संग-संग : कुछ सिमटी-कुछ बिखरी सी है जिंदगी हमारी -किरण राव और आमिर खान

कुछ सिमटी-कुछ बिखरी सी है जिंदगी हमारी

-अजय ब्रह्मात्‍मज

आमिर खान-किरण राव की शादी सुर्खियों का हिस्सा रही है। दोनों निजी व व्यावसायिक जीवन का आनंद उठा रहे हैं। परस्पर समझदारी व भावनात्मक सुरक्षा उनके दांपत्य का संबल सूत्र है। उनसे हुई खास बातचीत।

दोस्ती का आधार

किरण : मेरी प्रेम कहानी 2003 में शुरू हुई। मैं आशुतोष गोवारीकर की फ‌र्स्ट असिस्टेंट डायरेक्टर थी। वह आमिर के साथ एड फिल्म बना रहे थे। हमारा सर्किल अलग था। मिलना-जुलना हुआ तो दोस्ती भी हुई।

आमिर : रीना से मेरी शादी तब टूट चुकी थी। हम फिल्म लगान के समय मिले। हमारे बीच रोमैंटिक लिंकअप नहीं था। दोस्ती थी, जो बाद में रोमैंस और प्यार में बदली।

किरण : यह प्यार हिंदी फिल्मों की तरह नहीं था। हालांकि आमिर के बारे में मुझे नहीं मालूम, लेकिन मैंने कई बार इन्हें पलट कर जरूर देखा। जब इनके साथ वक्त बिताया तो ये अच्छे लगे। सोचती थी, ये इतने संवदेनशील और डाउन टु अर्थ कैसे हैं? पहले तो यकीन ही नहीं हुआ। लगता था, ये तो हमारे जैसे ही हैं। मैं इनसे प्रेम करने लगी।

आमिर : रीना जी से 16 वर्षो का संबंध टूटा था, लिहाजा मैं भीतर कहीं टूटा हुआ था। किसी से कोई वादा करने की हालत में नहीं था। मुश्किल दौर था मेरा। मैं किसी से मिल नहीं रहा था। दिल चाहता है और मंगल पांडे के बीच चार साल का गैप इसीलिए आया। एड फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट था तो उन्हें करना ही था। मेरी जिंदगी में इमोशनल एंकर नहीं था.। किरण की दोस्ती ने मरहम का काम किया। इनके साथ से खुशी महसूस करता था। मुझे लगा कि हमें ज्यादा वक्त साथ बिताना चाहिए। हमारे रिश्ते की बुनियाद दोस्ती ही है।

किरण: हमारे रिश्ते में ईमानदारी और भरोसा था। हमने एक-दूसरे से वादा किया था कि सब कुछ स्पष्ट कहेंगे और शेयर करेंगे।

आमिर: सीधी बात है। मेरा रिश्ता मेरे लिए अहम है, तो जरूरी है कि मैं सब कुछ बांटूं।

स्वतंत्र सोच का भय

किरण: मां-पिता के मन में यह डर था कि उन्होंने मुझे एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के तौर पर विकसित किया था। मैं बहुत कुछ करना चाहती थी। मुझ पर शादी का दबाव नहीं था। उनकी चिंता यही थी कि कहीं मेरी स्वतंत्रता न खत्म हो जाए। आठ साल की उम्र से मैं अकेली रही हूं। वे मेरी स्वतंत्र सोच से डरते थे। आमिर से जुडने का यही खतरा उन्हें महसूस होता था कि उनके व्यक्तित्व में मेरा वजूद न दब जाए।

आमिर : मेरी इमेज जैसी मीडिया ने बना रखी है, लगभग वैसी ही उनके भी मन में थी। मैं जो हूं, वह किरण तो समझ रही थीं, लेकिन उनके माता-पिता शायद नहीं समझ पा रहे थे।

किरण : उनकी एक चिंता यह भी थी कि आमिर का तलाक हुआ है। वह भावनात्मक रूप से अस्थिर हैं तो कहीं रिश्ते पर इसका असर न आए। उनकी बेटी इतने बडे स्टार के साथ कैसे रहेगी? वह आमिर को संभालने में ही तो नहीं रह जाएगी? लेकिन जब वे आमिर से मिले तो उनकी आशंकाएं खत्म हो गई। सादा जीवन है पसंद

किरण : आमिर के कुछ खास गुण हैं। लोगों के साथ वक्त बिताना, अच्छे-बुरे की समझ, बडों की इज्जत करना..। इनमें मिडिल क्लास का सिंपल आउटलुक है। शोहरत से दूर हैं ये। अभी हम इनके टीचर के घर गए गिरगांव। वहां जो खाना पका था, इन्होंने वही खाया। नीचे फर्श पर बैठे और सबसे बातें करते रहे।

आमिर : बडे स्टार्स डरते हैं कि कहीं जाएंगे तो भीड जमा हो जाएगी। मुझे लोगों के साथ मिलने, हाथ मिलाने और बातें करने में दिक्कत नहीं होती। धक्के लगते हैं, पर कोई बात नहीं। मुझे लगता है भीड में घुस जाएं, उसका हिस्सा बन जाएं तो भीड शांत हो जाती है। उससे भागते हैं तो वह पीछे भागती है। मैं लोगों से मिलना चाहता हूं, जानना चाहता हूं कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है। मैं अच्छा श्रोता हूं, जिज्ञासु हूं। कई बातें जानना चाहता हूं।

किरण : आमिर लोगों को घर बुलाना पसंद करते हैं। खाना न हो तो अंडा-ब्रेड चलता है। ये कहते हैं, घर बडा हो या न हो, दिल में जगह होनी चाहिए। यही कहते हैं न आप आमिर!

आमिर : हां, मैं अनौपचारिक रहता हूं। मैं खास दावतें नहीं देता। दोस्तों को बुलाने का मन करता है तो बुला लेता हूं।

किरण : किसी के घर जाने में भी आमिर को फर्क नहीं पडता। वे नहीं चाहते कि मेजबान अलग इंतजाम करे। सबसे खास बात यह है कि ये कमाल के पति हैं। बहुत संवेदनशील हैं। हालांकि कई लडकियां टफ हस्बैंड चाहती हैं।

आमिर : टफ भी हूं मैं। गजनी नहीं देखी?

किरण : चुप रहो.. बताने दो। आमिर को इमोशन बांटने में दिक्कत नहीं होती। घरेलू किस्म के व्यक्ति हैं। अम्मी के साथ, मेरे साथ बातें करना इन्हें अच्छा लगता है। इन्हें तभी मजा आता है, जब सारे लोग इनके इर्द-गिर्द रहें। शुरू में इस कारण मुझे दिक्कत हुई थी।

हम पास-पास हैं

आमिर : किरण अकेली रही हैं। लाइफस्टाइल अलग थी इनकी। घर से भी अलग रहीं। मुझे डर था कि कैसे सबके साथ एडजस्ट करेंगी।

किरण : आमिर के घर पर सभी लोग बडे प्यारे हैं, मेरा खयाल रखते हैं। अम्मी ऊपर के फ्लैट में ही रहती हैं। हम वहां चले आते हैं।

आमिर : हम पास-पास ही रहते हैं। फैसल सामने के फ्लैट में हैं। मैं और अम्मी इस बिल्डिंग में हैं। नुजहत और इमरान पीछे के बंगले में हैं। उसी बंगले के कोने पर रीना हैं बच्चों के साथ। रीना के माता-पिता भी थोडी दूर पर हैं। सारे लोग 100 गज की दूरी में हैं।

किरण : हम इतने करीब रहते हैं कि मुझे तो संयुक्त परिवार जैसा ही एहसास होता है।

आमिर : किरण के मिजाज में खुशी है। इनका चेहरा हमेशा खिला रहता है। ये मायूस नहीं होतीं, गुस्सा नहीं करतीं। दोस्ती-गर्मजोशी है इनके स्वभाव में। यह सब बडा संक्रामक है। किरण से दोस्ती के बाद मन में शंका थी कि मेरे बच्चों के साथ इनका व्यवहार कैसा रहेगा। रीना से अलग होने के बाद खयाल भी नहीं था कि किसी से जुड सकूंगा। रीना, मैं और दोनों बच्चे आहत थे, इसलिए मन में यह बात थी कि कोई भी आए, वह मेरे बच्चों से जुडे और बच्चे उसे पसंद करें। उन दिनों मैं बच्चों के साथ ज्यादा वक्त गुजार रहा था। बच्चे किरण से मिले, उन्हें पसंद किया और उनसे ट्यूनिंग अच्छी हो गई। बाद में मैंने बच्चों से कहा कि किरण मुझे अच्छी लगती हैं, अगर वे हमारे साथ रहें तो? उन्हें कोई ऐतराज नहीं था। रीना किरण को लगान के समय से ही जानती थीं। तलाक के बाद भी हमारे रिश्ते में दूरी नहीं आई है। मेरी छोटी बहन फरहत की शादी रीना के भाई राजीव से हुई है। मेरे भाई-बहन रीना को बहुत पसंद करते हैं। तलाक के बाद उन्होंने रीना को सबसे ज्यादा सपोर्ट किया। वे पहले रीना का हाथ थामते थे, फिर मेरा थामते थे।

निजी-प्रोफेशनल दोस्ती

किरण : हम एक-दूसरे पर निर्भर हैं। शुरू में प्रोडक्शन में मेरा इन्वॉल्वमेंट नहीं था। जानना चाहती थी कि इनकी लाइफ में कैसे फिट हो सकती हूं। फिर 2004 से हम साथ रहने लगे।

आमिर : लगान के समय सोचा नहीं था कि मैं प्रोडक्शन हाउस को चालू रखूंगा। उसमें मेरे अलावा आशुतोष, रहमान व रीना का योगदान था। तभी प्रोडक्शन हाउस की योजना बनाई थी। रिश्तों में दरार आने पर वह रुक गई।

किरण : प्रोडक्शन हाउस जमाने के दौरान ही एहसास हुआ कि मुझे इस काम में भी मजा आता है। आमिर डेमोक्रेटिक लीडर हैं। सबकी राय के बाद ही फैसला लेते हैं। तारे जमीन पर एक अलग व स्पेशल प्रोजेक्ट था।

आमिर : इसमें पहले दो महीने किरण मेरी पहली असिस्टेंट थीं।

किरण : आमिर के साथ काम करके मजा आता है। मुझे लगता कि यह मेरा ही काम है।

वक्त का रोना

किरण : आमिर घर में होते हैं तो भी इनका दिमाग काम में रहता है। मैं कहती हूं, आपके पास मेरे लिए वक्त नहीं, तो दुखी होते हैं।

आमिर : ज्यादा वक्त तो इन्हें देता हूं, फिर भी इनकी शिकायत बनी रहती है। वैसे मैंने भी कई दफा इनसे वक्त की शिकायत की है। अब देखिए, ये कल ही बैंगलोर जा रही हैं।

किरण : और ये हर दो घंटे पर पूछ रहे हैं कि क्यों जा रही हो? दो दिन वहां क्या करोगी? हम एक-दूसरे के बिना रह ही नहीं पाते।

आमिर : मैं आत्मकेंद्रित किस्म का व्यक्ति हूं शायद। जिस काम में मजा आता है, उसी में डूब जाता हूं। मैं किरण और अपने बच्चों, जुनैद व आयरा के बारे में नहीं सोच पाता।

फैसलों का हक

किरण : कंपनी और प्रोडक्शन के फैसले हम मिल कर लेते हैं। अंतिम निर्णय आमिर का ही होता है, लेकिन सभी की राय ली जाती है। आमिर के अनुभवों का फायदा हमें मिलता है।

आमिर : दर्शकों से मेरा रिश्ता बीस सालों से भी ज्यादा पुराना है। वे मेरी फिल्में मेरी वजह से देखते हैं। इसलिए प्रोडक्शन के मामले में वीटो अपने पास रखता हूं। हालांकि इस्तेमाल मैं कम ही करता हूं। अमूमन नए डायरेक्टर्स ही मेरे साथ रहे हैं, लिहाजा फाइनल कट मेरा होता है।

किरण : घर के फैसले अधिकतर मैं लेती हूं। हमारी पसंद समान है। दिक्कत नहीं होती।

आमिर : किरण की रुचियां अच्छी हैं। पेंटिंग, म्यूजिक, घरेलू सामान..इनकी समझ किरण में अधिक है। उनका एक्सपोजर मुझसे ज्यादा है।

माफ करें खुश रहें

किरण : मुझे लगता है कि प्यार के साथ रिश्तों में परस्पर भरोसा और सम्मान जरूरी है। पार्टनर की कद्र करना और उसकी बात को गौर से सुनना-समझना बेहद जरूरी है।

आमिर : दिल में सम्मान भावना होनी चाहिए। यह खयाल होना चाहिए कि जिससे शादी की है, उसमें दुनिया के सारे बेहतरीन गुण हैं। मेरे हिसाब से अगर साथी के लिए मन में इज्जत नहीं है तो साथ रहने का कोई मतलब नहीं।

किरण : लेकिन सम्मान के साथ प्यार भी हो।

आमिर : जिससे प्यार करते हैं, वह कभी गलती भी कर सकता है। ऐसे में उसे माफ करने की कूवत भी होनी चाहिए। सामने वाला सॉरी कह रहा है तो उसे दिल से माफ करें, क्योंकि झगडों का कोई अंत नहीं होता। लेकिन माफी रिश्तों में बहुत काम आती है। इससे रिश्ते में आया जहर भी अमृत में बदल जाता है, मेरा तो ऐसा ही मानना है।

आमिर: किरण मेरी हर बात में टांग अडाती हैं। ये शर्ट पहनो, वो टी-शर्ट पहनो, ये प्रेस किया हुआ नहीं है..। अब बताइए, कोई कैसे इन सबमें अपना समय व्यर्थ कर सकता है! मेरा सामान कोई छुए, मुझे पसंद नहीं है। कोई व्यवस्थित कर दे तो फिर मुझे पता ही नहीं चलता कि सामान कहां गया। बिखराव में ही ध्यान रहता है कि क्या चीज कहां है? मुझे पढना अच्छा लगता है। मेरे हाथ में किताब हो तो कोई कुछ न पूछे। सिंपल बातचीत भी न हो..। किताबें किरण की सौतन हैं। मेरी पर्सनैलिटी ऐसी है कि जो काम करता हूं, उसमें डूब जाता हूं। हर काम को बेहतर करने की कोशिश करता हूं। मीडिया की भी यही शिकायत रहती है कि मेरे पास वक्त नहीं है। दरअसल मैं खुद को काम से अलग नहीं कर पाता। कई जरूरी चीजें छूट जाती हैं। खुद मुझे भी लगता है कि काम के बीच मैं अम्मी, किरण, बच्चों या भाई-बहन सबको भूल जाता हूं। लेकिन किसी की जिंदगी में कोई क्राइसिस हो तो काम छोडने में एक सेकंड नहीं लगता।

किरण- आमिर को पता ही नहीं है कि वे क्या हैं और उन्हें क्या करना चाहिए। उनकी स्टडी और अल्मिरा देख लें। सारी चीजें भरी और बिखरी रहती हैं। आप उन्हें तरतीब भी नहीं दे सकते। आमिर पढते बहुत हैं और पढते समय डिस्टर्ब नहीं होना चाहते। लेकिन यह भी कोई बात हुई कि पत्नी घर लौटी है और आप किताब हाथ में लिए बैठे हैं। कहते हैं कि किताब पढते हुए अगर उन्होंने मेरा हाथ पकडा है तो वक्त तो हम साथ बिता रहे हैं न! यह थोडा उलझा हुआ मामला है। किताबें मेरी सौतन हैं और सौ फीसदी हैं। मैं किसी भी काम में इतना नहीं उलझती कि उन पर ध्यान न दे सकूं। मैं हर वक्त आमिर, बच्चों और सबका खयाल रखती हूं। यह कोई जरूरी तो नहीं कि जब किसी की जिंदगी में क्राइसिस हो, तभी मदद करें। आमिर में कमी नहीं है। मुझे लगता है उन्हें सचेत ढंग से काम से थोडा वक्त निकालना चाहिए। वे खुद को काम में जैसे झोंक देते हैं, उससे बचें। उन्हें खींचकर निकालना पडता है। बाद में उन्हें एहसास होता है कि वे थकते भी हैं। इनकी जिंदगी में वीकेंड का कंसेप्ट नहींहै।


Comments

श्रीमान आमिर खान जी, मैं आपसे एक बार मिलना चाहता हूँ. मेरी दिली इच्छा है एक बार आपसे मिलकर आपको एक ऐसी कहानी दूँ. जिसपर आप जैसा ही कोई शख्स फिल्म बना सकता है. मेरा आप जवाब देना चाहे तो कृपया हिंदी में ही दें. मैं अनपढ़ ग्वार जो ठहरा!

हमारी विनम्र अनुरोध के साथ ही इच्छा हैं कि-अगर आपको समय मिले तो कृपया करके मेरे (http://sirfiraa.blogspot.com, http://rksirfiraa.blogspot.com, http://mubarakbad.blogspot.com, http://aapkomubarakho.blogspot.com, http://aap-ki-shayari.blogspot.com, http://sachchadost.blogspot.com) ब्लोगों का भी अवलोकन करें. हमारी या हमारे ब्लोगों की आलोचनात्मक टिप्पणी करके हमारा मार्गदर्शन करें. हम आपकी आलोचनात्मक टिप्पणी का दिल की गहराईयों से स्वागत करने के साथ ही प्रकाशित करने का आपसे वादा करते हैं निष्पक्ष, निडर, अपराध विरोधी व आजाद विचारधारा वाला प्रकाशक, मुद्रक, संपादक, स्वतंत्र पत्रकार, कवि व लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" फ़ोन:9868262751, 9910350461

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