नहीं-नहीं आलिया बहुत क्लियर है straight फॉरवर्ड -सोनाली सिंह

सोनाली सिंह ने ब्रेक के बाद की आलिया के संदर्भ में यह टिप्‍पणी दी है।

प्रेम गली अति साकरी जिसमे समाये न दोय" वाली कहावत पुरानी हो चुकी है.आजकल के प्रेम की गलियां बहुत फिसलन भरी है जिन पर बहुत संभल - संभल कर कदम बढ़ाने पढ़ते है अन्यथा आपका हाल गुलाटी की बुआ जैसा हो सकता है.फिल्म का सबसे खुबसूरत पक्ष बेइंतहा , बेशर्त प्यार करने वाला गुलाटी और बेहद restless n confused character आलिया है.नहीं-नहीं आलिया बहुत क्लियर है straight फॉरवर्ड .इतनी साफ दिल की लड़कियां भला मिलती है आजकल ?
फिल्म देखने मेरे साथ गए दोस्तों को आलिया confused लगी थी पर मुझे नहीं.......मैं आलिया की बैचेनी महसूस कर सकती थी.यह बैचेनी कुछ कर पाने की,कुछ न कर पाने की, किन्ही अर्थों में मैडम बावेरी की बैचेनी से कम नहीं थी.हममे से कोई भी परफेक्ट नहीं है.किसी के पास परफेक्ट लाइफ नहीं.हर कोई परफेक्ट लाइफ पाना चाहता है....किसी के पास प्यार है तो करियर नहीं. अगर करियर है तो प्यार नहीं.
"जिंदगी एक तलाश है और हर किसी को अपनी-अपनी मंजिलों की तलाश है."बात सिर्फ इतनी है की जिंदगी अब बहुत सी मंजिलों की तलाश हो गयी है.एक मंजिल तक पहुचते है तो दूसरी मंजिल पीछे छूट जाती है.सारी मंजिलों को समेत ले अपने साये में ,वह हौसला अब कहाँ..................
चलिए point पर आते है आलिया....जिसे पिता का प्यार नहीं मिला पर दूसरी तमाम कमियों को गुलाटी के प्यार ने भर दिया.जो २० साल की उम्र में अपनी verginity खो देने का दावा करती है तो क्या बुरा करती है .दूसरी तरफ गुलाटी की बहन अपनी शादी और शादी के बाद होने वाले बच्चों के सपनों में खोयी है .बात सिर्फ इतनी है जिंदगी भरपुर जिओ अपने अंदाज़ से.जो करना चाहते हो करो बस रिग्रेट मत करो.......खैर हमारी आलिया तो इतनी crystal clear है की रिग्रेट करने का कोई चांस ही नहीं..
अब भाई प्यार तो हो गया आ गयी करियर की बात .वह भी तो बनाना है.लड़की अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी, अपने लिए एक space चाहती थी , क्या बुराई है? बुरा हो गुलाटी महाराज का जो थोड़े दिनों के लिए भी उसे अकेला नहीं होने देते.....यही आलिया की खीज का कारण बन जाता है.she is commited .her life is one man show. then whats the hell gulati doing in Australia??? यह बात तो आप भी मानते होंगे जब तक कोई चीज़ आप कुछ दिनों के लिए खो नहीं देते तब तक अपनी जिंदगी में उसकी असली अहमियत नहीं जान सकते? यही आलिया के साथ हुआ .जब देखा माँ को बस खोने ही वाली है वापस अपने सपनों को छोड़कर आ गयी.दिखा सकता है कोई इतना साहस .हर किसी को पता है की माँ थोड़े दिनों के लिए ही नाराज़ होती फिर मान जाती पर यह आलिया की संवेदनशीलता थी की वह माँ को अकेला नहीं छोड़ना चाहती थी.उसे पता था की पिता के छोड़ने के बाद उसके इस फैसले से माँ किस कदर अकेलेपन से टूट सकती थी.माँ को टूटने से बचने के लिए उसने अपने सपनों ko टूटने देना बेहतर समझा.
एक जिंदगी में, एक दिन में आप तमाम तरह की बातें सोचते है , उनपर आप अमल करते है ,भले आपका पसंदीदा रंग सफ़ेद है,अगर हरे रंग की ड्रेस पर आपका दिल आ जाता है, उसे खरीद लेते है.पहन कर इतराते है.इसका मतलब यह नहीं की आप confused है .यह दिखाता है की आप जिंदगी को कितना जीते है !!!! अगर आलिया मास कॉम पढने जाती है और एक्टिंग का ऑफर मिल जाता है .क्या बुराई है ? आखिर पढने के बाद भी तो यही करना है तो अभी क्यों नहीं? जिंदगी इतनी complicated है थोड़े बहुत confusions चलते है.थोड़ी- बहुत गलतियाँ चलती है .सबसे बड़ी बात आप अपनी गलतियों से सीख लेकर उन्हें सुधार लेते हो और हमारी आलिया भी वही करती है....
भला हो , गुलाटी का जो finally आलिया को अकेला छोड़ देता है,यही वक़्त है जब आलिया को महसूस करने का समय मिलता है की उसे जिंदगी में क्या चाहिए ? उसकी असली ख़ुशी कहाँ है ?वह लौट आती है वापस अपने गुलाटी के पास जो unconditionaly उससे प्यार करता है.
कहानी का plus point है गुलाटी , सरस प्रेम का स्रोत , ऐसे लोग कहाँ मिलते है आजकल? आलिया भाग्यशाली थी.कही न कही या कभी न कभी प्रेम एकतरफा जरूर होता है.अगर एक बिगाड़ता है तो दूसरा संभलता है.overall love completes each -other .

Comments

Popular posts from this blog

लोग मुझे भूल जायेंगे,बाबूजी को याद रखेंगे,क्योंकि उन्होंने साहित्य रचा है -अमिताभ बच्चन

फिल्‍म समीक्षा : एंग्री इंडियन गॉडेसेस

Gr8 Marketing turns Worst Movies into HITs-goutam mishra