कैरेक्टर में ढलने की जरूरत क्यों?

-अजय ब्रह्मात्मज


यह खबर लोगों ने पढ़ी और देखी जरूर होगी। मधुर भंडारकर चाहते हैं कि उनकी फिल्म की नायिका किसी मॉडल की तरह छरहरी दिखे। इसी कारण वे प्रियंका चोपड़ा पर वजन कम करने का दबाव भी डाल रहे हैं। कहा जा रहा है कि शूटिंग के पहले प्रियंका को अपना वजन आठ किलोग्राम घटाना है। वे अभी तक आधे में पहुंची हैं। इस खबर के पीछे का सच यह है कि आजकल निर्देशक चरित्रों के अनुसार एक्टर के कायिक परिवर्तन पर बहुत जोर दे रहे हैं। दरअसल, एक्टर भी इससे आ रहे फर्क को महसूस करने के बाद ऐसे परिवर्तन के लिए सहज ही तैयार हो जा रहे हैं।

ज्यादा पीछे न जाएं और पिछले साल की फिल्मों को याद करें, तो तीन एक्टर इस नए ट्रेंड के सबूत के तौर पर दिखते हैं। गुरु में अभिषेक बच्चन, ओम शांति ओम में शाहरुख खान और तारे जमीं पर में आमिर खान॥। सच तो यह है कि इन तीनों ने ही फिल्म के चरित्र के अनुसार अपना वजन बढ़ाने और घटाने के साथ ही शरीर पर अलग ढंग से मेहनत भी की। गुरु के मुख्य किरदार के लिए अभिषेक बच्चन को अपना वजन बढ़ाना पड़ा। मध्यांतर के बाद में वे काफी तोंदिले और मोटे दिखाई पड़ते हैं। तोंद तो विशेष मेकअप से बनाई गई थी, लेकिन मोटापा उन्होंने अर्जित किया था। इसी प्रकार ओम शांति ओम में अपने सिक्स पैक एब को दिखाने के लिए शाहरुख ने महीनों वर्जिश भी की और विशेष खाद्य और पेय पदार्थो का सेवन किया। बयालीस की उम्र में ऐसा गठीला बदन बनाना और दिखाना सचमुच मुश्किल काम है। शाहरुख की महीनों की मेहनत बेकार नहीं गई। इस फिल्म को देखने के लिए दर्शकों की भीड़ टूट पड़ी और अगर पत्र-पत्रिकाओं की खबरों पर यकीन करें, तो ओम शांति ओम के बाद शाहरुख के महिला प्रशंसकों की संख्या और बढ़ गई है। तारे जमीं पर में आमिर खान को शिक्षक बनना था, इसलिए उन्होंने भी चोला बदला। हालांकि क्लोजअप शॉट में उनकी उम्र चेहरे से झांकती रही, लेकिन बाकी दृश्यों में वे जंचे।

माना जा रहा है कि आज के डायरेक्टर और एक्टर बेहद प्रोफेशनल हो गए हैं। इसलिए वे कैरेक्टराइजेशन पर बहुत जोर देते हैं। ऊपरी तौर पर यह सही भी लगता है, लेकिन लोग दो बीघा जमीन देखें और उसी के आगे-पीछे के वर्षो में बनी बलराज साहनी की कोई और फिल्म देखें, तो पाएंगे कि दो बीघा जमीन में बीमार और कमजोर रिक्शेवाले की भूमिका निभाने के लिए बलराज साहनी ने अपनी काया बदली थी। चूंकि बलराज साहनी उस जमाने की त्रयी (दिलीप कुमार, राजकपूर और देव आनंद) की तरह स्टार नहीं थे, इसलिए उन्होंने ऐसी मेहनत की। इसके अलावा, वे अभिनय की यथार्थवादी परंपरा से अभिभूत थे। खुद देव आनंद ने गाइड के क्लाइमेक्स के लिए अपना वजन कम किया था। पहले केवल सीरियस किस्म के एक्टर ही कैरेक्टराइजेशन के लिए इसे जरूरी मानते थे। लोग गौतम घोष की फिल्म पार देखें। इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह ने अपना वजन कम किया था और बाल भी कटवाए थे।

कैरेक्टराइजेशन पर आमिर खान ने सबसे पहले ध्यान दिया। गुलाम और सरफरोश के बाद वे अपनी हर फिल्म के साथ लुक बदलते हैं और जरूरत के मुताबिक वजन भी घटाते और बढ़ाते हैं। इस बदलाव के बाद उन्हें कामयाबी पाते देख दूसरे एक्टरों ने भी इस पर अमल करना शुरू किया। अब यह घोषित ट्रेंड बन गया है। इन दिनों एक्टर इस संबंध में बताते हुए खूब इतराते हैं।

निजी जिंदगी में वैसे शरीर पर ध्यान देने का फैशन संजय दत्त और सलमान खान से आरंभ हुआ। इन दोनों एक्टरों ने देश भर में जिम कल्चर फैला दिया। इनके बाद रितिक रोशन ने स्वस्थ शरीर का जम कर प्रचार किया और कसरत की कद्र बढ़ा दी। इसके बावजूद इन दिनों रणबीर कपूर जैसे भी एक्टर हैं, जो यह जरूरी नहीं समझते कि एक्टर को मांसपेशियां दिखानी चाहिए। हां, वे यह जरूर मानते हैं, अगर किसी किरदार के लिए मुझे सिक्स पैक एब की जरूरत पड़ी, तो तीन महीने के अभ्यास के बाद मैं खुद को जरूर ढाल लूंगा।

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