सलाम सलीम बाबा


चवन्नी ने यह पोस्ट पिछले साल १२ अक्टूबर को लिखी थी.चवन्नी को ख़ुशी है कि यह फिल्म ऑस्कर में श्रेष्ठ वृत्तचित्र के लिए नामांकित हुई है.चलिए उम्मीद करें कि इसे अन्तिम पुरस्कार भी मिले।

नोर्थ कोलकाता में रहते हैं सलीम बाबा. दस साल की उम्र से वे सिनेमाघरों के बाहर फेंके फिल्मों के

निगेटिव जमा कर उन्हें चिपकाते हैं और फिर चंद मिनटों की फिल्म टुकड़ियों की तरह अपने अ।सपास के बच्चों को दिखाते हैं. यह उनका पेशा है. यही उनकी अ।जीविका है. ऐसे ही फिल्में दिखाकर वे पांच बच्चों के अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं.चवन्नी को पता चला कि टिम स्टर्नबर्ग ने उन पर 14 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'सलीम बाबा' बनायी है. यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म ऑस्कर भेजी गयी थी. खुशी की बात है कि 'सलीम बाबा' अंतिम अ।ठ की सूची में अ। गयी है. अगर ज्यूरी को पसंद अ।ई तो यह नामांकित भी होगी. 'सलीम बाबा' का पूरा नाम सलीम मोहम्मद है. उन्हे अपने पिता से यह प्रोजेक्टर विरासत में मिला है. इसे हाथ से चलाया जाता है. सलीम बाबा की फिल्में देखने बच्चे जमा होते हैं. सिनेमाघरों में जाकर फिल्में देख पाने में असमर्थ बच्चे अपने चहेते स्टारों की चंद झलकियां या फिल्म टुकड़ियां देख कर ही मस्त हो जाते हैं.सलीम बाबा के पास जो हस्तचालित प्रोजेक्टर है, उस पर भी विदेशियों की नजर है. ऐसे प्रोजेक्टर दुनिया में बहुत कम बचे हैं. सलीम बाबा को इसकी मुंहमांगी कीमत मिल सकती है, लेकिन सलीम बाबा हैं कि इसे खुद से अलग नहीं करना चाहते. वे चाहते हैं कि उनके बेटे भी इस विरासत को अ।गे ले जांए. अभी उनके बेटे मदद करते हैं. लेकिन फिल्में जिस तरह से डिजीटल हो रही हैं… उस स्थिति में कुछ सालों के बाद उन्हें फिल्मों के निगेटिव कहां से मिलेंगे?'सलीम बाबा' वास्तव में सिनेमा के विकास की जिंदा कड़ी हैं. चवन्नी सलीम बाबा को सलाम करता है और चाहता है कि उनका प्रोजेक्टर सुरक्षित रहे और वह सिनेमा के मनोरंजन से वंचित बाल-बच्चों को सिनेमा से जोड़े रखे. चवन्नी टिम स्टर्नबर्ग को बधाई देता है. वह चाहता है कि 'सलीम बाबा' पहले ऑस्कर की डॉक्यूमेंट्री श्रेणी में नामांकित हो और फिर अंतिम पुरस्कार भी हासिल करे.सलाम सलीम बाबा !

Comments

क्या करेंगे पुरस्कार लेके?
Unknown said…
आपका सवाल वाजिब है.सलीम बाबा के जीवन में क्या फर्क पड़ेगा?
ऐसे कमाल के काम हमारे यहां क्‍यूं नहीं होते। ऐसी कमाल की डॉक्‍यूमेंट्री नहीं बनती, कमाल की फिल्‍में नहीं, किताबें नहीं, कुछ भी नहीं।

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