपनों को भूल कर रोजमर्रा जिंदगी को कुबूल कर लें। देश में रोजाना ऐसे लाखों सपने प्रोत्साहन और समर्थन के अभाव में चकनाचूर होते हैं। इनमें ही कहीं कोई कोच सर मिल जाते हैं,जो मैंगते चंग्नेइजैंग मैरी कॉम की जिद को सुन लेते हैं। उसे प्रोत्साहित करते हैं। अप्पा के विरोध के बावजूद मां के सपोर्ट से मैरी कॉम बॉक्सिंग की प्रैक्टिस आरंभ कर देती है। वह धीरे-धीरे अपनी चौकोर दुनिया में आगे बढ़ती है। एक मैच के दौरान टीवी पर लाइव देख रहे अप्पा अचानक बेटी को ललकारते हैं। फिल्म की खूबी है कि भावनाओं के इस उद्रेक में यों प्रतीत होता है कि दूर देश में मुकाबला कर रही मैरी कॉम अप्पा की ललकार सुन लेती है। वह दोगुने उत्साह से आक्रमण करती है और विजयी होती है। फिल्म देखने से पह

तस्‍वीरों में मैरी काॅम

Image

इंस्पायरिंग कहानी है मैरी कॉम की-प्रियंका चोपड़ा

Image
-अजय ब्रह्मात्मज    प्रियंका चोपड़ा निर्माता संजय लीला भंसाली की ओमंग कुमार निर्देशित ‘मैरी कॉम’ में शीर्षक भूमिका निभा रही हैं। इस भूमिका के लिए उन्हें शारीरिक और मानसिक मेहनत करनी पड़ी है। ‘मैरी कॉम’ तक के सफर में प्रियंका चोपड़ा का उत्साह कभी कम नहीं हुआ। फिल्मों के प्रभाव और सफलता-असफलता के अनुसार उन्हें सराहना और आलोचना दोनों मिली। सीखते-समझते हुए आगे बढऩे के साथ प्रियंका चोपड़ा ने नई विधाओं में भी प्रतिभा का इस्तेमाल किया। ‘मैरी कॉम’ के प्रति वह अतिरिक्त जोश में हैं। इस फिल्म को वह अपने अभिनय करिअर की उपलब्धि मानती हैं। - इतने साल हो गए,लेकिन आप के उत्साह में कभी कोई कमी नजर नहीं आती। आखिर वह कौन सी प्रेरणा है,जो आप को सक्रिय और सकारात्मक रखती है? 0 मेरे लिए मेरा काम बहुत जरूरी है। जिस दिन काम की भूख खत्म हो जाएगी या असफलता का डर नहीं रहेगा,उस दिन शायद मैं काम करना बंद कर दूंगी। मैं अपने काम को आधात्मिक स्तर पर लेती हूं। फिल्मों में आई तो बच्ची थी। विभिन्न निर्देशकों के साथ काम करते हुए मैंने समझा कि एक्टिंग हुनर है। यह एक क्राफ्ट है। अभ्यास करने से ही हम बेहतर होंगे। अभी तो वै

चांस लेना मेरी आदत है-प्रियंका चोपड़ा

Image
-अजय ब्रह्मात्मज     खिलाड़ी का जीवट, कलाकार की ऊर्जा और सीखने के लिए आतुर प्रियंका चोपड़ा अपनी जिंदगी और करिअर के उस मुकाम पर हैं, जहां से ली गई छलांग उड़ान साबित हो सकती है। बचपन में कभी उनका सपना था कि वह एरोनॉटिकल इंजीनियर बनें ताकि हवा से बातें कर सकें और आकाश में रहें। आज वह सचमुच सफलता के आकाश में कुलांचे मार रही हैं। कभी मुंबई तो कभी लास एंजेल्स ़ ़ ़ उन्होंने भारत और अमेरिका की दूरी को कदमों में समेट लिया है। वह फिल्मों में व्यस्त हैं। साथ ही गायकी के लिए पर्याप्त समय निकाल ले रही हैं। पिछले दिनों अमेरिका के टेम्पा शहर में आयोजित आईफा अवार्ड समारोह में उनकी सक्रियता दंग कर रही थी। सुबह से शाम तक विभिन्न इवेंट में सदा मुस्कराती और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करती प्रियंका चोपड़ा के पांवों में ज्यों स्प्रिंग लग गए थे। 15वें आईफा अवार्ड समारोह की सफलता का श्रेय प्रियंका चोपड़ा को भी मिलना चाहिए।     पिछले दस सालों में उन्होंने कामयाबी और कंफीडेंस की लंबी दूरी तय की है। सिर्फ 17 साल की उम्र में मिस इंडिया और मिस वल्र्ड बनने के साथ बरेली की इस नादान लडक़ी की जिंदगी बदल ग

लैं‍गिक समानता पर प्रियंका चोपड़़ा

बालिकाओं पर प्रियंका चोपड़ा के विचार

यहां प्रियंका चोपड़ा ने बालिकाओं और भारतीय समाज की मानसिकता की बातें की हैंं। उनकी स्‍पष्‍टता प्रभावित करती है।

फिल्‍म समीक्षा : गुंडे

Image
दोस्ती-दुश्मनी की चटख कहानी -अजय ब्रह्मात्‍मज यशराज फिल्म्स की अली अब्बास जफर निर्देशित 'गुंडे' देखते समय आठवें दशक की फिल्मों की याद आना मुमकिन है। यह फिल्म उसी पीरियड की है। निर्देशक ने दिखाया भी है कि एक सिनेमाघर में जंजीर लगी हुई है। यह विक्रम और बाला का बचपन है। वे बडे होते हें तो 'मिस्टर इंडिया' देखते हैं। हिंदी फिल्में भले ही इतिहास के रेफरेंस से आरंभ हों और एहसास दें कि वे सिनेमा को रियल टच दे रही हैं, कुछ समय के बाद सारा सच भहरा जाता है। रह जाते हैं कुछ किरदार और उनके प्रेम, दुश्मनी, दोस्ती और बदले की कहानी। 'गुंडे' की शुरुआत शानदार होती है। बांग्लादेश के जन्म के साथ विक्रम और बाला का अवतरण होता है। श्वेत-श्याम तस्वीरों में सब कुछ रियल लगता है। फिल्म के रंगीन होने के साथ यह रियलिटी खो जाती है। फिर तो चटखदार गाढ़े रंगों में ही दृश्य और ड्रामा दिखाई पड़ते हैं। लेखक-निर्देशक अली अब्बास जफर ने बिक्रम और बाला की दोस्ती की फिल्मी कहानी गढी है। ऐसी मित्रता महज फिल्मों में ही दिखाई पड़ती है, क्योंकि जब यह प्रेम या किसी और वजह से टूटती है तो

गुंडे फिल्‍म का जिया गीत

गुंडे फिल्‍म के इस गाने में प्रियंका चोपड़ा के परिधानों के बदलते लाल,सफेद,हरे और बैंगनी रंगों का कोई खास मतलब भी है क्‍या ? क्‍या फिल्‍म में और भी रंग दिखेंगे ?

फिल्‍म समीक्षा : जंजीर

Image
-अजय ब्रह्मात्‍मज  हालांकि अपूर्वा लाखिया की 'जंजीर' अमिताभ बच्चन की 'जंजीर' की आधिकारिक रीमेक है, लेकिन इसे देखते समय पुरानी फिल्म का स्मरण न करें तो बेहतर है। अमिताभ बच्चन की प्रकाश मेहरा निर्देशित 'जंजीर' का ऐतिहासिक महत्व है। उस फिल्म से अमिताभ बच्चन की पहचान बनी थी। उन्हें एंग्री यंग मैन की इमेज मिली थी। इस ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में अपूर्वा लाखिया की 'जंजीर' एक साधारण फिल्म लगती है। राम चरण के लिए हिंदी फिल्मों की यह शुरुआत है। कहानी और किरदारों के बीज वहीं से लिए गए हैं, लेकिन उन्हें स्टूडियो में विशेष निगरानी के साथ सींचा गया है, इसलिए पुरानी फिल्म की नैसर्गिकता चली गई है। वैसे भी अब शहरी जीवन में प्राकृतिक फूलों और पौधों की जगह कृत्रिम फूलों और पौधों ने ले ली है। उसी प्रकार की कृत्रिमता का एहसास 'जंजीर' देख कर हो सकता है। हां, अगर पुराने अनुभव और ज्ञान से वंचित या परिचित दर्शकों के लिए 'जंजीर' आज की फिल्म है। मल्टीप्लेक्स के दर्शकों को मजा भी आएगा। फिल्म में आज के कंसर्न के साथ आधुनिक किरदार हैं। सब कुछ बदल चुका

हा हा ...रीमेक राजकुमारी हूं मैं-प्रियंका चोपड़ा

Image
-अजय ब्रह्मात्‍मज  - बताएं ‘जंजीर’ के बारे में? 0 इस फिल्म को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं। मूल ‘जंजीर’ को इस फिल्म के जरिए हम ट्रिब्यूट दे रहे हैं। मूल जैसी फिल्म तो नहीं बनायी जा सकती। अपूर्वा लाखिया ने इसकी जुर्रत भी नहीं की है। यह उनकी और मेरी भी फेवरिट फिल्म है। अगर इस फिल्म में कोई गलती दिखे तो मैं पहले से ही माफी मांगती हूं। - मूल फिल्म की जया भादुड़ी का किरदार आप निभा रही हैं। क्या कुछ तब्दीली की गई है? 0 मेरा किरदार पूरी तरह से बदल गया है। इस फिल्म में चाकू-छुरी वाली नहीं हूं। मैं न्यूयॉर्क से आई हूं। हिंदी फिल्मों की फैन हूं। भारत एक शादी में आई हूं। बहुत खुश हूं मुंबई आकर। आने के साथ ही एक हत्या की चश्मदीद गवाह बनती हूं। वहरीं से मेरी जिंदगी बदल जाती है। मेरा नाम माला ही है। - फिल्म के हीरो विजय से क्या रिश्ता रहेगा ? 0 हत्या की चश्मदीद गवाह होने की वजह से विजय खन्ना से संपर्क होता है। वे इस हत्या की तहकीकात कर रहे हैं। हम जुडते हैं और कहानी आगे बढती है। पूरी कहानी तो नहीं बता सकती। - रामचरण तेलुगू के पापुलर स्टार हैं। हिंदी में यह उनकी पहली फिल्म होगी। कैसा अनुभव रहा? 0 ह

सिंगर प्रियंका चोपड़ा

Image
- अजय ब्रह्मात्मज फिल्म पत्रकारिता में स्टारों, निर्देशकों और तकनीशियनों से बार-बार की मुलाकात में कुछ आप के प्रिय हो जाते हैं। प्रियंका चोपड़ा उनमें से एक हैं। राज कंवर ने मिस वल्र्ड प्रियंका चोपड़ा और मिस यूनिवर्स लारा दत्ता के साथ ‘अंदाज’ शुरू की थी। उसमें उनके हीरो अक्षय कुमार थे। फिल्मालय स्टूडियो में इस फिल्म के सेट पर उन दिनों प्रियंका चोपड़ा अपने माता-पिता के साथ आती थीं। उनके माता-पिता ने बेटी के करियर के लिए बड़ा फैसला लिया था। वे बेटी को सहारा और आसरा देने के लिए सब कुछ छोडक़र मुंबई आ गए थे।     उस पहली मुलाकात में ही प्रियंका चोपड़ा ने प्रभावित किया था। एक लगाव सा महसूस हुआ  था। मिडिल क्लास मूल्यों की प्रियंका चोपड़ा की बातों में छोटे शहरों में बिताए दिनों की प्रतिध्वनि सुनी जा सकती थी। मिस वल्र्ड खिताब से मिले एक्सपोजर और अमेरिका में स्कूल की पढ़ाई करने के बाद भी प्रियंका चोपड़ा में एक कस्बाई लडक़ी थी। इसे आप देख सकते हैं। बातें करने, इठलाने, मुस्कुराने, झेंपने, खिलखिलाने और एहसास में उत्फुल्लता नजर आती है। प्रियंका चोपड़ा ने गिरते-पड़ते और आगे बढ़ते हुए ‘बर्फी’ तक का

फिल्‍म समीक्षा : बर्फी

Image
निश्छल प्रेम सी मीठी बर्फी  -अजय ब्रह्मात्मज  अगर फिल्म के शुरू में कही गई पंक्तियों को गौर से सुन लें तो अनुराग बसु की बर्फी को सही संदर्भ और अर्थ में समझने में मदद मिलेगी। चुटीले शब्दों में हिदायत देने के बाद कहा गया है..आज का प्यार ऐसा,टू मिनट नूडल्स जैसा,फेसबुक पर पैदा हुआ,कार में हुआ ये जवां,कोर्ट में जाकर गया मर..आज के प्रेम की शहरी सच्चाई बताने के बाद फिल्म मिसेज सेनगुप्ता के साथ दार्जीलिंग पहुंच जाती है। मिसेज सेनगुप्ता श्रुति हैं। वह बर्फी की कहानी सुनाती हैं। कभी दार्जीलिंग में बर्फी ने पहाड़ी झरने सी अपनी कलकल मासूमियत से उन्हें मोह लिया था। मां के दबाव और प्रभाव में उन्होंने मिस्टर सेनगुप्ता से शादी जरूर कर ली,लेकिन बर्फी का खयाल दिल से कभी नहीं निकाल सकीं। अपने रोमांस के साथ जब वह बर्फी की कहानी सुनाती हैं तो हमारे दिलों की धड़कन भी सामान्य नहीं रह जाती। कभी आंखें भर आती हैं तो कभी हंसी आ जाती है। बर्फी गूंगा-बहरा है। स्वानंद किरकिरे की पंक्तियों और गायकी आला बर्फी के साथ इंट्रोड्यूस होते ही बर्फी हमारा प्रिय हो जाता है। वह हमें रिझा लेता है। उसके

दोहरी खुशी का वक्त है-प्रियंका चोपड़ा

Image
-अजय ब्रह्मात्मज -आप की ‘बर्फी’ और म्यूजिक सिंगल लगभग साथ-साथ आ रहा है। क्या कहना चाहेंगी? ‘बर्फी’ मेरे करियर की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। परफॉरमेंस के लिहाज से सबसे मुश्किल फिल्म होगी। मैं एक ऑटिस्टिक लडक़ी का रोल प्ले कर रही हूं। बहुत सारे लोग ऑटिस्टिक लोगों के बारे में नहीं जानते हैं।वे बहुत सिंपल,निर्दोष और अपनी दुनिया में मस्त रहते हैं।   मैंने बहुत  संजीदगी से इस रोल को प्ले किया है। मेरे लिए यह बहुत मुश्किल था, लेकिन अनुराग बसु ने यह रोल करवाने में मेरी बहुत मदद की है। उनके पैरों पर मैं इस फिल्म में खड़ी हूं। उम्मीद करती हूं कि यह लोगों को बहुत पसंद आएगा। जहां तक ‘सिंगल’ का सवाल है, तो वह भी नया है। मैंने अपने पैरों पर खड़े होकर परफार्म किया है। मैंने पहले कभी गाया नहीं है। यह अंग्रेजी में होगा। अमेरिका के ब्लैक आइड पीज ग्रुप के साथ मैंने यह गाना गाया है। गाने के बोल हैं, ‘इन माय सिटी’। दरसअल, मैं बचपन से बहुत सारे शहरों को अपने पालन-पोषण का श्रेय देती हूं। बरेली हो, लखनऊ हो, लद्दाख या पुणे और मुंबई। या अमेरिका में बोस्टन हो, न्यूयॉर्क हो, जहां मैं पली-बढ़ी हूं। इसलिए

जिंदगी का जश्न है ‘बर्फी’-अनुराग बसु

Image
-अजय ब्रह्मात्मज अनुराग बसु की ‘बर्फी’ आम हिंदी फिल्मों से अलग दिख रही है। स्वयं अनुराग बसु की पिछली फिल्मों से इसकी जमीन अलग है और किरदार भी। अनुराग बसु खुद बता रहे हैं ‘बर्फी’ के बारे में ़ ़ ़ पहला ट्रेलर आया ताक लगाा कि यह सायलेंट फिल्म है। फिल्म में ताजगी और उल्लास है। गानों के आने के बाद जिज्ञासाएं और बढ़ गईं हैं। क्या है यह फिल्म? ट्रेलर में फिल्म की सारी बातें क्लियर नहीं की जा सकतीं। एक ही कोशिश रहती है कि फिल्म का सही इमोशन दर्शकों में जेनरेट हो जाए और एक इंटरेस्ट रहे। यह सायलेंट फिल्म तो नहीं है, लेकिन संवाद बहुत कम हैं। मेरी फिल्मों में आप कई बार ऐसे लंबे दृश्य देखेंगे, जिनमें कोई संवाद नहीं होता। ‘गैंगस्टर’ में 20 मिनट का एक ऐसा ही सीन था। ‘बर्फी’ की कहानी लिखते समय चुनौती रही कि कैसे बगैर संवादों को बातें रखी जाए। इसका अलग मजा और नशा है। शब्दों को भाव और एक्सप्रेशन में बदल देना। रणबीर के होने की वजह से मुझे सुविधा हुई। वे कमाल के एक्टर हैं। उनका कैरेक्टर ट्रेलर में भी समझ में आता है। झिलमिल (प्रियंका चोपड़ा) को ऑटिज्म है। वह दुनिया को एकदम अलग तरीके से देखती है।

फिल्‍म समीक्षा : तेरी मेरी कहानी

Image
  -अजय ब्रह्मात्‍मज  तीन दौर में फैली कुणाल कोहली की तेरी मेरी कहानी मुख्य रूप से आठ किरदारों की कहानी है। दो-दो प्रेम त्रिकोण और एक सामान्य प्रेम कहानी की इस फिल्म का सार और संदेश यही है कि समय चाहे जितना बदल जाए, प्यार अपने रूप-स्वरूप में एक सा ही रहता है। समय के हिसाब से हर काल में उसकी अभिव्यक्ति और लक्षणों में बदलाव आ जाता है, लेकिन प्रेमी युगलों की सोच,धड़कनें, मुश्किलें, भावनाएं, शंकाएं और उम्मीदें नहीं बदल पातीं। कुणाल कोहली ने तीनों दौर की कहानियों को पेश करने का नया शिल्प चुना है। दोराहे तक लाकर वे तीनों प्रेम कहानियों को छोड़ते हैं और फिर से कहानी को आगे बढ़ाते हुए एक राह चुनते हैं, जो प्रेमी-प्रेमिका का मिलन करवाती है। तीनों दौर में प्रेमी-प्रेमियों के बीच कोई खलनायक नहीं है। उनकी शंकाएं, उलझनें और अपेक्षाएं ही कहानी को आगे बढ़ाती हैं। कहानी के विस्तार में जाने से दर्शकों की जिज्ञासा खत्म होगी। कुणाल कोहली ने तीनों दौर के प्रेमी-प्रेमिका के रूप में प्रियंका चोपड़ा और शाहिद कपूर को चुना है। हर काल के हिसाब से उनकी भाषा, वेशभूषा और परिवेश में फर्क दिख

बर्फी में रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा

Image
अनुराग बसु निर्देशित बर्फी में रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा अहम भूमिकाओं में हैं। दोनों को अनुराग ने नए अंदाज में पेश करने की कोशिश की है। इन दिनों इस फिल्‍म की शूटिंग कोलकाता में चल रही है। ये तस्‍वीर इंटरनेट सर्फिंग में दिख गई।

ऑन स्‍क्रीन,ऑफ स्‍क्रीन : एक्टिंग की दीवानी प्रियंका चोपड़ा

Image
-अजय ब्रह्मात्‍मज साल 2002.. मुंबई का फिल्मालय स्टूडियो.. सेट की तेज रोशनी और हडबडी-गडबडी के बीच चमकते दो नर्वस चेहरे.. मिस व‌र्ल्ड प्रियंका चोपडा और मिस यूनिवर्स लारा दत्ता..। सुनील दर्शन ने सत्र 2000 की सौंदर्य प्रतियोगिताओं की तीन में से दो विनर्स को हीरोइन के तौर पर साइन कर लिया था। उस दोपहर प्रियंका का साहस बढाने के लिए सेट पर मां मधु और पिता अशोक चोपडा थे। मां के सपनों को बेटी साकार कर रही थी। वह फिल्म की हीरोइन थी। मां-पिता के लिए बेटी की उपलब्धि मिस व‌र्ल्ड से भी बडी थी। समझदारी भरे निर्णय मां का सपना और विश्वास ही था कि वह अपना मेडिकल प्रोफेशन छोडकर बेटी के कारण मुंबई आ गई। बेटी ने भी उन्हें निराश नहीं किया। वह छलांगें मारती गई। राष्ट्रीय पुरस्कार समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी प्रियंका लोकप्रियता और गंभीरता के बीच संतुलन बना कर चल रही हैं। वह जानती हैं कि समय के हिसाब से चलना जरूरी है। किसी ऐक्टर की अस्वीकृत फिल्मों की जानकारी हो तो उसके करियर का आकलन किया जा सकता है। एक उदाहरण दूं। प्रियंका ने अभिषेक बच्चन के साथ ब्लफ मास्टर की, उमराव जान छोड दी, फिर द्रोण की। मधुर

फिल्‍म समीक्षा : 7 खून माफ

Image
-अजय ब्रह्मात्‍मज विशाल भारद्घाज की हर फिल्म में एक अंधेरा रहता है, यह अंधेरा कभी मन को तो कभी समाज का तो कभी रिश्तों का होता है। 7 खून माफ में उसके मन के स्याहकोतों में दबी ख्वाहिशें और प्रतिकार है। वह अपने हर पति में संपूर्णता चाहती है। प्रेम, समर्पण और बराबरी का भाव चाहती है। वह नहीं मिलता तो अपने बचपन की आदत के मुताबिक वह राह नहीं बदलती, कुत्ते का भेजा उड़ा देती है। वह एक-एक कर अपने पतियों से निजात पाती है। फिल्म के आखिरी दृश्यों में वह अरूण से कहती है कि हर बीवी अपनी शादीशुदा जिंदगी में कभी-न-कभी आपने शौहर से छुटकारा चाहती है। विशाल भारद्घाज की 7 खून माफ थोड़े अलग तरीके से उस औरत की कहानी कह जाती है, जो पुरूष प्रधान समाज में वंचनाओं की शिकार है। सुजैन एक सामान्य लड़की है। सबसे पहले उसकी शादी मेजर एडविन से होती है। लंग्ड़ा और नपुंसक एडविन सुजैन पर शक करता है। उसकी स्वछंदता पर पाबंदी लगाते हुए सख्त स्वर में कहता है कि तितली बनन े की कोशिश मत करो। सुजैन उसकी हत्या कर देती है, इसी प्रकार जिम्मी, मोहम्मद, कीमत, निकोलाई और मधूसूदन एक-एक कर उसकी जिंदगी में आते हैं। इन स