बिग बक बन्नी

चवन्नी को बिग बक बन्नी का यह संक्षिप्त परिचय रवि रतलामी से प्राप्त हुआ।
तीन घंटों की हिन्दी फ़िल्में क्या आपको बोर नहीं करतीं? आम अंग्रेज़ी फ़िल्में भी डेढ़-दो घंटे से कम नहीं होतीं.

आमतौर पर किसी भी फ़िल्म में एक छोटी सी कथा होती है - बुराई पर अच्छाई की जीत. इसे कहने के लिए, इसी बात को बताने के लिए दर्शकों पर लगातार डेढ़ से तीन घंटे अत्याचार करना कितना सही है? कोई फ़िल्म कितना ही अच्छा बन जाए, गीत संगीत, दृश्य और भावप्रण अभिनय से सज जाए, परंतु फ़िल्म की लंबाई दर्शकों को पहलू बदलने को, बीच-बीच में जम्हाई लेने को मजबूर कर ही देती है.

ऐसे में, एक घिसी पिटी कहानी पर बनाई गई एक छोटी सी त्रिआयामी एनीमेशन फिल्म – बिग बक बन्नी देखना कई मामलों में सुकून दायक है.

वैसे यह फिल्म कई मामलों में बेजोड़ भी है. इसे ब्लेंडर नाम के एक मुफ़्त स्रोत अनुप्रयोग की सहायता से तैयार किया गया है. इस फिल्म को क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस के तहत जारी किया गया है जिसे हर कोई मुफ़्त में देख सकता है व लोगों में वितरित कर सकता है. यानी आपको इसे देखने के लिए इसे खरीदने की आवश्यकता नहीं.

फ़िल्म का तकनीकी पक्ष तो शानदार है ही, प्रस्तुति, कथ्य में कसावट, दृश्यों की बुनावट सभी कुछ दर्शनीय है. दस मिनट से भी कम समय की इस फ़िल्म को देखकर आप महसूस कर सकते हैं कि बड़ी से बड़ी बात कहने के लिए ढाई तीन घंटे की फ़िल्मों की आवश्यकता ही क्या है?

यू ट्यूब में इस फ़िल्म को यहाँ या फिर यहाँ देखें. इसके बढ़िया क्वालिटी फ़िल्म को डाउनलोड कर देखने के लिए (जिसमें, जाहिर है आपको ज्यादा आनंद आएगा,) यहाँ चटका लगाएं.

Comments

Udan Tashtari said…
आभार आपका और वाया आपके रवि रतलामी का!!

Popular posts from this blog

लोग मुझे भूल जायेंगे,बाबूजी को याद रखेंगे,क्योंकि उन्होंने साहित्य रचा है -अमिताभ बच्चन

फिल्‍म समीक्षा : एंग्री इंडियन गॉडेसेस

तो शुरू करें