अजय देवगन की परीक्षा!

-अजय ब्रह्मात्मज
आमिर खान के समान ही अजय देवगन के बारे में भी यही कहा और सुना जाता रहा है कि वे निर्देशन में दखलंदाजी करते हैं। सेट पर और सेट के बाहर डायरेक्टर के साथ ही उनका ज्यादा समय गुजरता है। दरअसल, करियर के आरंभ से अभिनेता अजय देवगन ने निर्देशक की कुर्सी के पास ही अपनी कुर्सी रखी और फिल्म निर्देशन की बारीकियों को सीखने-समझने की कोशिश करते रहे। इसलिए अगर यू मी और हम उनके निर्देशन में आ रही है, तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है।
उल्लेखनीय है कि अजय देवगन एक जमाने के स्टंट मास्टर और फिर ऐक्शन डायरेक्टर रहे वीरू देवगन के बेटे हैं, जिन्होंने सुनील दत्त की फिल्म रेशमा और शेरा से अपना फिल्मी जीवन आरंभ किया। पापा की देखादेखी अजय देवगन जब बड़े हो रहे थे, तो उनकी आंखों में भी फिल्मी सपने तैर रहे थे। इसीलिए उन्होंने अपने पिता के साथ काम आरंभ कर दिया था और शौकिया तौर पर वीडियो कैमरे से कुछ शूटिंग भी कर लेते थे। इच्छा तो थी कि फिल्म के हीरो बनें, लेकिन प्रश्न यह उठता है कि स्टारों के इस माया प्रदेश में कौन ऐक्शन डायरेक्टर के सामान्य चेहरे के बेटे को तरजीह देता? इसीलिए अजय देवगन का ध्यान कैमरे के पीछे की गतिविधियों में ज्यादा लगता था, क्योंकि वहीं संभावना दिखती थी। इसी क्रम में अजय देवगन प्रयोगशील निर्देशक शेखर कपूर के संपर्क में आए और उनके सहायक बन गए। तब शेखर कपूर दुश्मनी की शूटिंग आरंभ कर रहे थे और कुछ विज्ञापन फिल्में भी बना रहे थे।
शेखर कपूर के साथ थोड़े समय काम करने के बाद अजय देवगन ने दूसरी राह पकड़ ली। उन्होंने फिल्मों में बतौर हीरो खुद को आजमाने का जोखिम लिया। इरादा यह था कि अगर कहीं लोगों को पसंद आ गए, तो ठीक, वर्ना ऐक्शन और डायरेक्शन में तो जीवन खपाना ही है। ऐक्शन की खूबियों से सजा कर फूल और कांटे के हीरो को पेश किया गया। दो मोटर साइकिलों पर खड़े होकर दर्शकों के बीच आए अजय देवगन को तत्काल कामयाबी मिल गई। किसी ने सोचा भी नहीं था कि फिल्म इतनी बड़ी हिट साबित होगी! तब ट्रेड पंडितों और फिल्म व्यवसाय के माहिरों ने अजय देवगन पर ध्यान नहीं दिया था। उन्हें लगा था कि हर साल दर्जनों की तादाद में किस्मत आजमाने वाले फिल्मी-गैर फिल्मी परिवारों से आए नौजवानों में से ही एक अपना शौक पूरा कर रहा है। तब किसी को अंदाजा नहीं था कि वे जिसे नजरअंदाज कर रहे हैं, वह युवक भविष्य का भरोसेमंद ऐक्टर और स्टार साबित होगा! वर्तमान पीढ़ी के अभिनेताओं में अजय देवगन अकेले एक ऐसे अभिनेता हैं, जिन्हें दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्होंने हमेशा अपने किरदारों को संजीदगी से पर्दे पर निभाया। हर किस्म की भूमिकाओं में उन्होंने गंभीरता दिखाई। अभी कह सकते हैं कि निर्देशक का स्वभाव रखने के कारण वे निर्देशक के दृष्टिकोण को अन्य अभिनेताओं की तुलना में अच्छी तरह समझ लेते हैं। एक अभिनेता होने के बाद भूमिकाओं की चुनौतियां ज्यादा मायने नहीं रखतीं। किसी भी भूमिका को उसका संदर्भ और परिप्रेक्ष्य सार्थक बनाता है। ऐक्टर तो हमेशा स्क्रिप्ट की सीमा में बंधा होता है। स्क्रिप्ट से बाहर जाकर अगर आप कुछ करते हैं, तो या तो आप स्टार होते हैं या फिर वह किरदार ही ताकतवर होता है। फिलहाल सभी की नजर अजय देवगन की फिल्म यू मी और हम पर लगी है। इस फिल्म के परिणाम से अजय देवगन का ऐक्टिंग और डायरेक्शन करियर, काजोल का करियर और देवगन फिल्म्स की प्रतिष्ठा जुड़ गई है। खासकर तारे जमीन पर की शानदार कामयाबी के बाद वे अब अनजाने ही आमिर खान के मुकाबले में आ गए हैं। हालांकि यू मी और हम को लेकर अजय देवगन के मन में कोई घबराहट नहीं है, लेकिन पंडितों, भविष्यवक्ताओं और आलोचकों का क्या करेंगे, जो समय से पहले सब कुछ पढ़ने, देखने और बताने को विह्वल रहते हैं!

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