संगीत मेरा सबका सूरज - ए आर रहमान



-अजय ब्रह्मात्मज
विनम्र और प्रतिभाशाली एआर रहमान से साक्षात मिलना किसी अनुभव से कम नहीं है। वे अपनी प्रतिभा से परिचित हैं,लेकिन तारीफ सुनने पर शर्म से लाल होने लगते हैं। संगीत के लिए समर्पित ए आर रहमान हमेशा प्रयोगों के लिए तैयार रहते हैं। प्रतिभाओं पर उनकी नजर रहती है। वे उन्हें मौका देने से भी नहीं चूकते। ए आर रहमान से यह खास बातचीत इम्तियाज बली की फिल्म ‘हाईवे’ के प्रोमोशनल वीडियो शुटिंग के दौरान हुई। इस म्यूजिक वीडियो में वे आलिया भट्ट के साथ दिखाई देंगे।

- शूटिंग का कैसा अनुभव रहा और वीडियो शूटिंग में आपको कितना मजा आता है?
0 मैं ज्यादा शूटिंग नहीं करता, लेकिन इम्तियाज जैसा कोई भरोसेमंद फिल्ममेकर का आग्रह हो तो कुछ भी करने के लिए मैं राजी हो जाता हूं।
- अभी तक आपने कितने वीडियो किए हैं?
0 सबसे पहले मैंने ‘मां तुझे सलाम’ किया था। फिर ‘जन गण मन’ किया था। बहुत ज्यादा म्यूजिक वीडियो नहीं किए हैं मैंने। ‘जय हो’ को इंटरनेशन वर्सन किया था।
- क्या शूटिंग के समय किसी प्रकार का दबाव भी रहता है।
0 एक ही दबाव होता है। वजन कम करने का, क्योंकि कैमरा आपके शरीर को बढ़ा देता है। आप बीस से पच्चीस प्रतिशत ज्यादा दिखने लगते हैं। कैमरे को मुझ से कुछ ज्यादा ही प्रेम है। वे मुझे तुरंत मोटा दिखाने लगते हैं।
- क्या लाइव परफारमेंस के समय भी आप कैमरों का ख्याल रखते हैं?
0 कहीं भी आप कैमरे पर आ रहे हैं तो खुद का ख्याल रखना पड़ता है। थोड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है। मैं यह भी ख्याल रखता हूं कि परफारमेंस के समय कैमरा किधर रखा है और किस एंगल से मुझे शूट कर रहा है। मैं एक्टर हूं नहीं कि हर एंगल से अच्छा लगूंगा। मैं सिंगर और परफार्मर हूं। मुझे मालूम है कि मैं किस एंगल से अच्छा लगता हूं। कुछ लोग परफेक्ट पैदा होते हैं। मैं दिखने में परफेक्ट नहीं हूं। अभी कोई तस्वीर भी खींचे तो मैं बता देता हूं कि किस एंगल से लें। कुछ एंगल से मेरी तस्वीरें थोड़ी अच्छी आती है।
- अपने वीडियो और फोटोग्राफ में भी आप स्वभाव के अनुसार शर्मीले दिखते हैं।
0 मैं एक्टर तो हूं नहीं। मेरा काम तस्वीरों में आना नहीं है। मैं म्यूजीशियन हूं।
- इम्तियाज अली की ‘हाईवे’ के बारे में क्या कहेंगे?
0 यह ट्रैवलिंग फिल्म है। यह फिल्म यात्रा करती है और हम उसके हमसफर हो जाते हैं। संगीत में कहीं-कहीं कहानी लीड ले लेती है। यह फिल्म जहां-जहां पहुंचती है, वहां-वहां का संगीत हमने इस फिल्म में रखा है। हमने उन सभी राज्यों की ध्वनियों और लोक संगीत के गुणों को अपने संगीत को समृद्ध किया है। कभी गीत में तो कभी पाश्र्व संगीत में आप इसे सुन सकेंगे। हमने गीतों में कभी फिल्म के थीम तो कभी माहौल पर ध्यान दिया है। कई बार हम चरित्रों के साथ भी चलते हैं। फिल्म में संगीत का बाहरी प्रभाव धीरे से आंतरिक प्रभाव के रूप में बदलता है।
- जैसे कि हम कहते हैं कि भारत विविध संस्कृतियों का देश है। क्या वैसे ही हम कह सकते हैं कि भारत विविध संगीत परंपराओं का भी देश है?
0 भारत की यह खूबी है कि तमाम विविधताओं के बावजूद वह एक है। ऐसे ही यहां की संगीत परंपराएं सुनने में विविध लग सकती हैं, लेकिन आत्मिक तौर पर एक हैं। हमारी विविधता ही हमारी विशेषता है। विदेशों में हर शहर एक जैसे लगते हैं, लेकिन भारत में केरल के शहर उत्तरप्रदेश से भिन्न है तो गुजरात के शहर असम से बिल्कुल भिन्न है। हर जगह की अपनी सांस्कृतिक विशेषताएं और परंपराएं हैं। भारत के संगीत और संस्कृति को समझने के लिए एक जिंदगी नाकाफी है।
- भारत के बारे में आपकी क्या विचार है। ऐसा लगता है कि भारत की स्वतंत्रता से आप बहुत प्रभावित हैं। समय-समय पर स्वतंत्रता की इस प्रेरणा से आप संगीत रचते रहे हैं?
0 मुझे इस देश ने बहुत कुछ दिया है। देश के लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं। देश के हर इलाके के लोग मुझे पहचानते हैं। उन्होंने ही मुझे सफल बनाया है। उनके प्रेम और स्वीकृति से ही मेरी पहचान है। मैं विदेशी प्रवास पर रहता हूं तो भारत की चुंबकीय शक्ति मुझे खींचती रहती है। भारत मेरे अंदर बसा है।
- संगीत कंपनियों और कलाकारों, तकनीशियनों के बीच चल रहे विवाद के बारे में क्या कहेंगे?
0 कलाकारों और तकनीशियनों के पक्ष में कुछ अच्छी बातें हुई हैं। अभी उसे स्वीकार करने में थोड़ी दिक्कत हो रही है। मुझे विश्वास है कि धीरे-धीरे सभी पक्ष उसे मान लेंगे। समय के साथ सब दुरुस्त हो जाएगा। सही दिशा में बढ़ा यह कदम है, इसलिए एडजस्ट करने में दिक्कत हो रही है। अभी हम टीदिंग प्रॉब्लम से गुजर रहे हैं। नया कानून अच्छा और सभी के हक में है।
- कहा और माना जा रहा है कि नए कानून को मनवाने की जिद में कलाकारों को काम नहीं मिल पा रहा है। सोनू निगम इसके उदाहरण हैं।
0 मुझे नहीं लगता है कि ऐसी कोई बड़ी दिक्कत होगी, जिसको जो चाहिए वह उसे मिल जाएगा। सोनू की अपनी पहचान है। वह बहुत बड़े कलाकार हैं। वह चाहें तो अपना लेवल लेकर आ सकते हैं।
- आपने हमेशा नए गायकों को मौका दिया है। बाद में उन गायकों को ज्यादा काम नहीं मिल पाया। क्या आप उनके प्रति जिम्मेदारी नहीं महसूस करते? आप अपने गायकों का चयन कैसे करते हैं?
0 मुझे उनकी आवाज अच्छी लगनी चाहिए। उस गाने के लिए जरूरी आवाज का चरित्र उनकी आवाज में हो। जो संबंध चरित्रों और कलाकारों में होता है, वही संबंध गीतों और गायकों में होता है। दोनों मिलकर प्रभाव डालते हैं। गीत सुनने पर यह एहसास होना चाहिए कि वे सीधे आपके लिए गा रहे हैं। उस गीत में और कोई आवाज विकल्प नहीं हो सकती। नए गायकों को मैं एक मुकाम दे सकता हूं। उसके आगे तो उन्हें खुद प्रयास करना होगा। मुझे अवश्य पहला मौका किसी से मिला, लेकिन उसके बाद मुझे कड़ी मेहनत करनी पड़ी। हमेशा कुछ नया, मधुर और सुंदर करना पड़ा,ताकि मैं सफल रहूं। ऐसा है नहीं कि हमेशा और लगातार किसी एक का समर्थन मुझे मिलता रहा। मुझे खुद राह चुननी और बनानी पड़ी। गायकों के साथ भी यही बात है। उन्हें अपना करिअर खुद बनाना होगा। गायन का अवसर देने से उन्हें आरंभिक एक्सपोजर तो मिल जाता है। यह खुद ही बड़ी बात है।
- आपने म्यूजिक स्कूल भी खोला है। उसके पीछे क्या उद्देश्य है?
0 मैं चाहता हूं कि देश में प्रशिक्षित संगीतकारों की तादाद बढ़े। यह म्यूजिक और टेक्नोलॉजी का कॉलेज है। इसमें देश-विदेश के छात्र आकर पढ़ सकते हैं। यह मेरा पुराना सपना था। मैं चाहता हूं कि अगली पीढ़ी भी संगीत से समृद्ध और संपन्न हो। मेरे यहां गुजरात, केरल, कश्मीर सभी जगह के छात्र हैं। उत्तर भारत के छात्र भी मेरे कॉलेज में आ रहे हैं।
- क्या किसी विदेशी फिल्म पर भी काम कर रहे हैं?
0 ‘मिडियन डॉलर आर्म’  डिज्नी की फिल्म है। इसके अलावा इम्तियाज अली की ‘हाईवे’ का संगीत पूरा कर रहा हूं।
- सलमान खान की फिल्म ‘जय हो’ को लेकर कोई विवाद था क्या? सुना कि ‘जय हो’ की कॉपी राइट आपके पास है?
0 कोई विवाद नहीं है। ‘जय हो’ का कॉपी राइट हमारे पास है। किसी भी प्रकार के दुरूपयोग से बचने-बचाने के लिए हमने इसे रजिस्टर्ड करवा लिया था। ‘जय हो’ का निर्माण इरोस कर रहा है। उनके साथ मेरे पुराने संबंध हैं। मैंने उन्हें नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट दे दिया था।
- आपके कई गीतों में ‘रे’ शब्द और ध्वनि आती है। यह एक प्रशंसक का निरीक्षण है।
0 ज्यादातर ‘रे’ गुलजार साहब के दिए हुए हैं। ‘सतरंगी रे’, ‘दिल से रे’, ‘जिया रे’, ़ ़ ़ मुझे लगता है यह उनका फेवरिट साउंड है। गुलजार साहब ने ही मुझे हर बार यह ध्वनि दी। ऐसा लगता है कि उन्हें इस ध्वनि से बहुत प्यार है।
- आपने गुलजार, प्रसून जोशी और अब इरशाद कामिल के साथ बेहतरीन काम किया है। क्या जैसे संगीतकार नई ध्वनियां लेकर आते हैं, वैसे ही क्या गीतकारों के पास भी नए शब्द होते हैं?
0 नए-पुराने भावों की अभिव्यक्ति बदलती रहती है। हर गीतकार के पास अपने प्रिय शब्द होते हैं। वे उनका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे शब्द ही किसी गीत में आकर्षण पैदा करते हैं। अगर एक ही शब्द और अभिव्यक्ति लगातार इस्तेमाल की जाएगी तो श्रोता और दर्शकों की रुचि खत्म हो जाएगी। कई बार एक ही भाव नए शब्दों में आने से कैचिंग हो जाते हैं।
- आप खुद ज्यादातर आध्यात्मिक या सूफी गीत गाते हैं। कोई खास वजह?
0 मैंने ‘हम्मा हम्मा’ जैसा फन गीत भी गाया है। अपने गानों की रफ रिकॉर्डिंग मैं अपनी आवाज में करता हूं। कई बार निर्देशक मुझ पर दबाव डालते हैं कि फायनल रिकॉर्डिंग में भी आप ही आवाज दें। मेरे लिए सूफी गीतों को गाना आध्यात्मिक साधना भी है। मुझे आनंद और सुकून मिलता है।
- क्या फिल्म लेखन, निर्देशन और निर्माण में भी जाने की कोई आकांक्षा है?
0 मैं फिलहाल एक फिल्म की  स्क्रिप्ट लिख रहा हूं। उम्मीद है इस साल की अंत तक यह फिल्म फ्लोर पर चली जाएगी। अपने स्क्रिप्ट के अंतिम चरण में हूं।
- किसी जमाने में युसूफ खान को आम स्वीकृति के लिए अपना नाम बदल कर दिलीप कुमार करना पड़ा। आप स्वयं दिलीप कुमार थे, जिन्हें बाद में ए आर रहमान नाम मिला। फिर भी इस देश ने आपको स्वीकारा और प्रेम दिया। देश के इस सेक्युलर बदलाव के बारे में क्या कहेंगे?
0 अभी श्रोता या दर्शक किसी और चीज की परवाह नहीं करते। वे सिर्फ आपका काम देखते हैं। आपकी ईमानदारी उन्हें आपके काम और चेहरे में दिख जाती है। अगर आप मानव समाज के लिए कुछ बेहतर काम कर रहे हैं तो वे आपको प्यार देते रहेंगे। मैंने दो पीढ़ी पहले की कहानियां सुनी हैं कि स्थितियां कितनी खराब थीं। लोगों को उनकी धार्मिक पहचान से अलगाया जाता था। अभी सब कुछ बदल गया है। अभी प्रतिभा की कद्र है।
- क्या आपको कभी किसी प्रकार की अवहेलना से गुजरना पड़ा है?
0 कभी नहीं। मेरी जानकारी में तो कभी ऐसा नहीं हुआ। मेरा स्कूल और मेरे स्टूडियो में कोई भेद-भाव नहीं रखा जाता। हम सूफी सिद्धांत पर चलते हैं। सूरज धूप देने में कोई भेद-भाव नहीं करता। वैसे ही हवा, समुद्र और प्रकृति की सारी संपदाएं सभी के लिए हैं। हमारा संगीत भी सब के लिए है। मैं बिना शर्तों के इसे सभी को देता हूं।
- हम यह तो जानते हैं कि आपका नाम ए आर रहमान कैसे पड़ा, क्या आप हमें बताएंगे कि आपका नाम दिलीप कुमार कैसे पड़ा?
0 मुझे लगता है कि मेरे पिता दिलीप कुमार के फैन रहे होंगे।
- हिंदी फिल्मों का संगीत किसी दिशा में बढ़ रहा है?
0 पॉकेट-पॉकेट में कई सारी अच्छी चीजें हो रही हैं। लोग केवल टीवी पर देखने-सुनने के बाद राय बना लेते हैं। बहुत सारी चीजें अभी लोगों के सामने नहीं आ पा रही हैं। फिल्म और टीवी से बाहर संगीत में बहुत काम हो रहा है। शास्त्रीय संगीत में भी नई प्रतिभाएं आ रही हैं। अच्छी बात है कि अब किसी की प्रतिभा दबी नहीं रह सकती। कोई जरिया न मिले तो आप युटूब पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। मैंने कई प्रतिभाओं को युट्यूब से चुना है। मैंने उनका इस्तेमाल किया है। ‘हाईवे’ का एक गीत जोनिता गांधी ने गाया है। उन्हें मैंने युट्यूब पर ही खोजा था। अब कोई बाधा या अड़चन नहीं है।
- इम्तियाज के साथ अपनी संगत को कैसे देखते है?
0 हम दोनों एक-दूसरे के प्रशंसक हैं। मेरे लिए वे तीसरी पीढ़ी के निर्देशक हैं, जिनके साथ मैं काम कर रहा हूं। उनके पास बिल्कुल नए विचार होते हैं। ‘रॉकस्टार’ इसका बड़ा नमूना है। हम दोनों ने पहली बार इस फिल्म में एक साथ काम किया था। हम दोनों अपने काम से आगे बढ़ कर कुछ खोज रहे थे। उसका लाभ मिला। ‘रॉकस्टार’ नाम से एक खास किस्म के संगीत की उम्मीद रहती है, लेकिन फिल्म में बिल्कुल अगल संगीत है।
- आलिया भट्ट के बारे में कुछ बताएं?
0 आलिया का व्यवहार दोस्ताना है। उसे देखते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। मैंने पहली बार किसी अभिनेत्री के साथ शूटिंग की है। वह मेरी आधी उम्र की है।




Comments

sanjeev5 said…
रेहमान साहेब थोड़ा संगीत पर भी ध्यान देते तो और अच्छा लगता। लगता है की वो मेलोडी तो भूल ही गये हैं। सारा गीत आजकल रिदम पर ही चलता है। एक अरसा हो चला है की एक भी अच्छा गाना नहीं सुनाई दिया है।

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