थोड़ी तो पागल हूं: सोनम कपूर

-अजय ब्रह्मात्‍मज 


फिल्मों की संख्या और हिट-फ्लॉप के लिहाज से देखें तो सोनम कपूर के करियर में कोई उछाल नहीं दिखता, लेकिन फिल्म, परफार्मेस और फिल्म इंडस्ट्री में उनकी मौजूदगी पर गौर करें, तो पाएंगे कि सोनम का खास मुकाम है। वे सही वजहों से खबरों में रहती हैं और उनके प्रशंसकों की तादाद बढ़ती जा रही है। उनकी आई हेट लव स्टोरीज इसी महीने रिलीज होगी। फिर आएगी आयशा और फिर..। बातचीत सोनम से..

प्रेम कहानी के बारे में क्या कहेंगी?

मुझे व्यक्तिगत तौर पर प्रेम कहानियां बहुत पसंद हैं। आई हेट लव स्टोरीज के मेरे किरदार सिमरन को भी लव स्टोरीज अच्छी लगती हैं। इमरान खान इस फिल्म में जे के रोल में हैं। उन्हें लव स्टोरीज अच्छी नहीं लगतीं। दोनों मिलते हैं। दोनों के बीच नोक-झोंक चलती है और फिर दोनों के बीच भारी कन्फ्यूजन होता है।

आई हेट लव स्टोरीज किस बैकड्रॉप की कहानी है?

फिल्मी बैकड्रॉप है। दोनों एक फिल्म डायरेक्टर के असिस्टेंट हैं। वह डायरेक्टर लव स्टोरीज के लिए मशहूर है। इमरान असिस्टेंट डायरेक्टर हैं और मैं आर्ट डायरेक्टर हूं। हम दोनों की सोच अलग है। ज्यादातर मामलों में हम दोनों एक तरह से सोचते ही नहीं। जे को सिमरन की जिंदगी नकली लगती है। उसे लगता है कि सिमरन फिल्मी पर्दे से निकल कर बाहर आ गई है। वास्तविक दुनिया से उसका कोई वास्ता नहीं है। उसकी जिंदगी में सब कुछ परफेक्ट है।

सिमरन तो बड़ा पॉपुलर नाम है हिंदी फिल्मों का?

बिलकुल, हिंदी फिल्मों के प्रभाव में ही मेरा नाम सिमरन पड़ा है। जे को लगता है कि मैं बिल्कुल फिल्मी हूं। रियल दुनिया में ऐसी लड़की नहीं होती। जे सिमरन को थोड़ी पागल भी समझता है।

इमरान खान के साथ काम करने का अनुभव मजेदार रहा होगा। आप दोनों समान उम्र के हैं।

इमरान की कुछ खूबियां हैं। वे बड़े ही संस्कारी और मेहनती तो हैं ही, बहुत विनम्र और बैलेंस्ड मिजाज के भी हैं। वे किसी झंझट और खिटपिट में नहीं रहते। वे आते हैं, अपना काम करते हैं और चले जाते हैं। फिल्म खत्म होते-होते वे मेरे दोस्त भी बन गए हैं। हमारी दोस्ती ऐसी है कि साथ में फिल्म मिले, तो हम दोनों अवश्य करना चाहेंगे।

आप खुद एक फिल्मी परिवार से हैं। एक्टिंग से पहले आप संजय लीला भंसाली की असिस्टेंट रहीं। सिमरन का किरदार आपके लिए नया नहीं रहा होगा?

इस किरदार को समझने और उसमें ढलने में अधिक मेहनत नहीं लगी, लेकिन शूटिंग के समय उसे परफॉर्म करते समय ध्यान देना पड़ा। सिमरन मेरी जिंदगी के करीब है।

पहले भंसाली और फिर राकेश मेहरा जैसे डायरेक्टर के साथ काम करने के बाद आपने पहली बार किसी जवान और नए डायरेक्टर के साथ काम किया, कैसा अनुभव रहा?

पुनीत यंग और फ‌र्स्ट टाइम डायरेक्टर हैं। वे जिंदगी को बिल्कुल अलग नजरिए से देखते हैं। उनका लेखन बहुत अच्छा है। इस उम्र में ही उन्होंने लेखन और निर्देशन एक साथ किया है। मिलने पर शक हो सकता है कि इतना यंग लड़का कैसे डायरेक्ट करेगा, लेकिन स्क्रिप्ट पढ़ने के साथ ही पता चल जाता है कि वे बखूबी डायरेक्ट कर सकते हैं। फिल्म के संवाद अच्छे हैं। उन्होंने फिल्म के गाने भी खुद चुने हैं। वे बहुत ही प्रतिभाशाली हैं। अपनी उम्र के हिसाब से वे अधिक समझदार हैं।

समान उम्र के लोगों के बीच झगड़ा और मनमुटाव भी होते हैं..?

मेरा किसी से झगड़ा नहीं होता। मैं तो डायरेक्टर की ऐक्ट्रेस हूं। वे जैसा कहते हैं, वैसा करती हूं। अगर कभी किसी डायलॉग या सीन में मुझे बदलाव की जरूरत महसूस होती है, तो मैं पूरे रेसपेक्ट के साथ डायरेक्टर से कहती हूं। वे मान लें तो ठीक, न मानें, तो मैं कोई जिरह नहीं करती। कागज पर लिखी चीजों को परफॉर्म करते समय थोड़ा-बहुत तो बदलना ही पड़ता है।

आपकी एक पहचान फैशन आइकॉन की भी है। यह कैसे हुआ?

मुझे अच्छे कपड़े पसंद हैं और लोग उस पर लिखते रहते हैं, इसलिए चर्चा हो जाती है। सच कहूं, तो मुझे कपड़े बहुत पसंद हैं और मुझे सजना-धजना अच्छा लगता है। इसमें मेरा मन लगता है। आजकल की लड़कियां ज्यादा कैजुअल रहती हैं, लेकिन मुझे लगता है कि पब्लिक फीगर को थोड़ा सजकर रहना चाहिए। लोग आपको देख कर खुश होते हैं। फिर उन्हें खुशी से क्यों महरूम करें। मैं मानती हूं कि लड़कियों को सज-संवर कर रहना चाहिए। किसी और के लिए नहीं, मैं तो खुद के लिए करती हूं और फिर सिर्फ कपड़े ही नहीं होते। उसके साथ ज्वेलरी, एक्सेसरीज, जूते और मेकअप भी.., इन सब पर ध्यान देती हूं।

तो कोई ब्रांड या डिजाइनर पसंद है या जो अच्छा लग जाए..?

मैं चुन-चुन कर ड्रेसेज लेती हूं। अगर कोई साड़ी पसंद आ जाए, तो उसे लेकर मैं उसका कॉन्सेप्ट बदल सकती हूं। मैं साड़ी, शर्ट-पैंट, सलवार, कमीज और बाकी दूसरी ड्रेसेज भी पसंद करती हूं।

कह सकते हैं कि आप बाद में डिजाइनर बनेंगी और आपका भी एक ब्रांड होगा?

ना बाबा ना। मैं लिखना चाहूंगी। मैंने लोगों को पहले भी बताया है कि मैं राइटर बनना चाहती हूं। मुझे फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखनी है। मैं बाद में फिल्में भी बनाऊंगी। अपनी स्क्रिप्ट पर फिल्म बना कर मुझे बहुत खुशी होगी।

बीच में खबर आई थी कि आप पापा के साथ एक फिल्म कर रही हैं?

गलत खबर थी। मुझे पापा के साथ फिल्म करनी है, लेकिन कोई अच्छी स्क्रिप्ट मिले और डायरेक्टर हम दोनों को ढंग से पेश करे, तभी। फिलहाल ऐसी कोई फिल्म नहीं है।

आयशा के बारे में अभी क्या बताएंगी?

मेरी बहन उसे प्रोड्यूस कर रही है। वह मेरी फेवरिट किताब पर आधारित है। किताब की लेखिका जेन आस्टन हैं। यह किरदार उन्हें भी बहुत पसंद रहा है। मूल किताब का नाम एम्मा है। इस फिल्म में अभय देओल मेरे साथ हैं। नए ऐक्टरों में उनकी खास पहचान है। यह रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है। दर्शकों को पूरा मजा आएगा। अभी मजेदार फिल्में करूंगी।

कोई कॉमेडी फिल्म भी कर रही हैं?

थैंक्यू कर रही हूं। पिछले चार साल में मुझे एहसास हुआ है कि मेरा स्ट्रॉन्ग प्वॉइंट कॉमेडी है। मैं कॉमेडी फिल्मों में खुद को देखना चाहती हूं। यह भी पता चल जाए कि मैं कितना कुछ कर पाती हूं। वैसे, मुझे पूरा भरोसा है कि मैं सफल रहूंगी।

और मौसम की क्या खबर है?

उस फिल्म के प्रति मेरी भी जिज्ञासा है। मैं शूटिंग के लिए जा रही हूं। अभी मुझे जो मालूम है, वह मैं आपको नहीं बता सकती। मतलब फिल्म के बारे में कुछ नहीं बताऊंगी। पंकज कपूर जी तो पंकज कपूर ही हैं।

खबर थी कि कई सारी हीरोइनों पर विचार करने के बाद आपका नाम इसके लिए फाइनल हुआ?

जी, मैं बहुत लकी हूं। मेरा दूसरा नाम लकी ही है। मुझे पता नहीं है कि क्या-क्या हुआ, लेकिन अपने चुने जाने से मैं बहुत खुश हूं।

आपकी उम्र में तो इश्क-प्रेम आदि की खबरें आनी चाहिए..?

मैं पर्सनल लाइफ के बारे में बात नहीं करूंगी। कोई मेरा दोस्त या प्रेमी है कि नहीं है, यह सब नहीं बताऊंगी। हां, मैं अपने दोस्त और परिवार के लिए पूरा समय निकालती हूं। अगर वे नहीं होंगे तो काम भी नहीं होगा। इमोशनल ऐंकरिंग तो होनी चाहिए।

आपको खुद कौन सी लव स्टोरी वाली फिल्म पसंद है?

दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, मुगल-ए-आजम और कागज के फूल।

कहते हैं कि अभी के यूथ करियर के आगे बाकी इमोशन पर गौर नहीं करते?

बाकी चीजें करेंगे तो करियर कैसे बनाएंगे। अभी इतना कॉम्पिटीशन है। आगे रहने या बने रहने के लिए जरूरी है कि हम अपने काम पर ध्यान दें। आजकल सब कुछ बहुत प्रैक्टिकल और फास्ट हो गया है। मेरे दोस्त भी ऐसे ही हैं, लेकिन मैं आपको बता दूं कि दुर्भाग्य से मैं ऐसी नहीं हूं। मेरे लिए करियर के समान दूसरी चीजें भी महत्व रखती हैं। मैं थोड़ी पागल हूं। मैं दिमाग से कभी नहीं सोचती।

Comments

Jandunia said…
इस पोस्ट के लिेए साधुवाद
Indli said…
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Anonymous said…
app logon ke liye kuch bhi kahna...
hum jaison keliye bahut mushkil hai...bas itna kahti. app log likhte hain to hum jaise log.kuch jankari palete hain. warna ajj is bhag doud ki jindagee main insan apne kam se bahar ki duniya dekh hin nahin sakta. app sabon ko bahut sara dhanyawad. is tarah nahin dekh ne wali filmon se bhi rubaru karane ka

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