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Tuesday, October 19, 2010

फिल्‍म समीक्षा : रामायण-द एपिक

-अजय ब्रह्मात्‍मज

राम की चिर-परिचित कहानी को लेकर बनी रामायण-द एपिक की नवीनता एनीमेशन, विजुअल ट्रीट और किरदारों की आवाज में है। नयी तकनीक से त्रिआयामी प्रभाव देती रामायण-द एपिक भव्य, रंगीन और रोचक फिल्म है। निर्माता केतन देसाई और निर्देशक चेतन देसाई राम कथा के मुख्य अंशों को लेकर बच्चों के मनोरंजन और ज्ञान के लिए एक उपयोगी फिल्म बनाई है।

केतन और चेतन की टीम ने राम, रावण, सीता, लक्ष्मण और हनुमान का चारित्रिक विशेषताओं के साथ उनका रूप गढ़ा है। वे आकर्षक और उपयुक्त दिखते हैं। रामायण-द एपिक में कथा के भाव पक्ष से अधिक एक्शन दृश्यों को चुना गया है। वीडियो गेम और विदेशी एनीमेशन फिल्मों के इस दौर में बाल और किशोर दर्शकों को पुरानी कथा शैली से नहीं रिझाया जा सकता। निर्देशक ने उनकी बदली मानसिकता को ध्यान में रखते हुए एक्शन और ड्रामा से भरपूर सीन रखे हैं, इसीलिए कहानी मुख्य रूप से वनवास के चौदह साल के आखिरी साल में घटी घटनाओं पर ही केंद्रित है। सीता अपहरण, सुग्रीव प्रसंग, हनुमान का लंका प्रवेश और लंका दहन, राम-रावण युद्ध आदि के चित्रण में निर्देशक की कल्पना नजर आती है। उनकी टीम ने बिल्कुल निराश नहीं किया है।

फिल्म रामायण-द एपिक की एक विशेषता किरदारों की आवाज है। बाल दर्शक भले ही उन आवाजों से पूर्व परिचित नहीं हों, लेकिन उनकी सुघड़ और सटीक आवाज किरदारों को जीवंत कर देती है। राम की शालीनता, सीता की सादगी, रावण का दंभ और हनुमान की श्रद्धा को मनोज वाजपेयी, जूही चावला, आशुतोष राणा और मुकेश ऋषि ने उपयुक्त स्वर दिया है। विशेष उल्लेखनीय है आशुतोष की आवाज। उन्होंने अपनी आवाज से रावण की क्रूरता और खल स्वभाव को अच्छी तरह संप्रेषित किया है।

फिल्म के एनीमेशन में रंग-रूप और आकार में ताजगी है। सभी किरदार नए लगते हैं। यहां तक कि कैकेयी और मंथरा की साजिश के दृश्य में भी उन्हें कुरूप करने की कोशिश नहीं की गई है। रामायण-द एपिक पारंपरिक आख्यान और आधुनिक तकनीक का सुंदर संयोग है। यह फिल्म बताती है कि हम एनीमेशन विधा में लगातार दक्ष होते जा रहे हैं। अब निर्देशकों को पौराणिक आख्यानों के एनीमेशन के साथ ही आधुनिक भाव बोध की कथाएं भी एनीमेशन में लानी चाहिए।

रेटिंग: 1/2 साढ़े तीन स्टार


1 comment:

अभय तिवारी said...

अच्छा है! और ब्लौग का नया स्वरूप भी अच्छा है!