कंगना रनोट का पुरस्कारों से परहेज



    नए कलाकार पुरस्कार पाने और पुरस्कार समारोहों में जाने के लिए लालायित रहते हैं। यह नेटवर्किंग और रिकॉगनिशन का मौका होता है। ‘क्वीन’ से कामयाब हुई कंगना रनोट ने अभी से कहना आरंभ कर दिया है कि वे पुरस्कार समारोहों में शामिल नहीं होना चाहतीं और न ही पुरस्कारों के लिए लालायित हैं। इंडस्ट्री में चर्चा है कि अगले साल वह अवश्य ही ‘क्वीन’ के लिए सभी पुरस्कारों में नामांकित होगी और उन्हें कुछ पुरस्कार भी मिलेंगे। पुरस्कारों के प्रति इस विरक्ति के बारे में पूछने पर कंगना का जवाब चौंकाने वाला रहा। उन्होंने पुरस्कार संबंधित गतिविधियों के व्यावहारिक पक्ष को उजागर किया। उन्होंने थोड़ा हिचकते हुए पहले कहा कि सभी पुरस्कार उपयुक्त व्यक्तियों को दिए जाते हैं, लेकिन जब बेस्ट स्माइल और बेस्ट साड़ी के पुरस्कार बंटने लगें तो सभी को खुश रखने की इस कोशिश पर संदेह होता है। दूसरे इन दिनों कम से कम 15-16 पुरस्कार समारोह होते हैं। इन समारोहों में शामिल होने के लिए पहले ढाई घंटे तो मेकअप-गेटअप करो और फिर पांच घंटे पुरस्कार समारोह में बैठो। यह एक तरह से समय और पैसे की बरबादी है। पुरस्कार समारोहों में जाने के लिए ड्रेस भी नए होने चाहिए। समय और पैसे की बरबादी का उल्लेख कर भले ही कंगना ने अपनी मध्यवर्गीय मानसिकता जाहिर की हो, लेकिन अपने परहेज की वजह बताने से वह नहीं हिचकीं। पुरस्कार समारोहों के इस पहलू पर तो कभी सोचा ही नहीं गया है।
(कंगना ने यह नहीं कहा कि 15-16 अवार्ड समारोह में जाने के लिए उतने ही ड्रेसेज भी चाहिए। उनका इंतजाम भी एक समस्‍या है। काेई ड्रेस रिपीट हुआ तो अगले दिन अखबारों में तस्‍वीरें छप जाती हैं। )

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