बापू की लकी बेटी श्रद्धा कपूर


-अजय ब्रह्मात्मज
    इस साल आई ‘एक विलेन’ और ‘हैदर’ की कामयाबी में पिछले साल की ‘आशिकी 2’ की कामयबी जोडऩे से हैटट्रिक बनती है। किसी नई अभिनेत्री के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। अब लोग का भूल गए हैं कि उन्होंने ‘तीन पत्ती’ और ‘लव का द एंड’ जैसी फिल्मों में भी काम किया था। श्रद्धा इस सफलता के साथ यह भी जानती हैं कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में हर नई रिलीज के साथ शुक्रवार को नया अध्याय आरंभ होता है। कभी कोई चढ़ता है तो कोई फिसलता है। वह कहती हैं,‘मैं फिल्म परिवार से हूं। मैंने बापू का करिअर देखा है। मेरे परिवार में और भी आर्टिस्ट हैं। फिल्में नहीं चली थीं तो परिवार ने ही ढाढस और साहस दिया। मैंने अपना ध्यान काम पर रखा। आज नतीजा सभी के सामने है। इसके लिए मैं अपने निर्देशकों और को-स्टार को सारा श्रेय देना चाहूंगी। हां,इसमें दर्शकों का प्यार भी शामिल है।’ श्रद्धा अपने पिता शक्ति कपूर को बापू पुकारती हैं।
    इस बातचीत के दरम्यान अचानक शक्ति कपूर हॉल में आए तो श्रद्धा ने इतरा कर बताया,‘बापू,इंटरव्यू दे रही हूं।’ पिता के चेहरे पर खुशी,संतुष्टि और गर्व की त्रिवेणी तैर गई। चमकती आंखों से उन्होंने बेटी को दुलारा और कहा,‘खूब अच्छा इंटरव्यू देना मन से।’ फिर मुझे संबोधित करते हुए जानकारी दी,‘आज श्रद्धा की नई गाड़ी आई है। उसने अपने पैसों से यह गाड़ी खरीदी है।’ पिता के इस संबोधन से श्रद्धा भी खिल उठीं। उन्होंने बताया कि मैंने एमएन सीरिज की मर्सीडिज खरीदी है। इसके चुनाव में घर वालों ने मेरी मदद की। अपनी कमाई से कुछ खरीदने का संतोष हर आय समूह के यूथ में होता है। श्रद्धा लगातार सफल फिल्मों का हिस्सा रहीं। साथ ही उन्हें सुर्खियों में रहना और मीडिया संभालना भी आ गया है। बीच में फोटोग्राफरों का एक ग्रुप नाराज हुआ तो उसे उन्होंने बहुत प्यार और आदर से संभाला।
    अपनी इमेज और फिल्मों को लेकर सचेत श्रद्धा घरेलू किस्म की लडक़ी हैं। छोटी-छोटी चीजों का शौक है। जैसे कि अपनी ािडक़ी के बाहर उन्होंने गमले रखे हैं। एक गमले में टमाटर लगाया था। एक ही टमाटर फला,लेकिन वह पौधे में ही लाल हुआ। उसकी मिठास कर बखान करने लगती हैं तो श्रद्धा को सही शब्द नहीं मिल पाते। चूंकि बातचीत हिंदी में चल रही थी,इसलिए वह हिंदी के शब्द खोज रही थीं। परिवार में हिंदी,मराठी और अंग्रेजी बोली जाती है। श्रद्धा तीनों भाषाओं में धाराप्रवाह बातें कर सकती हैं। मेरे सामने ही उन्होंने अपनी बाई से मराठी में बातें कीं।यह भी बताया कि सुनीता बाई ने उन्हें बचपन से देखा और संभाला है। मेरी फिल्में देखने जाती हैं तो आकर खुशी से रोने लगती हैं। प्यार से मुझे इतना चूमती हैं कि मेरा चेहरा लाल हो जाता है। उन्हें नहीं पता कि मैं अब नाम वाली एक्टर हो गई हूं। अभी भी पहले की तरह डांट देती हैं। श्रद्धा कहती हैं,‘जमनाबाई नरसी स्कूल के समय तो हिंदी पर अच्छी पकड़ थी। बाद में यहीं अमेरिकन स्कूल में चली गई। वहां अंग्रेजी माहौल थ। वह भी अमरिकी लहजे का ...स्कूल से निकली तो कॉलेज के लिए अमेरिका के बोस्टन चली गई। लौटने के बाद हिंदी का अभ्यास किया। वैसे सभी बताते हैं कि मेरा उच्चारण सही रहता है। मैं अपने संवाद अच्छी तरह बोल लेती हूं।’
    बचपन से जुहू के इसी अपार्टमेंट में माता-पिता के साथ रह रही श्रद्धा खिडक़ी से झांकते समुद्र की तरफ दिखा कर कहती हैं,‘यह घर 33 साल पुराना है। मैं इसमें रच-बस गई हूं। बापू बताते हैं कि मेरे पैदा होने के बाद उनकी जिंदगी और करिअर में उछाल आया। वे मुझे अपनी लगी बेटी मानते हैं। सच कहूं तो मैं लकी हूं। उन्होंने कभी किसी बात की कमी नहीं होने दी। मेरे फैसलों का समर्थन किया। मुझे लगता है कि अगर बापू का सपोर्ट मिले तो हर लडक़ी अपनी ख्वाहिशें पूरी कर सकती है।’ ‘हैदर’ के लिए मिल रही तारीफ से खु्रश श्रद्धा इन दिनों वरुण धवन के साथ ‘एबीसीडी 2’ की शूटिंग में व्यस्त हो गई हैं।
   

Comments

Popular posts from this blog

लोग मुझे भूल जायेंगे,बाबूजी को याद रखेंगे,क्योंकि उन्होंने साहित्य रचा है -अमिताभ बच्चन

फिल्‍म समीक्षा : एंग्री इंडियन गॉडेसेस

Gr8 Marketing turns Worst Movies into HITs-goutam mishra