हार्दिक मार्मिक बातें सितारों की

हार्दिक मार्मिक बातें सितारों की-अजय ब्रह्मात्‍मज
इन दिनों फिल्मी सितारे आए दिन टीवी पर नजर आते हैं। वे खुद ही अपनी फिल्मों के बारे में बता रहे होते हैं या फिल्म पत्रकारों की जरूरी जिज्ञासाओं के घिसे-पिटे जवाब दे रहे होते हैं। मैं नहीं मानता कि पत्रकारों के सवाल एक जैसे या घिसे-पिटे होते हैं। सच बताएं, तो ज्यादातर फिल्म स्टार एहसान करने के अंदाज में इंटरव्यू देते हैं। वे गौर से सवाल भी नहीं सुनते और पहले से रटे या तैयार किए जवाबों को दोहराते रहते हैं। यही कारण है कि किसी भी फिल्म की रिलीज के समय हर चैनल, अखबार और पत्रिकाओं में फिल्म स्टार एक ही बात दोहराते दिखाई-सुनाई पड़ते हैं।

मामला इतना मतलबी हो चुका है कि वे फिल्म से अलग या ज्यादा कोई भी बात नहीं करना चाहते। प्रचारकों और पीआर कंपनियों पर दबाव रहता है कि कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा इंटरव्यू निबटा दो। नतीजा सभी के सामने होता है। उनके इंटरव्यू सुन, पढ़ या देख कर न तो फिल्म की सही जानकारी मिलती है और न उनकी पर्सनल जिंदगी या सोच के बारे में ज्यादा कुछ पता चलता है। इंटरव्यू देने का रिवाज किसी रूढि़ की तरह चल रहा है। अब तो पत्रकारों की रुचि भी स्टारों के रवैए के कारण इंटरव्यू में कम होती जा रही है। ऐसे में कभी अमिताभ बच्चन या शाहरुख खान या आमिर खान फुरसत में मिल जाते हैं, तो सवालों की कमी हो जाती है। कुछ पत्रकार तो सामूहिक साक्षात्कार के लिए प्रोत्साहित करते हैं। समूह में कुछ पूछना भी नहीं पड़ता और उधार के सवालों से इंटरव्यू अच्छा बन जाता है।

कभी हम फूल खिले हैं गुलशन गुलशन में तबस्सुम के साथ सितारों से मिला करते थे। तबस्सुम की बातचीत में उनके नाम जैसी ही मुस्कराहट रहती थी। फिर निर्देशक बनने से पहले लंबे समय तक कुणाल कोहली ने सितारों की बातचीत परोसने का काम किया। सैटेलाइट चैनलों के आ जाने के बाद छोटे पर्दे पर सितारों की आमद बढ़ी। दोनों ने एक-दूसरे की जरूरत समझी और पूरा सहयोग किया। इसी दौर में सितारों की बातचीत में दर्शकों की दिलचस्पी कम हुई, क्योंकि छिटपुट जवाबों से दर्शकों को संतुष्टि नहीं मिलती थी। याद होगा सैटेलाइट के इसी दौर में राजीव शुक्ला रू-ब-रू लेकर आते थे। करण थापर, प्रीतिश नंदी, वीर सांघवी, प्रणव राय आदि भी कई बार सितारों से रोचक बातें करते थे। फिर सिम्मी गरेवाल रेंदेवू लेकर आई, तो बातचीत का माहौल चकाचक सफेद हो गया। सिम्मी अपने मेहमानों से हमेशा बेदाग बातें करती थीं। चूंकि वे खुद फिल्म इंडस्ट्री की थीं, इसलिए उनके सामने बड़े से बड़े सितारों को मुंह के साथ-साथ दिल खोलने में दिक्कत नहीं होती थी। सिम्मी की कोशिश होती थी कि बातचीत में मेहमानों का गला रुंध जाए या आंखें नम हों या आंसू टपक पड़े। सिम्मी फिर से मोस्ट डिजायरेबल लेकर आई हैं। इसमें वे कुंवारे मेहमानों से बातें करती हैं।

सिम्मी से एक कदम आगे बढ़कर कॉफी विद करण लेकर करण जौहर आए, तो बातचीत जवान, दिलचस्प और रोचक हो गई। बातचीत में अंतरंगता नजर आई और मेहमानों ने अपने जीवन के प्राइवेट प्रसंगों पर भी बातें कीं। आमतौर पर फिल्म सितारे अपनी प्राइवेसी कह कर जिन सवालों से इनकार करते हैं, वैसे सवाल अगर करण पूछ लें, तो उन्हें जवाब देने में हिचक नहीं होती। दरअसल, जब एक समूह के लोग आपस में बातें करते हैं, तो ज्यादा मुखर और मुक्त रहते हैं। उनकी हार्दिक और मार्मिक बातों में मासूम चमक रहती है। हालांकि ऐसी बातचीत में आम दर्शकों की जिज्ञासाओं का समाधान नहीं हो पाता, फिर भी सितारों के मुंह से उनकी ज्ञात जानकारियां भी सुनना अच्छा लगता है।

जल्दी ही प्रीति जिंटा अप क्लोज ऐंड पर्सनल विद पीजी लेकर आ रही हैं। देखने वाली बात यह होगी कि वह सिम्मी और करण से कितनी अलग हो पाती हैं। अगर वह शेखर गुप्ता के वॉक द टॉक का अंदाज और असर ला पाएं, तो बेहतर होगा।

Comments

arvind thakur said…
चीजों को देखने का आपका नजरिया बंधे-बंधाये ढर्रे से अलग है - कुछ खास|इस आलेख में आपका वह अलहदा नजरिया साफ़-साफ़ दिखता है|मेरी बधाई एवं शुभकामनायें स्वीकार करें|
RAJESH S. KUMAR said…
इनसाइड का द एक्‍टर स्‍टूडियों इस तरह के कार्यक्रमों के लिए मिशाल ....... आशा है आपे देखा हो गा अगर नहीं तो आज ही देखें

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