सिनेमालोक : 78 के हुए अमिताभ बच्चन

 

सिनेमालोक

78 के हुए अमिताभ बच्चन

-अजय ब्रह्मात्मज

हाल ही में अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर लगाई. वह एक खास कंपनी का मास्क लगाये बैठे हैं. उन्होंने कंपनी का नाम भी लिखा. बहुत मुमकिन है कि वह अप्रत्यक्ष इंडोर्समेंट हो, लेकिन उसके आगे की पंक्ति हम सभी के लिए प्रेरक है. उन्होंने लिखा ‘15 घंटे काम है करना’. अब जरा हम अपने डेली रूटीन पर गौर करें. हम-आप कितने घंटे काम करते हैं? मैं युवा दोस्तों की बातें नहीं कर रहा हूं, जो किसी मल्टीनेशनल या नेशनल कंपनी के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ की वजह से 24 घंटे के मुलाजिम हो गए हैं. देश के वरिष्ठ नागरिक बमुश्किल चार-पांच घंटे काम करते हैं. हां उनका उनके दस-बारह घंटे सभी की आलोचना करने में जरूर खर्च होते हैं.

अमिताभ बच्चन की सक्रियता पर नीम और मजाक चलते रहते हैं. कुछ लोग कहते हैं ‘बुड्ढा मानता ही नहीं’. अमिताभ बच्चन ने फिल्म बना कर जवाब दिया ‘बुड्ढा होगा तेरा बाप’. कुछ लोग यह भी कहते हैं कि उन्हें अपने बेटे अभिषेक बच्चन के लिए काम करना पड़ता है. अमिताभ बच्चन बगैर काम किए नहीं रह सकते. मुझे उनके ट्विटर और ब्लॉग से प्रतीत होता है कि उनके हमउम्र दोस्त कम हैं. वे उनसे बहुत ज्यादा इंटरेक्ट नहीं करते. उनके पास हमेशा जवानों का हुजूम रहता है और वे उनसे नए गुर सीखते हैं. उन गुरों में वे अपना अनुभव मिलाते हैं और फिर नौजवान सहकर्मियों को चकित करते हैं.

हम सभी जानते हैं कि पिछले दिनों अमिताभ बच्चन कोविड-19 से ग्रस्त रहे. वे अस्पताल में भर्ती हुए. वहां से भी उनके अपडेट हमें मिलते रहे हैं. रोगशय्या से भी अपने विस्तारित परिवार(एक्सटेंडेड फैमिली) से संपर्क में रहे. उनके लिए संदेश भेजते रहे. इस वजह से इस बार उनकी बीमारी को लेकर मीडिया हड़कंप नहीं मचा. अपने दर्शकों और प्रशंसकों से जुड़ाव के मामले में वे युवा स्टार और कलाकारों से भी आगे हैं. बारह-पंद्रह घंटे काम करने के बाद सोने से पहले या फुर्सत मिलने पर काम के बीच ही वे सोशल मीडिया अपडेट करना नहीं भूलते. उनकी यह तत्परता और संलग्नता अध्ययन का विषय हो सकती है. मैंने कई बार लिखा है कि अमिताभ बच्चन और समकालीन सिनेमा के शोधार्थियों को उनके ब्लॉग और ट्वीट का बाकायदा अध्ययन करना चाहिए

अमिताभ बच्चन अपनी आत्मकथा नहीं लिखना चाहते. व्यक्तिगत और सामूहिक बातचीत में यह वे कई बार स्पष्ट कर चुके हैं. शायद उन्हें लगता है कि उनके पिता आत्मकथा लेखन में जो उत्कृष्ट उदाहरण छोड़ गए हैं. वह उस स्तर का नहीं लिख पाएंगे. जाहिर सी बात है कि उन पर इसका दबाव नहीं डाला जा सकता, लेकिन मुझे लगता है कि वे किश्तों में अपनी आत्मकथा लिख रहे हैं. उनके ब्लॉग को संकलित और संपादित किया जाए तो कई खंडों का एक किताब बनेगी. यह हमारे समय के एक समृद्ध,व्यस्त और उम्दा कलाकार की जीवनी के आकलन का वृहद् काम होगा. देश में मीडिया की पठानप्रशिक्षण के संस्थान और प्रकाशन संस्थान मिलकर इस दिशा में पहल कर सकते हैं.

इस बार 11 अक्टूबर रविवार है. उनके प्रशंसकों को उनके ‘रवि दर्शन’ की प्रतीक्षा रहती है. दिन सामान्य होते तो इस बार उनके बंगले जलसा के आगे भारी जमावड़ा होता. आमतौर पर अमिताभ बच्चन जन्मदिन के दिन भी काम करते रहते हैं. उनसे आग्रह होगा कि वह इस बार फेसबुक या ट्विटर लाइव् की व्यवस्था करें और सभी से मुखातिब हों. आगे से वे हर रविवार को ऐसा कर सकते हैं. अमिताभ बच्चन के बारे में हम सभी अधिक से अधिक जानना और उन्हें देखना चाहते हैं.

देश के मौजूदा मसलों पर उनकी खामोशी लोगों को हैरान करती है. दरअसल, यही उनकी शैली और आदत है. वे फौरी और मौजूं विषयों पर कभी नहीं बोलते. उनकी सार्वजनिक छवि अविवादास्पद है. जनहित में वे अनेक अभियानों के साथ जुड़ते हैं और सरकारी विज्ञापनों में भी नजर आते हैं. स्वयं या किसी संस्था के सहयोग से वे चैरिटी और दान भी करते रहते हैं. अपनी आलोचना और निंदा से बेपरवाह वे अपनी मर्जी से काम चुनते और करते हैं. हम यही चाहते हैं कि वे दीर्घायु होने के साथ सक्रिय रहे. वे हमारे समय की सदेह जीवित किंबदंती हैं.

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