मेरी बीवी का जवाब नहीं: अभिषेक बच्चन

-अजय ब्रह्मात्मज
वे भारत ही नहीं, एशिया के सर्वाधिक ग्लैमरस परिवार के युवा सदस्य हैं, लेकिन घर जाने से पहले अभिषेक बच्चन शूटिंग स्पॉट के मेकअप रूम में पैनकेक की परतों के साथ ही अपनी हाई-फाई प्रोफाइल भी उतार आते हैं। ऐश्वर्या राय के साथ उनकी शादी का कार्ड पाना पूरे मुल्क की हसरत थी, तो अब देश इस इंतजार में है कि उनके आंगन में बच्चे की किलकारी कब गूंजेगी? एक लंबी बातचीत में जूनियर बच्चन ने खोला अपनी निजी जिंदगी के कई पन्नों को-
ऐश्वर्या राय में ऐसी क्या खास बात है कि आपने उनसे शादी की?
वह मेरी सबसे अच्छी दोस्त थीं। वह ऐसी हैं, जिनके साथ मैं अपनी जिंदगी गुजार सकता हूं। वह ऐसी हैं, जो सिर्फ मेरी ही चिंता नहीं करतीं, बल्कि पूरे परिवार का ख्याल रखती हैं। वह जैसी इंसान हैं, उनके बारे में कुछ भी कहना कम होगा। वह अत्यंत दयालु और सुंदर हैं। बचपन से मुझे मां-पिताजी ने यही शिक्षा दी कि जिंदगी का उद्देश्य बेहतर इंसान बनना होना चाहिए। ऐश्वर्या वाकई बेहतर इंसान हैं।
शादी के बाद आपका जीवन कितना बदला है?
फर्क यह आया है कि परिवार में अब एक नया सदस्य आ गया है। शादी के बाद सभी का जीवन बदलता है, जिम्मेदारी बढ़ती है। मैं कोई अलग या खास आदमी नहीं हूं। मेरे जीवन में भी बदलाव आया है।
अगर कोई विवाद हुआ तो किसकी बात मानी जाती है या मानी जाएगी?
आपकी शादी हो गई है न। आप अच्छी तरह जानते हैं कि किसकी बात मानी जाती है। वैसे अभी तक ऐसी स्थिति नहीं आई है। जब आएगी, तब देखेंगे।
ऐश्वर्या कितनी अच्छी पत्नी हैं?
मेरी तो एक ही पत्नी है और वह ऐश्वर्या हैं, इसलिए मैं किसी से उनकी तुलना नहीं कर सकता। जो मैंने सोचा था, वैसी पत्नी मिली।
जया जी के साथ ऐश्वर्या के संबंध के बारे में बताएं?
बहुत ही अच्छा है। मुझसे ज्यादा प्रगाढ़ संबंध हैं मां से, जो बहुत खास है। दोनों एक-दूसरे को स्नेह और आदर देते हैं। साथ में काफी समय बिताते हैं। मेरे मां-पिताजी को लगता है कि परिवार में एक बेटी आ गई है। उनके साथ बहू से ज्यादा बेटी जैसा व्यवहार होता है। श्वेता दीदी तो अब दिल्ली में रहती हैं, यहां परिवार में ऐश्वर्या उनकी कमी पूरी करती हैं।
कोई पुरानी आदत आप को छोड़नी पड़ी?
बिल्कुल नहीं। जैसा था, वैसा ही हूं।
ऐश्वर्या को आपने कितना बदल दिया?
यह आप उनसे पूछिए। मैं कैसे बता सकता हूं?
क्या ऐश्वर्या को खाना पकाना आता है?
जी हां, जिस दिन वह घर में आई, उस दिन रस्म के मुताबिक उन्होंने रसोई में काम किया। वह हलवा बहुत अच्छा बनाती हैं। हलवा मेरे घर में सभी को बहुत पसंद है।
आशंका व्यक्त की जा रही है कि शायद ऐश्वर्या लंबे समय तक फिल्मों में काम न करें?
वो काम कर रही हैं। लगातार फिल्में हैं उनके पास, वो काम करती रहेंगी। मैं चाहूंगा कि ऐश्वर्या काम करती रहें। मैं उनका जबरदस्त फैन हूं। यही चाहूंगा कि वो फिल्में करती रहें, जब तक उनका मन हो। मैंने, मां ने या पिताजी ने उन्हें कभी रोका नहीं है कि अब आप काम नहीं कर सकतीं। लोग भूल जाते हैं कि मेरे मां-पिता दोनों एक्टर हैं। मेरी मां ने शादी के बाद एक्टिंग नहीं छोड़ी, मेरी पैदाइश के समय उन्होंने एक्टिंग छोड़ी। मेरी बहन तब ढाई साल की थी, लेकिन वह काम करती रही थीं। उन्होंने एक्टिंग इसलिए छोड़ी कि उस समय वह सारा ध्यान परिवार में लगाना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि अब मैं जीवन के इस दौर का आनंद उठाना चाहती हूं। वह उनकी व्यक्तिगत पसंद थी। उनसे किसी ने एक्टिंग छोड़ने के लिए नहीं कहा था। नौवें दशक के आरंभ में उन्होंने सिलसिला की। फिर हम बड़े हो गए। बोर्डिग स्कूल चले गए। जब हम बड़े हो गए तो उन्होंने फिर से एक्टिंग शुरू की और हजार चौरासी की मां जैसी फिल्म की। उस फिल्म के रोल ने उन्हें प्रेरित किया। मेरे परिवार में किसी ने किसी को कभी मना नहीं किया। मैं उम्मीद करता हूं कि ऐश्वर्या काम करती रहेंगी।
भारत इतना बड़ा देश है। इसमें दो राज्यों और संस्कृतियों के परिवारों में शादी होती है तो खान-पान से लेकर रस्म-ओ-रिवाज तक की कई दिक्कतें आती हैं। आप लोगों के परिवार में ऐसा सांस्कृतिक फर्क तो नहीं होगा?
पारंपरिक रूप से हम यूपी के हैं और वह कर्नाटक की हैं, लेकिन ऐसा कोई फर्क नहीं महसूस हुआ। ऐश्वर्या बहुत ही मिलनसार हैं और जल्दी घुल-मिल जाती हैं।
कितनी कोशिश रहती है कि आप दोनों साथ रहें और दिखें?
हम दोनों पति-पत्नी हैं। हम साथ रहना चाहते हैं। यह सामान्य बात है कि हम बाहर साथ जाएं और साथ दिखें। मौका मिलता है तो हम हमेशा साथ ही आते-जाते हैं। मैं न रहूं तो वह अकेली जाती हैं या वो न रहें तो मैं अकेला जाता हूं। कोशिश यही रहती है कि हम ज्यादा समय तक दूर न रहें।
पिछले साल खबर आई थी कि आप द्वारिका गए थे बच्चे की कामना लेकर, इस बारे में क्या कहेगे?
बिल्कुल गलत, मेरे दादा जी की पुण्यतिथि थी। हम लोग हर साल उनकी पुण्यतिथि के दिन किसी धार्मिक स्थान पर जाते हैं। ईश्वर का आशीर्वाद लेते हैं और उनके लिए प्रार्थना करते हैं।
फिर भी बच्चे की कामना तो होगी ही?
अभी हम लोगों ने इस बारे में नहीं सोचा है। हम युवा दंपति हैं और दोनों ही अपने-अपने काम में काफी व्यस्त हैं। हम दोनों मानते हैं कि जब बच्चे होने होंगे तो हो जाएंगे, आप उसकी प्लानिंग नहीं कर सकते।
एक बार खबर आई थी कि अमिताभ बच्चन ने अभिषेक बच्चन के लिए बेटी की नहीं, बेटे की कामना की। यह घटना समीर जी की पुस्तक के विमोचन के समय की है।
देखिए कि मीडिया कैसे गलत तरीके से कोई बात पेश करता है। मेरे पिताजी समीर जी की पुस्तक के विमोचन समारोह में गए थे। समीर जी ने कहा था कि मेरे पिता ने अमिताभ बच्चन के लिए गीत लिखे, मैं अभिषेक के लिए लिख रहा हूं और मैं चाहूंगा कि मेरा बेटा अभिषेक के बेटे के लिए गीत लिखे। इस संदर्भ में पिता जी ने कहा कि मैं जरूर चाहूंगा कि आपके बेटे मेरे पोते के लिए गीत लिखें। मीडिया ने इस वक्तव्य को गलत तरीके से पेश किया।
अपने पिताजी के बारे में कुछ बताएं?
उनके साथ सेट पर बीता हर दिन नया अनुभव छोड़ जाता है। जितना समय साथ बीते, उतना अच्छा। हर दिन विशेष होता है। वे पिता, इंसान और एक्टर सभी रूपों में द बेस्ट हैं।
अगर मैं पूछूं कि आप ने उनसे क्या सीखा है तो?
सब कुछ। मैंने अपने मा-पिता से ही सीखा है। मैं आज जो भी हूं, उन्हीं की वजह से हूँ। मैंने माँ-पिताजी की फिल्में देखी हैं और उनसे सीखा है। सेट पर वे किस तरह रोल को अप्रोच करते हैं? सेट से बाहर वे कैसे व्यवहार करते हैं? इंसान को कैसा होना चाहिए? इसके सर्वोत्तम उदाहरण हैं डैड।
आपके परिवार के चारों सदस्य अत्यंत व्यस्त हैं। एक परिवार के तौर पर मिलना-जुलना कैसे होता है?
बचपन से माँ का एक नियम रहा है कि अगर सारे लोग मुंबई में हैं तो चौबीस घंटे में एक बार सभी साथ मिलकर खाएंगे। वह चाहे नाश्ता हो या दिन या रात का खाना। आज भी वही नियम लागू होता है। हम लोग ज्यादातर डिनर एक साथ करते हैं।
लेकिन आप लोगों का काम तो अलग-अलग समय पर खत्म होता है?
सभी लोग इंतजार करते हैं। अगर मेरा पैकअप एक बजे रात को हो रहा है और पापा का छह बजे हो गया है तो वे इंतजार करेगे, मेरे लिए या मैं उनके लिए। पूरा परिवार एक साथ ही डिनर करता है।
आपके दादा जी के समय नियम था कि डायनिंग टेबल पर सभी हिंदी में बात करेंगे।
आज भी यही कोशिश रहती है। मां की सलाह रहती है कि डायनिंग टेबल पर कोई भी फिल्मों की बात नहीं करेगा। यह दादा जी के वक्त से चल रहा है। हम लोग अन्य विषयों पर बातें करते हैं। हम लोग हर तरह के विषयों पर बातें करते हैं। कितनी बातें हैं। दुनिया की इतनी घटनाएं हैं। मीडिया की वजह से हमें कितनी तो जानकारियां मिल जाती हैं। किसी ने कोई किताब पढ़ी हो तो उसकी बात होगी। ये सारे नियम-सिद्धांत दादा जी के समय से बने हैं।
आप एक अतिव्यस्त अभिनेता के पुत्र के रूप में बड़े हुए। आपका बचपन कैसा बीता था?
बचपन की अनेक यादें हैं। खासकर संडे की यादों से आज भी मन खुश हो जाता है। पिताजी संडे को छुट्टी लिया करते थे। उस दिन वे शूटिंग नहीं करते थे। हमलोग पूरे हफ्ते संडे का इंतजार करते थे और उसकी प्लानिंग करते थे। कई बार तो उनके साथ फुर्सत के पल बिताना ही महत्वपूर्ण हो जाता था। प्रतीक्षा के गार्डन में हम लोग खूब खेलते थे। संडे के लंच का खास महत्व रहता था। दादा जी-दादी जी, चाचा का परिवार और हमलोग एकत्रित होकर लंच लेते थे। एक कमरे में साथ बैठने की ऊर्जा आज भी महसूस करता हूं। अब लगता है कि कैसे हमारे अंदर भारतीय मूल्य आए। कैसे हम ने संयुक्त परिवार का महत्व समझा। पिताजी कभी-कभी यूं ही ड्राइव पर ले जाते थे। उनके साथ होने का आनंद कभी कम नहीं हुआ। आज भी पिताजी साथ रहते हैं तो मैं बहुत एक्साइटेड रहता हूं।
बचपन में पिताजी की डांट भी तो पड़ती होगी?
उन्होंने कभी किसी बात पर नहीं डांटा या पीटा। हमलोगों को अनुशासन में रखा जाता था, लेकिन कभी कोई चीज थोपी नहीं जाती थी। मां और पिताजी हमेशा सपोर्टिव रहे। हमने जो चाहा, वही किया और हर काम में उन दोनों का निर्देशन और समर्थन मिला। उनकी कोशिश रही कि हमें बेहतरीन चीजें और सुविधाएं दें। वे सब कुछ मुहैया करवा देते थे। यह हम पर निर्भर करता था कि हम उन चीजों और सुविधाओं का क्या उपयोग करते हैं? मां और पिताजी ने हमें खुला माहौल दिया। मैं अब महसूस करता हूं कि कैसे मां और पिताजी ने बगैर किसी प्रत्यक्ष दबाव के हमारे अंदर जिम्मेदारी का एहसास भरा। उन्होंने कभी नहीं कहा कि यह तुम्हें करना चाहिए या वह नहीं करना चाहिए। उन्होंने हमें ऐसी समझदारी दी कि हम स्वयं अपने लिए अच्छा-बुरा तय कर सकें।
मीडिया के रवैए के बारे में क्या कहेंगे?
पापा हमेशा कहते हैं कि यह जिंदगी तुमने चुनी है। यह सब इस जिंदगी का हिस्सा है। अगर पसंद नहीं है तो एक्टर मत बनो। अगर एक्टर बने हो तो यह सब होगा। तुम्हें इसके साथ जीना है और हम इसके साथ जीते हैं। मीडिया इतना बुरा नहीं है।
कहते हैं कि मीडिया आपकी प्रायवेसी में घुसपैठ करता है?
मैं बहुत ही प्रायवेट व्यक्ति हूं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपनी प्रायवेसी कैसे संभालते हैं।
क्या आप मुंबई में आसानी से घूम लेते हैं। दर्शक और प्रशंसक घेर लेते होंगे?
मैं हाजी अली में जाकर जूस पीता हूं। वरली सी फेस पर भुट्टा खाता हूं और शिवाजी पार्क में वड़ा-पाव खा लेता हूं। आप अपना खाइए-पीजिए। हां, किसी ने पहचान लिया तो वह पास आता है। वे क्या चाहते हैं, एक ऑटोग्राफ। कभी हाथ मिलाना चाहते हैं या साथ में फोटो खींचते हैं। इसमें क्या जाता है? आप उन्हें खुश कर दें। मैं आज जो कुछ भी हूं, उनकी वजह से ही हूं। उनसे कैसे दूर रह सकता हूं।

Comments

अभिषेक जी, आप का इन्टर्व्यू पढा, आप का नजरिया बहुत सुन्दर है।
- निशिकान्त
Anonymous said…
इस पठनीय पोस्ट के लिये धन्यवाद!
२ पीढीयोँ की सफलता से आगे बढकर अपनी प्रतिभा और व्यक्तित्त्व को सँवारने के महत्त्वपूर्ण कार्य मेँ लगे अभिषेक बेटे को मेरे आशिष और बहुरानी ( Aishwarya ) तो खैर करोडोँ मेँ एक हैँ -
उसे भी अखँड सौभाग्यवती भव -
- लावण्या
Anonymous said…
बहुत अच्छा अजय! सितारों से इतनी सहज बातें सभी नहीं कर सकते...मज़ा आया !

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