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Tuesday, July 14, 2009

रेड कार्पेट पर मटकते चहकते सितारे


-अजय ब्रह्मात्मज
आए दिन पत्र-पत्रिका और टीवी चैनलों पर स्टारों के रेड कार्पेट पर चलने की खबर और तस्वीरें आती रहती हैं। कान फिल्म समारोह में पहले सोनम कपूर के रेड कार्पेट पर चलने की खबर आई। फिर इंटरनेशनल सौंदर्य प्रसाधन कंपनी ने स्पष्टीकरण दिया कि रेड कार्पेट पर ऐश्वर्या राय ही चलेंगी। अंदरूनी कानाफूसी यह हुई कि ऐश्वर्या ने सोनम का पत्ता कटवा दिया। समझ सकते हैं कि रेड कार्पेट का क्या महत्व है? ऑस्कर के रेड कार्पेट पर स्लमडॉग मिलेनियर के लिए भारतीय एक्टर अनिल कपूर और इरफान खान चले। साथ में फिल्म के बाल कलाकार भी थे। भारत में ऑस्कर रेड कार्पेट की तस्वीरें प्रमुखता से छपीं। उन्हें पुरस्कार समारोह के समान ही महत्व दिया गया। कान फिल्म समारोह में काइट्स की जोड़ी रितिक रोशन और बारबरा मोरी ने रेड कार्पेट पर तस्वीरें खिंचवाई।
देखें तो रेड कार्पेट पिछले कुछ सालों में प्रकाश में आया है। पहले विदेश से आए प्रमुख राजनयिक मेहमानों के लिए रेड कार्पेट वेलकम का चलन था। बाद में विदेश के पुरस्कार समारोह और कार्यक्रमों की तर्ज पर भारत मेंभी रेड कार्पेट का चलन बढ़ा। मुख्य कार्यक्रम से पहले स्टार और सेलिब्रिटी की रेड कार्पेट तस्वीरें बड़ा आकर्षण बनती हैं। पुरस्कार समारोह हो या कोई और कार्यक्रम.., वहां कुछ चुनिंदा स्टारों को ही मंच पर आने का अवसर मिलता है। रेड कार्पेट पर कार्यक्रम में भाग लेने आए छोटे-बड़े हर कलाकार कुछ मिनट के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं। रेड कार्पेट स्टारों के लिए दिखावे की खास जगह है। इसके लिए वे विशेष पहनावे तैयार करते हैं। हीरोइनों की बात करें, तो उनकी पूरी सज-धज रेड कार्पेट पर दिखती है। अपने परिधान, ज्वेलरी और सैंडल तक पर वे पूरा ध्यान देती हैं। विदेश की तरह अपने देश में भी अब रेड कार्पेट वॉक स्टाइल स्टेटमेंट बन चुका है। हाल ही में मकाऊ में आयोजित आईफा अवार्ड समारोह में सभी हीरोइन और हीरोज ने ग्रीन कार्पेट पर जलवे बिखेरे। उसके पहले फिल्मफेअर अवार्ड, कान फिल्म समारोह, ऑस्कर और कुछ अन्य समारोहों में रेड कार्पेट पर मटकते और चहकते सितारों को हम देख चुके हैं। रेड कार्पेट की लाली परावर्तित होकर उनके चेहरों को लाल कर देती है या रेड कार्पेट पर चलने के गर्व से उनके चेहरे लाल हो उठते हैं? कहना मुश्किल है, लेकिन इसमें शक नहीं कि रेड कार्पेट पर स्टारों की चमक, दमक और ठसक देखते ही बनती है।
दर्शक और प्रशंसक अपने पसंदीदा स्टारों को आकर्षक परिधानों में रेड कार्पेट पर चलते देखकर विस्मित और आह्लादित होते हैं। उनके मन में निश्चित ही उनकी ड्रेसेज को लेकर सवाल उठते होंगे। जैसे हमारी हीरोइन या हीरो को कितने महंगे और भड़काऊ ड्रेसेज खरीदने होते होंगे? ऊपर से उन्हें यह भी ध्यान रखना पड़ता है कि एक रेड कार्पेट पर पहने गए कपड़े दूसरे रेड कार्पेट पर न दिखे। सचमुच उनके कपड़े महंगे, आकर्षक और विशेष तौर पर समारोह के रेड कार्पेट के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन बड़े स्टारों को उन पर रत्ती भर भी खर्च नहीं करना पड़ता। डिजाइनर उनके लिए विशेष ड्रेसेज तैयार कराते हैं। बड़ी कंपनियां उनकी ड्रेसेज स्पॉन्सर करती हैं, तो ज्वेलरी कंपनियां उनके गहनों का खयाल रखती हैं। लोगों ने गौर किया होगा कि तस्वीरों के साथ यह हवाला दिया जाता है कि फलां कंपनी या फलां ड्रेस डिजाइनर के कपड़ों में सजी-धजी फलां अभिनेत्री रेड कार्पेट पर चली। इससे उन कंपनियों को प्रचार मिलता है। वास्तव में रेड कार्पेट जीवनशैली बेचने का नया माध्यम भी बन गया है। अक्सर देखने को मिलता है कि रेड कार्पेट में दिखे कपड़ों की खोज में अमीर परिवारों के बच्चे बड़ी दुकानों में आते हैं। वे इवेंट और कार्यक्रम का हवाला देकर या तस्वीरें दिखाकर वैसे कपड़ों की मांग करते हैं।
बिपाशा बसु रेड कार्पेट वॉक के पीछे के बिजनेस से अनभिज्ञता जाहिर करती हैं। उन्होंने अपने अनुभव बांटे, किसी समारोह में मेरी हिस्सेदारी और महत्व निर्भर करता है कि मैं उसमें कैसे कपड़े पहनूं। आईफा का वैसा ड्रेस मैंने इसलिए चुना था कि मुझे जल्दी-जल्दी तीन-चार बार मंच पर आना-जाना था। अगर साड़ी पहन लेती, तो थोड़ी मुश्किल होती। साड़ी पहनना मुझे अच्छा लगता है, लेकिन वह तभी संभव है, जब आप सीधे जाकर अपनी सीट पर बैठ जाएं। बिपाशा ने दूसरी हीरोइनों की तरफ से यह जोड़ा, हम सभी अपने प्रशंसकों के लिए सुंदर और आकर्षक दिखना चाहते हैं। हमें मालूम रहता है कि वे अपने घरों में बैठे हमें देख रहे होंगे। रेड कार्पेट और रैंप शो के एक फोटोग्राफर ने कहा, स्टार कुछ भी कहें। वे पहनावे में दिखावे पर ज्यादा जोर देते हैं। उनकी कोशिश होती है कि तस्वीर और फुटेज में उनके अंग दिखें। जब हम तस्वीरों के लिए उनसे रुकने का आग्रह करते हैं, तो वे स्किन शो करती हैं। हीरोइनें ऐसी तस्वीरों और फुटेज की वजह से चर्चा में रहती हैं। उक्त फोटोग्राफर ने इस बार आईफा समारोह के रोचक ट्रेंड का भेद बताया, सभी हीरोइनें पीछे से पोज दे रही थीं। उनकी पीठ खुली थी और एंगल ऐसा बनता था कि उनके अंग का उभार स्पष्ट दिखे। जाहिर है कि यह शो बिजनेस है। यहां कुछ दिखता है, तभी बिकता है।

2 comments:

मुन्ना कुमार पाण्डेय said...

सही कहा आपने...स्किन शो है यहाँ जब तक दीखता है तब तक बिकता है..कि मानसिकता हावी हो गयी है..

anjule shyam said...

ye hai..
shwo bijnesh yaha jo dikhta hai.wahi bikta hai.aaj har koi fata fat star banna chahta hai.bhale uske liye jaruri pratibha usmen ho ya na ho.bina mehnat ke rato rat stra banne ke liye nangepan ko jayaj bhi thahrate hai..
anjule shyam maurya
anjuleshyam@gmail.com