फिल्म समीक्षा : लव ब्रेकअप्‍स जिंदगी

लव ब्रेकअप्स जिंदगी: प्रोफेशन बनाम इमोशनप्रोफेशन बनाम इमोशन

-अजय ब्रह्मात्‍मज

साहिल संघा की इस फिल्म के हीरो-हीरोइन जायद खान और दीया मिर्जा हैं। दोनों फिल्मी टाइप किरदार हैं। उन्हें एक-दूसरे के प्रति प्यार का एहसास होता है और फिल्म के अंत तक अपनी झिझक और झेंप में वे उलझे रहते हैं। लव बेकअप्स और जिंदगी को थोड़े अलग नजरिए से देखें तो ध्रुव (वैभव तिवारी) और (राधिका) पल्लवी शारदा ज्यादा तार्किक और आधुनिक यूथ के रूप में उभरते हैं। अगर उन दोनों को नायक-नायिका के तौर पर पेश किया जाता तो बात ही अलग होती। दोनों इमोशनल होने के साथ समझदार भी हैं, लेकिन हिंदी फिल्मों में नायक-नायिका होने के लिए जरूरी है कि आप रोमांटिक हों। अगर आप व्यावहारिक, तार्किक और प्रोफेशनल हुए तो उसे निगेटिव और ग्रे बनाने-समझाने में हमारे निर्देशक और दर्शक नहीं चूकते।

बहरहाल, साहिल संघा ने रिश्तों और प्रेम की इस कहानी को पारंपरिक ढांचे में ढालने की कोशिश की है। फिल्म इंटरवल के पहले काफी लंबी खिंच गई है। किरदारों को स्थापित करने में इतना समय न लेकर लेखक-निर्देशक सीधे रिश्तों की उलझन और प्रेम के एहसास पर आ जाते तो कहानी सिंपल और सटीक हो जाती। फिल्म में सब कुछ इतना मीठा है कि वह जहरीला होने के करीब पहुंच गया है।

वैभव तिवारी इस फिल्म की उपलब्धि हैं। कथित नायक-नायिका के रूप में जायद खान और दीया मिर्जा को अधिक स्पेस और फुटेज मिला है, लेकिन उनके किरदार ही दमदार नहीं हैं। इस वजह से पर्दे पर उनकी मेहनत बेअसर साबित होती है। टिस्का चोपड़ा शालीन लगती हैं। उर्दू को लेकर किया गया मजाक लेखक-निर्देशक के स्तर को भी जाहिर करता है।

** दो स्टार

Comments

ब्रेक अप को लेकर हाल में काफी फिल्मे आईं हैं.
दुनिया तरक्की पर है.

Popular posts from this blog

लोग मुझे भूल जायेंगे,बाबूजी को याद रखेंगे,क्योंकि उन्होंने साहित्य रचा है -अमिताभ बच्चन

फिल्‍म समीक्षा : एंग्री इंडियन गॉडेसेस

तो शुरू करें